देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं, पेपर लीक और छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों को लेकर राजनीतिक माहौल लगातार गर्माता जा रहा है। इसी बीच कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ बड़ा प्रदर्शन किया। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा समेत कई वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च करते हुए पहुंचे और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाई जा रही है और सरकार संसद में इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा से बच रही है।
कांग्रेस के इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में सांसद और वरिष्ठ नेता शामिल हुए। राहुल गांधी के साथ मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी, के.सी. वेणुगोपाल, पवन खेड़ा सहित कई अन्य नेता मौजूद रहे। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि देश के युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर सरकार को जवाब देना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी करते हुए कहा कि छात्रों के साथ हुई कथित बर्बरता और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए विपक्ष प्रधानमंत्री से जवाब मांगने जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न तो अपनी जिम्मेदारी स्वीकार कर रही है और न ही संसद में इस विषय पर चर्चा कराना चाहती है। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर जवाबदेही तय होनी चाहिए और सरकार को इस मामले में स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शन के दौरान केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष लगातार संसद में छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग कर रहा है, लेकिन चर्चा की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि जिन युवाओं के भविष्य का सवाल है, उनकी आवाज सुनी जानी चाहिए। प्रियंका गांधी ने कहा कि यदि छात्र अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे हैं, तो उनकी बात सुनना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग दोहराई।
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका सरकार से जवाब मांगने की होती है और छात्रों से जुड़े इतने महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा होना आवश्यक है। उनके अनुसार यदि सरकार के पास अपनी नीतियों का जवाब है तो उसे संसद में खुलकर चर्चा करनी चाहिए।
इसी बीच पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता चरणजीत सिंह चन्नी को हिरासत में लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद उन्होंने सरकार की कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना प्रत्येक नागरिक का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों की समस्याओं को सुनने के बजाय उनके समर्थन में आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई की जा रही है।
कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसदों को संसद में अपनी बात रखने का पूरा अवसर नहीं मिल रहा है। उनका कहना था कि जब संसद के भीतर चर्चा की अनुमति नहीं मिलती, तब विपक्ष को अपनी बात जनता तक पहुंचाने के लिए संसद के बाहर प्रदर्शन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सीधे संवाद करना चाहिए और उनकी चिंताओं का समाधान निकालना चाहिए।
कांग्रेस ने इस पूरे घटनाक्रम के बीच अपनी कानूनी टीम को भी सक्रिय कर दिया है। पार्टी ने निर्देश दिए हैं कि विरोध-प्रदर्शनों के दौरान यदि किसी छात्र को गिरफ्तार किया जाता है, हिरासत में लिया जाता है या किसी प्रकार की कानूनी सहायता की आवश्यकता होती है, तो कांग्रेस की लीगल टीम उसे हरसंभव मदद उपलब्ध कराएगी। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करना उसकी प्राथमिकता है और छात्रों को किसी भी प्रकार की कानूनी परेशानी में अकेला नहीं छोड़ा जाएगा।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने प्रदर्शन के बाद राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल पहुंचकर घायल छात्रों से भी मुलाकात की। उन्होंने छात्रों का हालचाल जाना और उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि जिन छात्रों को विरोध-प्रदर्शन के दौरान चोटें आई हैं, उनके साथ पूरी संवेदनशीलता के साथ व्यवहार किया जाना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाला जाना चाहिए।
देशभर में हाल के दिनों में प्रतियोगी परीक्षाओं, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता को लेकर लगातार बहस चल रही है। विपक्ष इन मुद्दों को युवाओं के भविष्य से जोड़ते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि परीक्षा प्रणाली को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह मुद्दा अब केवल शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का भी प्रमुख विषय बन चुका है।
फिलहाल कांग्रेस का यह प्रदर्शन स्पष्ट संकेत देता है कि पार्टी आने वाले दिनों में छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाती रहेगी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार पर भी इन मांगों और आरोपों को लेकर राजनीतिक दबाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि संसद और सरकार इस मुद्दे पर आगे क्या कदम उठाती है तथा छात्रों की चिंताओं को दूर करने के लिए कौन से ठोस निर्णय लिए जाते हैं।
