देहरादून/पिथौरागढ़। उत्तराखंड के सीमांत जनपद पिथौरागढ़ से एक ऐतिहासिक और बहुप्रतीक्षित शुरुआत हुई है। वर्षों पुरानी पारंपरिक सीमा व्यापार व्यवस्था को नई गति देते हुए भारत-तिब्बत सीमा व्यापार का वर्ष 2026 के लिए विधिवत शुभारंभ हो गया है। शनिवार को भारतीय व्यापारियों का पहला दल लिपुलेख दर्रे को पार कर तिब्बत के तकलाकोट मंडी पहुंचा, जहां सभी आवश्यक औपचारिकताओं के बाद व्यापारिक गतिविधियों की शुरुआत की गई। इस कदम को न केवल भारत और तिब्बत के बीच पारंपरिक व्यापारिक संबंधों के पुनर्जीवन के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि यह उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था, रोजगार और स्थानीय व्यापार के लिए भी एक नई उम्मीद लेकर आया है।
पहले चरण में 16 पंजीकृत व्यापारियों और 4 हेल्परों सहित कुल 20 सदस्यीय दल को चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति मिली। यह दल भारत-तिब्बत व्यापार संघ के अध्यक्ष जीवन सिंह रौकली के नेतृत्व में तकलाकोट पहुंचा।
ऐतिहासिक लिपुलेख दर्रे से शुरू हुआ व्यापार
भारत-तिब्बत सीमा व्यापार का केंद्र धारचूला स्थित लिपुलेख दर्रा सदियों से भारत, तिब्बत और नेपाल के बीच व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संपर्क का महत्वपूर्ण मार्ग रहा है। इस रास्ते से स्थानीय व्यापारी वर्षों तक ऊन, नमक, जड़ी-बूटियां और अन्य पारंपरिक वस्तुओं का आदान-प्रदान करते रहे हैं।
वर्ष 2026 में इस व्यापार के पुनः शुरू होने से सीमांत क्षेत्र में एक बार फिर आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद जगी है। स्थानीय लोगों का मानना है कि इससे व्यापार के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
इमिग्रेशन प्रक्रिया पूरी कर रवाना हुआ पहला दल
उपजिलाधिकारी धारचूला आशीष जोशी के अनुसार, 31 जुलाई की शाम व्यापारियों ने गुंजी स्थित इमिग्रेशन कार्यालय में सभी आवश्यक आव्रजन औपचारिकताएं पूरी कीं। इसके बाद पूरा दल नाभीढांग में रात्रि विश्राम के लिए रुका।
अगले दिन सुबह लगभग 10:15 बजे लिपुलेख दर्रे पर चीन के अधिकारियों ने भी आवश्यक दस्तावेजों और पहचान संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा किया। इसके बाद भारतीय व्यापारियों को तिब्बत में प्रवेश की अनुमति दी गई और वे सफलतापूर्वक तकलाकोट मंडी पहुंच गए।
पहले चरण में केवल पुराने पंजीकृत व्यापारियों को मिली अनुमति
चीन प्रशासन की ओर से फिलहाल केवल उन व्यापारियों को अनुमति दी गई है, जो पहले से पंजीकृत हैं और पूर्व में भी सीमा व्यापार कर चुके हैं।
इसी कारण पहले दल के व्यापारी भारत से कोई नई व्यापारिक सामग्री लेकर नहीं गए। वे तकलाकोट में पहले से उपलब्ध अपने सामान और वहां की आवश्यक व्यापारिक औपचारिकताओं को पूरा करते हुए व्यापार शुरू करेंगे।
प्रशासन का कहना है कि जैसे-जैसे आगे अनुमति मिलेगी, अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी चरणबद्ध तरीके से भेजा जाएगा।
अगले व्यापारिक दलों की तैयारी शुरू
उपजिलाधिकारी आशीष जोशी ने बताया कि आगामी व्यापारिक दलों के प्रस्थान की तिथियों को लेकर चीनी प्रशासन के साथ लगातार ई-मेल के माध्यम से समन्वय किया जा रहा है।
जैसे ही अगले बैच के लिए स्वीकृति प्राप्त होगी, अन्य पंजीकृत व्यापारियों को भी तकलाकोट भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
इससे आने वाले दिनों में व्यापारिक गतिविधियों का दायरा और बढ़ने की संभावना है।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा बड़ा सहारा
भारत-तिब्बत सीमा व्यापार केवल दो देशों के बीच वस्तुओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्तराखंड के सीमांत क्षेत्रों की सामाजिक और आर्थिक जीवनरेखा भी माना जाता है।
धारचूला, गुंजी, नाभीढांग और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले कई परिवार वर्षों से इस व्यापार पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से निर्भर रहे हैं।
व्यापार शुरू होने से स्थानीय परिवहन, होटल, भोजन, पैकिंग, पशुपालन और अन्य सहायक व्यवसायों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे सीमांत क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पलायन की समस्या को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
पारंपरिक संबंधों को मिलेगा नया आयाम
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा व्यापार केवल आर्थिक गतिविधि नहीं बल्कि भारत और तिब्बत के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंधों का भी प्रतीक है।
लिपुलेख मार्ग के माध्यम से व्यापार शुरू होने से दोनों पक्षों के बीच विश्वास और सहयोग को भी मजबूती मिलेगी। यह पहल हिमालयी क्षेत्रों में पारंपरिक व्यापार व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
प्रशासन ने की व्यापक तैयारियां
सीमा व्यापार को सुरक्षित और व्यवस्थित ढंग से संचालित करने के लिए जिला प्रशासन, इमिग्रेशन विभाग, सुरक्षा एजेंसियों और सीमा से जुड़े सभी विभागों ने व्यापक तैयारियां की हैं।
व्यापारियों के दस्तावेजों की जांच, स्वास्थ्य परीक्षण, यात्रा प्रबंधन और सुरक्षा संबंधी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी गई, ताकि पूरा अभियान सुचारु रूप से संचालित हो सके।
सीमांत क्षेत्र के लोगों में उत्साह
व्यापार शुरू होने की खबर से सीमांत क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। स्थानीय व्यापारियों और निवासियों का कहना है कि यह केवल व्यापार की शुरुआत नहीं, बल्कि सीमांत क्षेत्र के विकास की नई उम्मीद है।
लोगों का मानना है कि यदि आने वाले समय में व्यापार का दायरा और बढ़ता है तो इससे उत्तराखंड के सीमावर्ती गांवों में आर्थिक गतिविधियां तेज होंगी और स्थानीय युवाओं को भी रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे।
