हरिद्वार के वीआईपी घाट पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) द्वारा आयोजित चार दिवसीय किसान महाकुंभ की शुरुआत मंगलवार से जोरदार माहौल में हुई। इस आयोजन में देश के अलग-अलग राज्यों से हजारों किसान पहुंचे, जिससे पूरा क्षेत्र किसान आंदोलन के नारों और चर्चाओं से गूंज उठा। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण रहे किसान नेता Rakesh Tikait, जिन्होंने सरकार की नीतियों, खासकर भूमि अधिग्रहण और कृषि मूल्य निर्धारण को लेकर तीखे सवाल उठाए।
भूमि अधिग्रहण बना सबसे बड़ा मुद्दा
राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश में किसानों के सामने सबसे बड़ा मुद्दा भूमि अधिग्रहण का है। उनके अनुसार, कई स्थानों पर किसानों की जमीनों को बहुत कम कीमत पर या दबाव बनाकर अधिग्रहित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास परियोजनाओं के नाम पर किसानों की आजीविका छीनी जा रही है, जो किसी भी स्थिति में उचित नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि भूमि अधिग्रहण की मौजूदा प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है, और कई मामलों में किसानों को उचित मुआवजा तक नहीं मिल पाता। टिकैत ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह स्थिति जारी रही तो देशभर में किसानों का असंतोष और बढ़ेगा।
देशभर से जुटे किसान, उठी कई मांगें
इस किसान महाकुंभ में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से हजारों किसान शामिल हुए। मंच पर लगातार विभिन्न किसान संगठनों के प्रतिनिधि अपनी समस्याएं और सुझाव रखते रहे। प्रमुख मुद्दों में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि ऋण, बिजली बिल, स्मार्ट मीटर और भूमि अधिग्रहण शामिल रहे।
किसानों ने कहा कि MSP की कानूनी गारंटी आज भी सबसे बड़ी मांग बनी हुई है। कई किसानों का कहना था कि फसल की लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन उसके अनुसार उन्हें उचित दाम नहीं मिल रहे हैं। इससे खेती घाटे का सौदा बनती जा रही है।
जंगल कटाई और पर्यावरणीय चिंता
कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ में जंगलों की कटाई और आदिवासी किसानों के विस्थापन का मुद्दा भी उठाया गया। टिकैत ने कहा कि विकास के नाम पर पर्यावरण और किसानों दोनों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में गंभीर सामाजिक संकट पैदा हो सकता है।
इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे पहाड़ी राज्यों में सेब उत्पादक किसान भी नीतिगत फैसलों से प्रभावित हो सकते हैं, जिससे उनकी आजीविका पर खतरा मंडरा रहा है।
सरकार की नीतियों पर तीखी टिप्पणी
Rakesh Tikait ने केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसानों के मुद्दों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ योजनाएं बड़े उद्योगों को फायदा पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हैं, जबकि छोटे और मध्यम किसान पीछे छूटते जा रहे हैं।
उन्होंने स्मार्ट मीटर प्रणाली को लेकर भी नाराजगी जताई और कहा कि इससे आम ग्रामीण उपभोक्ताओं और किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। टिकैत ने कहा कि किसान सिर्फ विरोध नहीं कर रहे, बल्कि अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ रहे हैं।
वीआईपी घाट पर बड़ा किसान जमावड़ा
हरिद्वार के वीआईपी घाट पर इस आयोजन के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की गई है। मुख्य पंडाल के साथ-साथ कई छोटे-बड़े टेंट लगाए गए हैं, जहां किसानों के ठहरने की व्यवस्था की गई है। जगह-जगह लंगर सेवा चल रही है और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।
स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए गए हैं, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में किसानों के आने की संभावना पहले से ही जताई गई थी।
ऐतिहासिक संदर्भ और आंदोलन की विरासत
किसान नेताओं का कहना है कि यह आयोजन केवल एक सभा नहीं, बल्कि एक परंपरा का हिस्सा है। पहले भी हरिद्वार में भाकियू के संस्थापक Mahendra Singh Tikait द्वारा बड़े किसान सम्मेलनों का आयोजन किया जाता रहा है, जिसमें लाखों किसान शामिल होते थे।
हालांकि समय के साथ किसान संगठनों में विभाजन हुआ और आंदोलन कई हिस्सों में बंट गया, लेकिन आज भी ऐसे महाकुंभ किसानों की एकजुटता का प्रतीक माने जाते हैं।
