नई दिल्ली: नीट (NEET) और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित पेपर लीक धांधली को लेकर देश की राजधानी दिल्ली में छिड़ा राजनीतिक संग्राम अपने चरम पर पहुँच गया है। मंगलवार देर रात से प्रधानमंत्री आवास के पास चल रहा विपक्ष का अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन बुधवार को एक बड़े पुलिस एक्शन के साथ समाप्त हुआ। दिल्ली पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम उठाते हुए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को हिरासत में ले लिया है।
अति-सुरक्षित लुटियंस दिल्ली के इस इलाके को पूरी तरह से सील कर दिया गया है। पुलिस तीनों शीर्ष नेताओं और उनके समर्थकों को जबरन धरना स्थल से उठाकर बसों में भरकर नजदीकी पुलिस स्टेशनों में ले गई।
#WATCH | Delhi: Visuals of Lok Sabha LoP Rahul Gandhi, protesting with Opposition leaders and workers at Lok Kalyan Marg being detained by Delhi Police.
(Source: Congress) pic.twitter.com/j9cOkbJrwW
— ANI (@ANI) July 21, 2026
सपा का समर्थन और विपक्ष की एकजुटता
इस राजनीतिक घटनाक्रम में बड़ा मोड़ तब आया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव अपने दर्जनों सांसदों और समर्थकों के साथ राहुल गांधी के धरने को अपना पूर्ण समर्थन देने अचानक धरना स्थल पर पहुँच गए। इंडिया गठबंधन के इस संयुक्त शक्ति प्रदर्शन ने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस प्रशासन की चिंताएं बढ़ा दीं।
पुलिस ने सबसे पहले अखिलेश यादव और उनके साथ आए सांसदों को घेरा और उन्हें हिरासत में लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश यादव केंद्र सरकार पर जमकर बरसे। उन्होंने कहा:
“देश के लाखों होनहार छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। यह देश के प्रधानमंत्री की नैतिक ज़िम्मेदारी है कि वे युवाओं की जायज मांगें सुनें और उनके दर्द को समझें। आखिर सरकार छात्रों और युवाओं की मांगें मानने से पीछे क्यों हट रही है?”
प्रियंका गांधी को हिरासत में लेने में छूटे पुलिस के पसीने
धरना स्थल पर सबसे नाटकीय दृश्य तब देखने को मिला जब दिल्ली पुलिस की टीम प्रियंका गांधी वाड्रा को हिरासत में लेने पहुँची। पुलिस ने सबसे पहले सुरक्षा घेरे को तोड़ते हुए राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निजी सुरक्षाकर्मियों को हिरासत में लेकर अलग किया।
इसके बाद जब प्रियंका गांधी को पुलिस बस में बैठाया गया, तो वे विरोध जताते हुए लगातार बस के पायदान और गेट पर ही अड़ी रहीं। महिला पुलिसकर्मियों ने उन्हें बस के अंदर ले जाने की काफी कोशिश की, लेकिन वे पीछे हटने को तैयार नहीं हुईं। आखिरकार तीन से चार महिला पुलिसकर्मियों ने मिलकर उन्हें पकड़ा और गेट पर खड़े-खड़े ही हिरासत में लेकर रवाना किया।
हिरासत में लिए जाने के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भाजपा और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा:
“वे पूरी तरह से डरपोक हैं और डरे हुए हैं। वे जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन हम उनसे बिल्कुल नहीं डरते। असलियत यह है कि वे विपक्ष और देश के युवाओं से डरते हैं।”
रणदीप सुरजेवाला का सरकार पर प्रहार: “यह अंत नहीं, क्रांति की शुरुआत है”
इस पूरी पुलिसिया कार्रवाई के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने भी केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिसिया बल प्रयोग से विपक्ष का आंदोलन थमने वाला नहीं है।
सुरजेवाला ने कहा:
“यह विरोध प्रदर्शन का अंत नहीं है, बल्कि राहुल गांधी के सशक्त नेतृत्व में एक नई क्रांति की शुरुआत है। मोदी सरकार हमें जेलों में डाल सकती है, हम पर लाठीचार्ज करा सकती है या हमारे साथ कितना भी बुरा बर्ताव कर सकती है, लेकिन प्रधानमंत्री को भारत के उन लाखों बेटे-बेटियों को जवाब देना ही होगा, जिन्होंने पेपर लीक और प्रशासनिक नाकामी के कारण अपना भविष्य खो दिया है और अपने परिवारों की उम्मीदों को टूटते देखा है।”
मंत्री की मध्यस्थता बेअसर, इस्तीफे पर अड़ा रहा विपक्ष
इससे पहले, देर रात धरने की शुरुआत के समय केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सरकार के प्रतिनिधि के रूप में राहुल गांधी को मनाने धरना स्थल पर पहुँचे थे। उन्होंने विपक्ष से धरना खत्म करने की अपील की थी और संसद में चर्चा कराने का आश्वासन भी दिया था।
हालांकि, राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे, दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई और प्रभावित छात्रों को राहत देने की मांगों पर अड़े रहे। वार्ता बेनतीजा रहने के बाद बुधवार सुबह दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर बल प्रयोग कर पूरे धरना स्थल को खाली कराने का निर्णय लिया।
राजनीतिक मायने और आगे का रुख
विपक्ष के तमाम बड़े चेहरों की एक साथ गिरफ्तारी से यह साफ हो गया है कि संसद का आगामी सत्र भारी हंगामेदार रहने वाला है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और प्रियंका गांधी की इस एकजुटता ने नीट और पेपर लीक मुद्दे को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया है।
अब देखना यह होगा कि लुटियंस दिल्ली से उठी यह विरोध की चिंगारी देशभर के छात्र आंदोलनों को किस दिशा में ले जाती है और संसद पटल पर सरकार इस संयुक्त विपक्षी हमले का सामना किस रणनीति से करती है।
