
पाकिस्तान में आर्थिक संकट लगातार गहराता जा रहा है और अब इसका सबसे बड़ा असर आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर दिखाई दे रहा है। पड़ोसी देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी हैं। हालात ऐसे हैं कि पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतें 400 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के पार पहुंच गई हैं। हालांकि सरकारी स्तर पर जारी एक्स-डिपो कीमतें 400 रुपये से थोड़ी कम बताई जा रही हैं, लेकिन पेट्रोल पंपों पर डीलर कमीशन, ट्रांसपोर्ट चार्ज और अन्य टैक्स जुड़ने के बाद उपभोक्ताओं को 400 रुपये से ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है।
पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने गुरुवार देर रात पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी का ऐलान किया। यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब देश पहले से ही महंगाई, विदेशी कर्ज और आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने पाकिस्तान की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ हुई सहमति के बाद सरकार ने 8 मई को समाप्त सप्ताह के लिए नई ईंधन दरें लागू कीं। सरकार ने पेट्रोल की कीमत में 6.51 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल की कीमत में 19.39 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की।
नई दरों के बाद हाई-स्पीड डीजल की एक्स-डिपो कीमत 380.19 रुपये से बढ़कर 399.58 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हो गई। वहीं पेट्रोल की कीमत 393.35 रुपये से बढ़कर 399.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तय की गई। लेकिन वास्तविक खुदरा बिक्री कीमत इससे अधिक बताई जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान में डीजल की कीमत बढ़ने का असर सीधे महंगाई पर पड़ता है, क्योंकि देश में माल ढुलाई का बड़ा हिस्सा डीजल वाहनों पर निर्भर करता है। ट्रक, बसें और कृषि मशीनरी मुख्य रूप से हाई-स्पीड डीजल का इस्तेमाल करती हैं। ऐसे में डीजल महंगा होने से खाने-पीने की चीजों, सब्जियों, फलों और अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी तय मानी जा रही है।
दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान में डीजल की कीमत अप्रैल महीने में एक समय 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। हालांकि बाद में पेट्रोलियम लेवी हटाने के कारण कुछ राहत मिली और कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, लेकिन अब एक बार फिर ईंधन की कीमतें तेजी से ऊपर जा रही हैं।
भारत की तुलना में पाकिस्तान में ईंधन काफी महंगा हो चुका है। दिल्ली में जहां पेट्रोल लगभग 94.77 भारतीय रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, वहीं पाकिस्तानी मुद्रा में इसकी कीमत करीब 278 रुपये के बराबर बैठती है। इसके मुकाबले पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत लगभग 400 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर है। यानी पड़ोसी देश में ईंधन भारत के मुकाबले करीब 50 प्रतिशत तक ज्यादा महंगा हो गया है।
पाकिस्तान सरकार को डर है कि ईंधन की लगातार बढ़ती कीमतों से जनता में नाराजगी बढ़ सकती है। इसी कारण सरकार ने मोटरसाइकिल चालकों, किसानों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर के लिए दी जाने वाली फ्यूल सब्सिडी को एक महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि मौजूदा संकट के दौरान आर्थिक रूप से कमजोर तबकों को राहत देने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सरकार ने दोपहिया वाहन चालकों के लिए 100 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक की सब्सिडी देने की योजना लागू की थी। यह राहत हर महीने 20 लीटर ईंधन तक सीमित रखी गई है और तीन महीने के लिए लागू की गई थी। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन और माल ढुलाई करने वाले ट्रांसपोर्टर्स को भी राहत पैकेज देने की घोषणा की गई थी।
आर्थिक जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति अभी भी बेहद नाजुक बनी हुई है। देश विदेशी मुद्रा भंडार की कमी, बढ़ते कर्ज और IMF की शर्तों के दबाव में है। सरकार को राजकोषीय घाटा नियंत्रित करने के लिए लगातार टैक्स बढ़ाने और सब्सिडी घटाने जैसे कदम उठाने पड़ रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान सरकार और IMF के बीच इस बात पर सहमति बनी है कि किसी भी हालत में प्राइमरी बैलेंस लक्ष्य को पूरा किया जाएगा, भले ही इसके लिए पब्लिक सेक्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम (PSDP) में और कटौती क्यों न करनी पड़े। इसका मतलब है कि विकास परियोजनाओं पर खर्च कम किया जा सकता है ताकि वित्तीय लक्ष्य पूरे किए जा सकें।
विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं तो पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल के दाम नए रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच सकते हैं। इससे पहले ही महंगाई से परेशान आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर परिवहन और बिजली तक हर चीज महंगी हो सकती है।
वहीं दूसरी ओर भारत में फिलहाल पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं। केंद्र सरकार और तेल कंपनियां वैश्विक हालात के बावजूद आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ न पड़े, इसके लिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश कर रही हैं। यही वजह है कि पाकिस्तान की तुलना में भारत में ईंधन की कीमतें काफी कम बनी हुई हैं।



