
नई दिल्ली। देश के आम उपभोक्ताओं, नौकरीपेशा वर्ग और माल ढुलाई क्षेत्र के लिए एक बेहद परेशान करने वाली आर्थिक खबर सामने आ रही है। वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के बीच देश में Petrol Diesel Price Hike का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने एक बार फिर आम जनता को तगड़ा झटका देते हुए घरेलू बाजार में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों और सप्लाई चेन में आए व्यवधान के चलते तेल कंपनियों ने इस बार डीजल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर और पेट्रोल की कीमतों में 2.61 रुपये प्रति लीटर की एकमुश्त बढ़ोतरी कर दी है। इस ताजा बढ़ोतरी के बाद देश के सभी प्रमुख महानगरों और राज्यों की राजधानियों में ईंधन के दाम अपने नए सर्वकालिक उच्च स्तर की ओर अग्रसर हो गए हैं।
राजधानी दिल्ली में कीमतें ₹102 के पार, आम आदमी पस्त
इस ताजा संशोधन के बाद देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिल्ली में पेट्रोल का दाम बढ़कर अब 102.12 रुपये प्रति लीटर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। वहीं, परिवहन और कृषि क्षेत्र की रीढ़ माने जाने वाले डीजल की कीमत भी दिल्ली में बढ़कर 95.20 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई है। वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमतों में हुई इस भारी वृद्धि का सीधा असर आने वाले दिनों में आवश्यक वस्तुओं, सब्जियों और एफएमसीजी (FMCG) उत्पादों की ढुलाई लागत पर पड़ेगा, जिससे रिटेल महंगाई में और इजाफा होना तय माना जा रहा है।
पहाड़ी राज्यों और दिल्ली से सटे एनसीआर (NCR) के इलाकों में स्थानीय टैक्स और वैट (VAT) की दरों के कारण ये कीमतें और भी अधिक दर्ज की जा रही हैं, जिससे आम मध्यमवर्गीय परिवार का मासिक बजट पूरी तरह से डगमगा गया है।
10 दिनों में चौथी मार: कंपनियों की ‘स्मार्ट’ मूल्य वृद्धि रणनीति
भारतीय ईंधन बाजार की सबसे चिंताजनक बात यह है कि पिछले महज 10 दिनों के भीतर यह चौथी बार है जब पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। वित्तीय विश्लेषकों के मुताबिक, ऑयल मार्केटिंग कंपनियां एकमुश्त बड़ा बोझ डालने के बजाय छोटी-छोटी मूल्य वृद्धि की रणनीति अपना रही हैं, लेकिन महज 10 दिनों में हुए इन छोटे-छोटे बदलावों ने अब एक बड़ा और भारी-भरकम रूप अख्तियार कर लिया है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो इस सिलसिले की शुरुआत मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव की स्थिति गंभीर होने के बाद हुई थी, जब तेल कंपनियों ने सबसे पहले 15 मई को पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाई थीं। इसके ठीक बाद, कंपनियों ने आर्थिक घाटे की भरपाई के लिए 19 मई और 23 मई को भी पेट्रोल और डीजल के दामों में तगड़ा इजाफा किया और अब 25 मई को चौथी बार कीमतें बढ़ाकर आम जनता की कमर तोड़ दी है।
4 साल का सूखा समाप्त, क्यों मजबूर हुईं तेल कंपनियां?
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि देश में बीते 4 सालों से पेट्रोल और डीजल की कीमतें पूरी तरह से स्थिर बनी हुई थीं और राजनीतिक व सामाजिक मोर्चों को देखते हुए इनमें किसी भी तरह का कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया था। इस लंबी स्थिरता के बाद अचानक आए इस उबाल के पीछे वैश्विक परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। दरअसल, मिडिल-ईस्ट (मध्य-पूर्व) में शुरू हुए युद्ध और सैन्य टकराव के बाद लाल सागर और जलडमरूमध्य के व्यापारिक मार्गों से होकर गुजरने वाली कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है।
सप्लाई चेन टूटने की वजह से अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजारों में कच्चा तेल काफी महंगा हो गया। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है, ऐसे में वैश्विक स्तर पर कच्चा तेल महंगा होने से भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) को घरेलू बाजार में पुरानी दरों पर तेल बेचने के कारण रोजाना हजारों करोड़ रुपये का भारी-भरकम नुकसान उठाना पड़ रहा था। इसी संचित अंडर-रिकवरी और वित्तीय घाटे को कम करने के लिए कंपनियों ने कीमतों को नियंत्रण-मुक्त करते हुए यह कदम उठाया है।
बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण: “कंपनियां अपने रिफाइनिंग मार्जिन और कैश फ्लो को बचाने के लिए मजबूरन इस नुकसान को उपभोक्ताओं पर पास-ऑन कर रही हैं। जब तक कच्चे तेल की वैश्विक आपूर्ति सामान्य नहीं होती, तब तक कीमतों को थामना किसी भी सरकार या कंपनी के लिए लगभग असंभव होगा।”
कुल बढ़ोतरी ₹7.50 के पार, आगे क्या होंगे हालात?
कीमतों में बढ़ोतरी का यह वर्तमान दौर शुरू होने से पहले तक दिल्ली में 1 लीटर पेट्रोल की कीमत 94.77 रुपये और एक लीटर डीजल की कीमत 87.67 रुपये के स्तर पर टिकी हुई थी। लेकिन अब आंकड़ों का विश्लेषण करें तो साफ पता चलता है कि देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल के दाम में अभी तक कुल 7.35 रुपये प्रति लीटर और डीजल के दाम में 7.53 रुपये प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी हो चुकी है।
मिडिल-ईस्ट संकट का असर और ओपेक (OPEC) देशों द्वारा उत्पादन में की जा रही कटौती को देखते हुए ऊर्जा क्षेत्र के विश्लेषक बेहद सतर्क हैं। मौजूदा भू-राजनीतिक और आर्थिक हालातों को देखते हुए आज की तारीख में यह सटीक अनुमान लगाना बेहद मुश्किल है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अभी और कितनी बढ़ोतरी होना बाकी है। यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $90 से $100 प्रति बैरल के दायरे में बनी रहती हैं, तो आने वाले हफ्तों में आम उपभोक्ताओं को ईंधन की नई कीमतें और भी डराने वाली मिल सकती हैं। फिलहाल, उद्योग जगत और आम जनता दोनों की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार टैक्स या एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर इस चौतरफा मार से कोई तात्कालिक राहत देगी या नहीं।



