वाराणसी: संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे को लेकर किए गए विरोध-प्रदर्शन ने अब राजनीतिक विवाद के साथ-साथ कानूनी मोड़ भी ले लिया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, पूर्णिया सांसद पप्पू यादव और अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के खिलाफ वाराणसी के कोतवाली थाने में मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई संत समाज की शिकायत के आधार पर की गई है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए प्रदर्शन के दौरान धार्मिक प्रतीकों और भगवा वेशभूषा का इस्तेमाल इस तरह किया गया जिससे करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
दरअसल, संसद परिसर में राम मंदिर के कथित चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर विपक्षी सांसदों ने विरोध-प्रदर्शन किया था। इस दौरान सांसद पप्पू यादव भगवा वस्त्र पहनकर साधु के वेश में दान पात्र लेकर बैठे दिखाई दिए। प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने प्रतीकात्मक रूप से दान पात्र में पैसे डाले, जिसके बाद पप्पू यादव वहां से भागते हुए नजर आए। इस पूरे घटनाक्रम को राम मंदिर के चढ़ावे में कथित अनियमितताओं का प्रतीकात्मक प्रदर्शन बताया गया।
हालांकि, इस प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया। भाजपा नेताओं, संत समाज और कई हिंदू संगठनों ने इसे धार्मिक आस्था का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना है कि किसी भी भ्रष्टाचार या अनियमितता के विरोध का अधिकार सभी को है, लेकिन इसके लिए धार्मिक वेशभूषा और प्रतीकों का इस प्रकार उपयोग करना उचित नहीं माना जा सकता।
इसी विवाद के बीच संत समाज के प्रतिनिधियों ने वाराणसी के कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के जरिए सनातन परंपराओं और भगवा वस्त्रों का अपमान किया गया, जिससे हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। पुलिस ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
दूसरी ओर, विपक्षी दलों का कहना है कि उनका प्रदर्शन किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं था, बल्कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी के कथित मामले में जवाबदेही तय करने की मांग को लेकर किया गया था। विपक्ष का दावा है कि प्रदर्शन पूरी तरह प्रतीकात्मक था और उसका उद्देश्य कथित अनियमितताओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना था।
फिलहाल यह मामला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बन गया है। एक ओर भाजपा और संत समाज इस प्रदर्शन को धार्मिक आस्था का अपमान बता रहे हैं, वहीं विपक्ष इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकतांत्रिक विरोध करार दे रहा है। अब सभी की निगाहें पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि जांच में शिकायत के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो मामले में आगे की कार्रवाई की जा सकती है। वहीं विपक्ष भी इस मुद्दे पर अपनी रणनीति और कानूनी जवाब तैयार करने में जुट गया है। आने वाले दिनों में यह विवाद और अधिक राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।
