उत्तराखंड: देहरादून स्थित राष्ट्रीय दृष्टि दिव्यांगजन सशक्तिकरण संस्थान (NIEPVD) में पिछले कई दिनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे दृष्टि बाधित छात्रों ने आखिरकार प्रदर्शन स्थगित कर दिया है। छात्रों की प्रमुख मांगों पर प्रबंधन की ओर से सहमति बनने और कुछ मांगों पर प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब संस्थान में एक बार फिर पढ़ाई का माहौल लौट आया है। सबसे बड़ा बदलाव संस्थान के नेतृत्व में हुआ है। लगातार चल रहे आंदोलन के बीच निदेशक और प्रिंसिपल की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। अब डॉ. विनोद कुमार केन को निदेशक की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि सीनियर शिक्षिका मंजू को प्रभारी प्रिंसिपल की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
देहरादून में दिव्यांग छात्रों के लिए संचालित NIEPVD में पिछले कई दिनों से चल रहा आंदोलन आखिरकार समाप्ति की ओर पहुंच गया है। छात्रों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शैक्षणिक गतिविधियों का बहिष्कार कर दिया था। इससे संस्थान में कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। छात्रों का कहना था कि उनकी समस्याओं और जरूरतों को लंबे समय से गंभीरता से नहीं लिया जा रहा था। इसी को लेकर उन्होंने अपनी मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने का फैसला किया था।
कई दौर की बातचीत और छात्रों को समझाने के प्रयासों के बाद अब प्रबंधन और छात्रों के बीच सहमति बन पाई है। इसके बाद छात्रों ने आंदोलन स्थगित करते हुए दोबारा कक्षाओं में लौटना शुरू कर दिया है।
तीन अगस्त से आंदोलन कर रहे थे छात्र
बताया जा रहा है कि दृष्टि बाधित छात्र 3 अगस्त से आंदोलन कर रहे थे। छात्रों की मांगें केवल एक-दो मुद्दों तक सीमित नहीं थीं, बल्कि शिक्षा, तकनीकी सुविधाओं, आर्थिक सहायता और संस्थान में उपलब्ध संसाधनों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण मांगें उनके एजेंडे में शामिल थीं।
छात्रों की प्रमुख मांगों में लैपटॉप उपलब्ध कराना, स्थायी निदेशक की नियुक्ति, छात्रवृत्ति की सुविधा, किताबों की कमी दूर करना, खेल मैदान और जिम की सुविधा जैसी मांगें शामिल थीं।
दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए तकनीकी संसाधन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसे छात्रों के लिए पढ़ाई, डिजिटल सामग्री तक पहुंच और ऑनलाइन शैक्षणिक संसाधनों के इस्तेमाल में उचित तकनीकी उपकरण बड़ी भूमिका निभाते हैं। इसलिए छात्रों की ओर से लैपटॉप उपलब्ध कराने की मांग को प्रमुखता से उठाया गया।
आंदोलन के बाद संस्थान के नेतृत्व में बड़ा बदलाव
छात्रों के लगातार विरोध के बीच संस्थान के स्तर पर भी बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ है। आंदोलन के दौरान संस्थान के निदेशक के तौर पर प्रदीप जिम्मेदारी संभाल रहे थे, जबकि अमित शर्मा प्रिंसिपल के पद पर थे। अब दोनों जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है।
नए बदलाव के तहत डॉ. विनोद कुमार केन को NIEPVD का निदेशक बनाया गया है। वहीं, सीनियर शिक्षिका मंजू को प्रभारी प्रिंसिपल की जिम्मेदारी दी गई है।
यह बदलाव छात्रों के आंदोलन के बीच हुआ है, इसलिए इसे इस पूरे घटनाक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। हालांकि, प्रशासनिक बदलाव के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती छात्रों की मांगों को जमीन पर लागू करना और संस्थान में शैक्षणिक व्यवस्था को पूरी तरह सामान्य बनाए रखना होगी।
लैपटॉप खरीदने की प्रक्रिया शुरू
छात्रों की मांगों में सबसे महत्वपूर्ण मांगों में से एक लैपटॉप उपलब्ध कराने की थी। अब इस दिशा में प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
लैपटॉप आज के समय में शिक्षा का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए स्क्रीन रीडर, ऑडियो आधारित अध्ययन सामग्री और अन्य डिजिटल सुविधाओं के इस्तेमाल में कंप्यूटर और लैपटॉप काफी मददगार साबित हो सकते हैं।
ऐसे में छात्रों को लैपटॉप उपलब्ध होने से उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ डिजिटल दुनिया से जुड़ने और उच्च शिक्षा की तैयारी में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
छात्रों ने लंबे समय से इस सुविधा की मांग की थी। अब खरीद प्रक्रिया शुरू होने के बाद उम्मीद जगी है कि जल्द ही विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सकेगा।
उच्च शिक्षा के दौरान ₹2,000 प्रति माह देने पर भी सहमति
छात्रों की आर्थिक जरूरतों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण मांग पर भी सहमति बनी है। जानकारी के मुताबिक, 12वीं कक्षा पास करने के बाद उच्च शिक्षा के दौरान छात्रों को हर महीने ₹2,000 की सहायता राशि देने पर सहमति बनी है।
दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंच कई बार आर्थिक कारणों से मुश्किल हो जाती है। ऐसे में हर महीने मिलने वाली आर्थिक सहायता उनके लिए किताबें, डिजिटल संसाधन, यात्रा और अन्य शैक्षणिक जरूरतों को पूरा करने में मददगार हो सकती है।
हालांकि, इस व्यवस्था को किस तरह और किस प्रक्रिया के तहत लागू किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है। फिलहाल छात्रों की ओर से इसे सकारात्मक कदम के तौर पर देखा जा रहा है।
किताबों की कमी भी जल्द होगी दूर
छात्रों ने संस्थान में किताबों की कमी का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया था। उनका कहना था कि पढ़ाई के लिए जरूरी सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
अब प्रबंधन की ओर से ऐसी किताबें जल्द उपलब्ध कराने की बात कही गई है, जिनकी संस्थान में कमी है। इससे छात्रों की पढ़ाई को सुचारू बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए सामान्य किताबों के अलावा पढ़ने योग्य विशेष प्रारूप या डिजिटल/ऑडियो सामग्री की जरूरत भी हो सकती है। इसलिए सिर्फ किताबों की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि छात्रों की जरूरत के मुताबिक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराना भी महत्वपूर्ण होगा।
खेल मैदान और जिम की मांग भी उठी थी
NIEPVD में पढ़ाई के साथ-साथ छात्रों ने खेल और शारीरिक गतिविधियों से जुड़ी सुविधाओं की भी मांग की थी। इनमें खेल मैदान और जिम की सुविधा प्रमुख थी।
दिव्यांग छात्रों के लिए खेल केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास और सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम भी हो सकते हैं। इसलिए छात्रों की यह मांग भी संस्थान की समग्र सुविधाओं से जुड़ी हुई है।
अब देखना होगा कि इन सुविधाओं को लेकर प्रबंधन किस तरह आगे की योजना तैयार करता है।
समन्वय के बाद कक्षाओं में लौटे छात्र
प्रभारी निदेशक डॉ. विनोद कुमार केन के मुताबिक, छात्रों के साथ लगातार बातचीत और समन्वय बनाया गया। इसी प्रक्रिया के बाद छात्रों ने अपना आंदोलन स्थगित करने और दोबारा कक्षाओं में लौटने का फैसला किया।
उन्होंने कहा कि छात्रों की ओर से रखी गई मांगों पर विचार किया जा रहा है और कुछ मांगों पर काम भी शुरू कर दिया गया है।
इसका सीधा असर संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था पर पड़ा है। आंदोलन के दौरान कक्षा 9 से 12वीं तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब छात्रों के कक्षाओं में लौटने के बाद शिक्षण कार्य दोबारा सुचारू होने की उम्मीद है।
पुराना वीडियो वायरल होने से भी गरमाया था मामला
इसी बीच सोशल मीडिया पर संस्थान के पूर्व प्रिंसिपल अमित शर्मा का एक पुराना वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में वह छात्रों के साथ बातचीत करते और उन्हें आंदोलन खत्म करने के लिए कहते दिखाई दे रहे हैं।
वीडियो में छात्रों से आंदोलन खत्म करने की अपील के साथ कथित तौर पर कार्रवाई की बात भी कही जा रही है। हालांकि, महत्वपूर्ण बात यह है कि यह वीडियो कई दिन पुराना बताया जा रहा है और आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इसकी चर्चा शुरू हुई।
इस पुराने वीडियो के वायरल होने के बाद छात्रों और संस्थान के बीच चल रहे विवाद को लेकर सोशल मीडिया पर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं।
अब सबसे बड़ी चुनौती- वादों को धरातल पर उतारना
आंदोलन स्थगित होने के बाद फिलहाल संस्थान में स्थिति सामान्य होने की दिशा में बढ़ रही है। छात्र वापस कक्षाओं में पहुंच रहे हैं और शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो रही हैं। लेकिन आंदोलन खत्म होने के बाद असली परीक्षा अब प्रबंधन की है।
छात्रों ने जिन मांगों को लेकर आवाज उठाई, उनमें से कई पर सहमति बनने की बात सामने आई है। ऐसे में अब विद्यार्थियों की नजर इस बात पर रहेगी कि लैपटॉप कब मिलते हैं, किताबों की कमी कब पूरी होती है, आर्थिक सहायता कब लागू होती है और खेल सुविधाओं को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं।
केवल आश्वासन से छात्रों की समस्याएं पूरी तरह खत्म नहीं होंगी। इन मांगों को तय समयसीमा में लागू करना भी जरूरी होगा, ताकि भविष्य में छात्रों को दोबारा आंदोलन का रास्ता न अपनाना पड़े।
पढ़ाई की ओर लौटे कदम, अब उम्मीदों पर खरा उतरना होगा
NIEPVD में छात्रों का आंदोलन खत्म होना फिलहाल राहत की खबर है। कई दिनों तक प्रभावित रही पढ़ाई अब फिर पटरी पर लौट रही है। संस्थान के नेतृत्व में बदलाव और छात्रों की कुछ प्रमुख मांगों पर सहमति बनने से नई उम्मीद भी जगी है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि दृष्टि बाधित छात्र केवल सुविधाओं की मांग नहीं कर रहे थे, बल्कि वे सम्मानजनक और बेहतर शैक्षणिक माहौल चाहते हैं, जहां उन्हें पढ़ाई, तकनीक, खेल और उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त अवसर मिल सकें।
अब छात्रों ने आंदोलन स्थगित कर दिया है और कक्षाओं में लौट आए हैं। ऐसे में आगे की जिम्मेदारी संस्थान और संबंधित प्रशासन की है कि छात्रों से किए गए आश्वासनों को जल्द से जल्द पूरा किया जाए।
फिलहाल NIEPVD में आंदोलन की आवाज थम गई है, कक्षाओं में फिर पढ़ाई शुरू हो गई है और छात्रों की निगाहें अब उन फैसलों के अमल पर हैं, जिनके लिए उन्होंने कई दिनों तक संघर्ष किया।
