रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में छात्रों का आंदोलन अब निर्णायक चरण में पहुंच गया है। बीते कई दिनों से हजारों अभ्यर्थी और छात्र संगठन परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता तथा न्याय की मांग को लेकर सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। आंदोलन का केंद्र बने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में कई छात्र पिछले तीन दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे हैं। इस बीच आंदोलन को नया मोड़ तब मिला, जब सरकार से बातचीत के लिए छात्रों ने 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन कर दिया। इस प्रतिनिधिमंडल में छात्र नेताओं के साथ वकील और तकनीकी विशेषज्ञों को भी शामिल किया गया है, ताकि सरकार के सामने छात्रों का पक्ष मजबूती और तथ्यों के साथ रखा जा सके।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यह केवल परीक्षा का मामला नहीं, बल्कि लाखों युवाओं के भविष्य और सरकारी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता का सवाल है। उनका स्पष्ट कहना है कि जब तक सरकार उनकी प्रमुख मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन और भूख हड़ताल जारी रहेगी।
भूख हड़ताल से सरकार पर बढ़ा दबाव
रांची में जारी इस आंदोलन में कई छात्र लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं। आंदोलन में शामिल छात्रा हबीबा ने कहा कि सरकार की ओर से बातचीत का निमंत्रण जरूर मिला है, लेकिन फिलहाल इसे केवल एक आश्वासन के रूप में देखा जा रहा है। उनके अनुसार छात्र अब केवल मौखिक भरोसे से संतुष्ट नहीं होंगे, बल्कि उन्हें स्पष्ट और लिखित निर्णय चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रतिनिधिमंडल सरकार से बातचीत करेगा और उसके बाद जो भी परिणाम सामने आएगा, उसी के आधार पर आंदोलन की अगली रणनीति तय की जाएगी। यदि सरकार ने छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल करेगा सरकार से बातचीत
छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए जिस प्रतिनिधिमंडल का गठन किया है, उसमें कुल 11 सदस्य शामिल किए गए हैं। विशेष बात यह है कि इस टीम में केवल छात्र नेता ही नहीं, बल्कि एक अनुभवी वकील और दो तकनीकी विशेषज्ञ भी शामिल हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बातचीत के दौरान परीक्षा प्रक्रिया, तकनीकी खामियों और कानूनी पहलुओं पर मजबूती से पक्ष रखा जा सके।
प्रतिनिधिमंडल की सूची प्रशासन को सौंप दी गई है और अब सरकार बैठक का समय एवं स्थान तय कर प्रतिनिधियों को सूचना देगी। छात्रों को उम्मीद है कि इस वार्ता से आंदोलन का कोई सकारात्मक समाधान निकल सकता है।
क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
JPSC परीक्षा को लेकर आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों की कई प्रमुख मांगें हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण मांग प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर निष्पक्ष तरीके से दोबारा आयोजित करने की है। इसके अलावा छात्र पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने, कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी तय करने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग कर रहे हैं।
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि यदि भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं होगी तो लाखों मेहनती अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा। इसलिए सरकार को इस मामले में गंभीरता दिखाते हुए निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए।
‘अब सिर्फ आश्वासन नहीं, लिखित फैसला चाहिए’
आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि अतीत में कई बार केवल आश्वासन दिए गए, लेकिन समस्याओं का समाधान नहीं हुआ। यही कारण है कि इस बार छात्र किसी मौखिक भरोसे पर आंदोलन समाप्त करने के पक्ष में नहीं हैं।
छात्रा हबीबा ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार उनकी सभी प्रमुख मांगों को स्वीकार नहीं करती, तो भूख हड़ताल और प्रदर्शन दोनों जारी रहेंगे। उनका कहना है कि अब छात्र अपने भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे।
प्रदेशभर के छात्रों का मिल रहा समर्थन
JPSC आंदोलन को अब केवल रांची तक सीमित नहीं माना जा रहा। राज्य के विभिन्न जिलों से भी अभ्यर्थी आंदोलन के समर्थन में राजधानी पहुंच रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी बड़ी संख्या में छात्र इस आंदोलन के समर्थन में अभियान चला रहे हैं। कई छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों ने भी आंदोलनकारियों की मांगों को जायज बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर भी यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता बनाए रखना युवाओं का विश्वास कायम रखने के लिए बेहद आवश्यक है।
सरकार और छात्रों की वार्ता पर टिकी निगाहें
अब पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी सरकार और छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच होने वाली बातचीत है। यदि वार्ता सकारात्मक रहती है और छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस सहमति बनती है, तो आंदोलन समाप्त होने की संभावना बन सकती है। लेकिन यदि बातचीत बेनतीजा रहती है, तो आंदोलन और अधिक उग्र रूप ले सकता है।
फिलहाल हजारों अभ्यर्थियों की निगाहें इस बैठक पर टिकी हुई हैं। सभी को उम्मीद है कि बातचीत के जरिए ऐसा समाधान निकलेगा, जिससे छात्रों का भविष्य सुरक्षित हो और भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता पर उठ रहे सवालों का संतोषजनक जवाब मिल सके।
कुल मिलाकर, JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले चुका है। सरकार से बातचीत के लिए गठित 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल से छात्रों को काफी उम्मीदें हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वार्ता के बाद सरकार क्या फैसला लेती है और क्या छात्रों की मांगों का ऐसा समाधान निकल पाता है, जिससे आंदोलन शांत हो सके और लाखों युवाओं का भरोसा फिर से बहाल हो।
