नई दिल्ली। देश में इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लेकर बहस लगातार तेज होती जा रही है। इसी बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने नई दिल्ली स्थित कांस्टीट्यूशन क्लब में E20 फ्यूल के मुद्दे पर एक बड़ा नेशनल टाउनहॉल आयोजित किया, जिसमें वाहन मालिकों, ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, मैकेनिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न राज्यों से आए लोगों ने हिस्सा लिया। पार्टी का दावा है कि इस कार्यक्रम से 6 लाख से अधिक लोग प्रत्यक्ष और ऑनलाइन माध्यम से जुड़े।
टाउनहॉल के दौरान आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E20 नीति पर कई सवाल उठाए और तीन प्रमुख मांगें सामने रखीं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार E20 ईंधन को बढ़ावा देना चाहती है, तो उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की स्वतंत्रता भी मिलनी चाहिए। साथ ही उन्होंने पेट्रोल की कीमतों और इथेनॉल नीति को लेकर भी केंद्र सरकार से जवाब मांगा।
क्या हैं केजरीवाल की तीन प्रमुख मांगें?
टाउनहॉल में विशेषज्ञों और वाहन मालिकों की राय सुनने के बाद अरविंद केजरीवाल ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं।
पहली मांग यह रही कि देश के प्रत्येक पेट्रोल पंप पर ग्राहकों को शुद्ध पेट्रोल और E20 पेट्रोल में से अपनी पसंद का विकल्प चुनने का अधिकार मिलना चाहिए। उनका कहना था कि जो उपभोक्ता E20 इस्तेमाल करना चाहते हैं, वे उसे खरीदें और जो शुद्ध पेट्रोल लेना चाहते हैं, उन्हें भी वह उपलब्ध कराया जाए।
दूसरी मांग में उन्होंने कहा कि यदि सरकार E20 को बढ़ावा देना चाहती है, तो इसकी कीमत सामान्य पेट्रोल से कम होनी चाहिए। उनका तर्क था कि यदि किसी उत्पाद को पर्यावरण के नाम पर बढ़ावा दिया जा रहा है, तो उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
तीसरी मांग में उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी आने के बाद देश में पेट्रोल की खुदरा कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम होनी चाहिए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
E20 नीति पर उठाए कई सवाल
टाउनहॉल को संबोधित करते हुए केजरीवाल ने कहा कि यदि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल वास्तव में हर दृष्टि से लाभकारी है, तो इसके समर्थन में स्पष्ट और व्यापक वैज्ञानिक प्रमाण सामने आने चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को E20 के कारण वाहन संबंधी समस्याओं, कम माइलेज और बढ़ते रखरखाव खर्च का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नीति को लेकर आम जनता में इतनी शंकाएं हैं, तो सरकार का दायित्व है कि वह पारदर्शिता के साथ सभी तथ्यों को सार्वजनिक करे।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकार नागरिकों पर E20 क्यों लागू कर रही है और इसके पीछे क्या नीति या आवश्यकता है।
विशेषज्ञों और वाहन मालिकों ने साझा किए अनुभव
कार्यक्रम में कई ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों, मैकेनिकों और वाहन मालिकों ने भी अपने अनुभव साझा किए। आम आदमी पार्टी के अनुसार, विभिन्न वक्ताओं ने E20 ईंधन से जुड़े तकनीकी पहलुओं, इंजन की कार्यक्षमता, माइलेज और रखरखाव लागत पर अपनी-अपनी राय रखी।
कार्यक्रम में बिहार के चर्चित यूट्यूबर मनीष कश्यप भी मौजूद रहे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए E20 को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।
इसके अलावा 12 वर्षों का अनुभव रखने वाले एक मोटर मैकेनिक ने भी विभिन्न प्रकार के वाहनों में आने वाली तकनीकी समस्याओं के बारे में अपनी बात रखी।
हालांकि इन दावों और अनुभवों पर सरकार की ओर से अलग दृष्टिकोण भी सामने आता रहा है।
सरकार के दावों पर भी उठाए सवाल
अरविंद केजरीवाल ने कहा कि सरकार के विभिन्न विभागों की ओर से E20 को लेकर अलग-अलग दावे किए जाते रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कभी इसे पूरी तरह सुरक्षित बताया जाता है, तो कभी इसके प्रभाव को सीमित बताया जाता है।
उनका कहना था कि यदि सरकार के पास पर्याप्त वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध हैं, तो उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि लोगों की शंकाएं दूर हो सकें।
उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी नई ईंधन नीति को व्यापक स्तर पर लागू करने से पहले विस्तृत अध्ययन, सार्वजनिक चर्चा और सभी हितधारकों से परामर्श आवश्यक होना चाहिए।
E25 और E30 को लेकर भी जताई आशंका
टाउनहॉल के दौरान केजरीवाल ने यह भी कहा कि भविष्य में E25, E30 और उससे अधिक इथेनॉल मिश्रित ईंधन लाने की संभावना पर भी सरकार को स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए।
उन्होंने आशंका जताई कि यदि इस विषय पर व्यापक चर्चा नहीं हुई तो भविष्य में अधिक इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन भी लागू किए जा सकते हैं। उन्होंने सरकार से इस संबंध में स्पष्ट नीति सार्वजनिक करने की मांग की।
सरकार का पक्ष भी जानना जरूरी
E20 नीति को लेकर केंद्र सरकार का रुख इससे अलग रहा है। सरकार का कहना है कि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का उद्देश्य जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता कम करना, कच्चे तेल के आयात पर होने वाले खर्च को घटाना, पर्यावरणीय उत्सर्जन कम करना और कृषि क्षेत्र, विशेषकर गन्ना एवं अन्य फीडस्टॉक से जुड़े किसानों के लिए अतिरिक्त बाजार उपलब्ध कराना है।
सरकार यह भी कहती रही है कि वाहन निर्माताओं के साथ समन्वय कर E20 के अनुकूल वाहनों को बढ़ावा दिया जा रहा है और इस दिशा में चरणबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है।
देशभर में तेज हुई बहस
E20 फ्यूल को लेकर अब बहस केवल तकनीकी विषय नहीं रह गई है, बल्कि यह राजनीतिक और आर्थिक चर्चा का भी प्रमुख मुद्दा बन चुका है।
एक ओर सरकार इसे ऊर्जा सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हित से जोड़कर देख रही है, वहीं विपक्ष उपभोक्ताओं की पसंद, वाहन मालिकों की चिंताओं और कीमतों के मुद्दे को प्रमुखता से उठा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नई ईंधन नीति की सफलता के लिए सरकार, वाहन निर्माता कंपनियों, वैज्ञानिक संस्थानों और उपभोक्ताओं के बीच पारदर्शी संवाद बेहद आवश्यक है।
आम जनता की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
वाहन मालिकों की प्रमुख चिंताएं माइलेज, इंजन की कार्यक्षमता, रखरखाव खर्च और ईंधन की कीमत से जुड़ी हैं। वहीं सरकार का जोर ऊर्जा आत्मनिर्भरता, प्रदूषण में कमी और इथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने पर है।
ऐसे में भविष्य की नीति बनाते समय इन सभी पक्षों के बीच संतुलन बनाना सबसे बड़ी चुनौती होगी।
