नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के दायरे को घटाकर 100 किलोमीटर तक सीमित करने की अटकलों पर फिलहाल विराम लग गया है। सोमवार को आयोजित एनसीआर प्लानिंग बोर्ड (NCRPB) की 42वीं बैठक में एनसीआर के क्षेत्रफल में किसी भी प्रकार की कटौती के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी गई। इसके साथ ही बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया कि वर्तमान में एनसीआर में शामिल सभी जिले और क्षेत्र यथावत बने रहेंगे।
बैठक में दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकार के प्रतिनिधियों समेत कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का प्रमुख मुद्दा एनसीआर के दायरे की समीक्षा करना था। हरियाणा सरकार की ओर से पानीपत, चरखी दादरी, जींद समेत पांच जिलों को एनसीआर से बाहर करने का प्रस्ताव रखा गया था। यदि यह प्रस्ताव स्वीकार हो जाता तो एनसीआर का प्रभावी क्षेत्र काफी हद तक घटकर लगभग 100 किलोमीटर के दायरे तक सीमित हो सकता था।
हालांकि, विस्तृत चर्चा के बाद बोर्ड ने इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी। निर्णय लिया गया कि वर्तमान में एनसीआर के अंतर्गत आने वाले सभी क्षेत्र आगे भी एनसीआर का हिस्सा बने रहेंगे। इस फैसले से उन जिलों को राहत मिली है जो एनसीआर का दर्जा बनाए रखने के कारण विभिन्न विकास योजनाओं, निवेश और बुनियादी ढांचे से जुड़ी सुविधाओं का लाभ प्राप्त करते हैं।
बैठक के बाद हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बताया कि एनसीआर के भविष्य और क्षेत्रीय विकास की संभावनाओं पर व्यापक अध्ययन के लिए एक सब-कमेटी का गठन किया गया है। यह समिति विभिन्न राज्यों से सुझाव लेकर अपनी रिपोर्ट अगस्त 2026 तक प्रस्तुत करेगी। इसके बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। एनसीआर प्लानिंग बोर्ड की अगली बैठक दिसंबर 2026 में आयोजित की जाएगी।
बैठक में एक और महत्वपूर्ण विषय ‘नमो सिटी’ परियोजना रहा। मुख्यमंत्री सैनी ने जानकारी दी कि चार नई ‘नमो सिटी’ विकसित करने के लिए राज्यों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। इन शहरों को आधुनिक शहरी सुविधाओं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर परिवहन व्यवस्था और सतत विकास के मॉडल के रूप में विकसित करने की योजना है। माना जा रहा है कि ये शहर भविष्य में रोजगार, निवेश और आवासीय विकास के नए केंद्र बन सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि एनसीआर का दायरा बरकरार रखने का निर्णय क्षेत्रीय संतुलित विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे दिल्ली के आसपास स्थित शहरों और जिलों में औद्योगिक, आर्थिक और आवासीय विकास की गति प्रभावित नहीं होगी। वहीं ‘नमो सिटी’ जैसी नई परियोजनाएं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।
एनसीआर प्लानिंग बोर्ड के इस फैसले ने फिलहाल क्षेत्रीय सीमाओं को लेकर चल रही अनिश्चितताओं को समाप्त कर दिया है, जबकि आने वाले महीनों में ‘नमो सिटी’ और अन्य विकास योजनाओं को लेकर और बड़े फैसले सामने आने की संभावना है।
