By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: इंदौर वाटर ट्रेजेडी: ‘स्वच्छता के सिरमौर’ पर सिस्टम की कालिख!, हादसे के पीछे फाइलों में दबी थी ‘हत्या की पटकथा’
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > इंदौर वाटर ट्रेजेडी: ‘स्वच्छता के सिरमौर’ पर सिस्टम की कालिख!, हादसे के पीछे फाइलों में दबी थी ‘हत्या की पटकथा’
देशफीचर्ड

इंदौर वाटर ट्रेजेडी: ‘स्वच्छता के सिरमौर’ पर सिस्टम की कालिख!, हादसे के पीछे फाइलों में दबी थी ‘हत्या की पटकथा’

The Hill India News
Last updated: January 2, 2026 2:30 am
The Hill India News
Published: January 2, 2026
Share
SHARE

इंदौर | देश का सबसे स्वच्छ शहर, मिनी मुंबई, और स्वच्छता में सात बार का नेशनल चैंपियन—इंदौर आज एक ऐसी त्रासदी के मलबे के नीचे दबा है, जिसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी (Contaminated Water) पीने से अब तक 11 मासूम लोगों की जान जा चुकी है और 1400 से अधिक लोग अस्पतालों में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं।

Contents
ग्राउंड रिपोर्ट: कहाँ से मिला पानी में ‘जहर’?फाइलों में कैद मौत का खेल: अगस्त में पता था, फिर क्यों नहीं किया काम?AMRUT 2.0 का बजट और सिस्टम की नाकामी‘साहब, हमने तो पहले ही बताया था…’ – जनता का दर्दमुख्यमंत्री का कड़ा रुख: क्या गिरेगी गाज?स्वच्छता के तमगे से आगे की चुनौतीजरूरी सुझाव और बचाव (एडवाइजरी):

शुरुआत में इसे प्रशासन द्वारा एक ‘दुर्भाग्यपूर्ण संयोग’ करार देने की कोशिश की गई, लेकिन जैसे-जैसे जांच की परतें खुल रही हैं, यह साफ हो गया है कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही, ठेके की राजनीति और सरकारी फाइलों की सुस्ती से हुई ‘सामूहिक हत्या’ है।


ग्राउंड रिपोर्ट: कहाँ से मिला पानी में ‘जहर’?

जांच एजेंसियों और तकनीकी विशेषज्ञों की टीम ने जो खुलासा किया है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाला है। भागीरथपुरा पुलिस चौकी के ठीक पास बने एक सार्वजनिक शौचालय के नीचे से पेयजल की मुख्य पाइपलाइन गुजर रही थी।

इन्वेस्टिगेशन की मुख्य बातें:

  • लीकेज और संक्रमण: मुख्य पाइपलाइन में भीषण लीकेज था। सीवेज लाइन और पेयजल लाइन के समानांतर होने के कारण, शौचालय का गंदा पानी रिसकर पीने के पानी में मिल गया।

  • लैब रिपोर्ट का खुलासा: एमजीएम (MGM) मेडिकल कॉलेज की लैब रिपोर्ट ने पुष्टि कर दी है कि पानी में घातक बैक्टीरिया और सीवेज के अंश थे। सीएमएचओ डॉ. माधव हसानी ने स्पष्ट किया है कि मौतें दूषित जल के कारण फैले संक्रमण (Waterborne Disease) से ही हुई हैं।


फाइलों में कैद मौत का खेल: अगस्त में पता था, फिर क्यों नहीं किया काम?

सबसे चौंकाने वाला खुलासा ‘भागीरथपुरा पाइपलाइन टेंडर’ को लेकर हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, विभाग को इलाके में बदबूदार पानी की समस्या का ज्ञान अगस्त 2025 से ही था।

  1. ₹2.40 करोड़ का बजट: पुरानी और जर्जर पाइपलाइन को बदलने के लिए अगस्त में ही ढाई करोड़ का टेंडर जारी किया गया था।

  2. शिकायतों का अंबार: इस टेंडर फाइल में स्पष्ट रूप से उल्लेख था कि इलाके के लोगों को गंदा और सीवेज मिश्रित पानी मिल रहा है।

  3. अपराधिक चुप्पी: टेंडर जारी होने के बावजूद न तो टेंडर प्रक्रिया पूरी की गई, न ही आपातकालीन मरम्मत (Emergency Repair) के लिए कोई टीम भेजी गई।

जब 11 चिताएं जल गईं, तब जाकर प्रशासन की नींद टूटी और आनन-फानन में फाइलों से टेंडर बाहर निकाला गया।


AMRUT 2.0 का बजट और सिस्टम की नाकामी

इंदौर को AMRUT 2.0 योजना के तहत लगभग ₹1700 करोड़ का फंड मिला है। लेकिन इस भारी-भरकम बजट के बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और ही है। विभाग के भीतर चल रही खींचतान ने आम आदमी की जान को दांव पर लगा दिया है।

परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति:

  • पैकेज-1 (₹579 करोड़): इंटेक वेल और WTP का काम SPML कंपनी को दिया गया, लेकिन निगरानी के अभाव में काम की गति कछुआ चाल रही।

  • पैकेज-2 (₹424 करोड़): ग्रेविटी मेन और ट्रंक लाइन के काम अब भी टेंडर की प्रक्रियाओं में उलझे हैं।

  • पैकेज-3 और 4 (₹800 करोड़): वितरण नेटवर्क (Distribution Network) का काम कागजों पर चल रहा है।

जल संसाधन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर बताया, “यह तकनीकी नाकामी नहीं, शुद्ध लापरवाही है। पुराने इलाकों में सीवेज और वाटर लाइनें सालों पुरानी हैं। नई पाइपलाइन बिछाने में देरी और कमजोर सुपरविजन का नतीजा आज इंदौर भुगत रहा है।”


‘साहब, हमने तो पहले ही बताया था…’ – जनता का दर्द

भागीरथपुरा की गलियों में आज मातम के साथ-साथ आक्रोश है। स्थानीय निवासी प्रीति शर्मा का कहना है, “हमने दर्जनों बार पार्षद और नगर निगम के अधिकारियों को बदबूदार पानी दिखाया। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन समाधान नहीं।”

वहीं, ओमप्रकाश नामक निवासी ने गंदे पानी का सैंपल दिखाते हुए कहा, “अधिकारी और ठेका कंपनियां अपने कमीशन और कागजों के लिए लड़ती रहीं और हमारे नलों में पानी की जगह सीवेज बहता रहा। मेरे परिवार के तीन सदस्य आज अस्पताल में भर्ती हैं।”


मुख्यमंत्री का कड़ा रुख: क्या गिरेगी गाज?

मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सख्त लहजे में कहा है कि ऐसी घोर लापरवाही को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषी अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमे दर्ज करने के संकेत दिए हैं।

इंदौर के प्रशासनिक गलियारों में अब हड़कंप मचा है। कलेक्टर और नगर निगम आयुक्त की टीमें अब रात-दिन भागीरथपुरा में डेरा डाले हुए हैं, लेकिन सवाल वही है कि क्या ये सतर्कता 11 लोगों की जान जाने से पहले नहीं दिखाई जा सकती थी?


स्वच्छता के तमगे से आगे की चुनौती

इंदौर ने स्वच्छता के क्षेत्र में पूरी दुनिया में नाम कमाया है, लेकिन ‘भागीरथपुरा कांड’ ने यह साबित कर दिया है कि केवल सड़कों की सफाई और कचरा प्रबंधन ही पर्याप्त नहीं है। भूमिगत पाइपलाइनों का जाल और पेयजल की सुरक्षा किसी भी शहर की बुनियादी जरूरत है। अगर 1700 करोड़ का बजट होने के बाद भी जनता को सीवेज वाला पानी पीना पड़ रहा है, तो यह ‘स्मार्ट सिटी’ के संकल्प पर सबसे बड़ा सवालिया निशान है।


जरूरी सुझाव और बचाव (एडवाइजरी):

  • पानी को उबालकर या क्लोरीन की गोली डालकर ही पिएं।

  • नलों में गंदा पानी दिखने पर तुरंत टोल-फ्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करें।

  • पुराने इलाकों में पुराने कनेक्शनों की जांच के लिए निगम की टीम से संपर्क करें।

You Might Also Like

जाजपुर: दहीबड़ा खाने से 58 लोगों की बिगड़ी तबीयत, बच्चों समेत कई अस्पताल में भर्ती; जांच के लिए 3 टीमें गठित
उत्तराखंड में मौसम का बदला मिजाज, तीन दिनों तक बरसेगा पानी – ऑरेंज अलर्ट जारी
बॉलीवुड अभिनेत्री शिल्पा के घर पहुंची मुंबई पुलिस: 60 करोड़ की धोखाधड़ी केस में 4.30 घंटे तक चली पूछताछ, जानें क्या है पूरा मामला?
नई दिल्ली :सहकारी समितियों के समावेशी विकास मॉडल के माध्यम से “सहकार-से-समृद्धि” के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी
राजधानी में गड़बड़ी फैलाने का इनपुट, दिल्ली में 6 दिनों तक धारा 163 लागू, इन चीजों पर लगी पाबंदी
TAGGED:AMRUT 2.0 IndoreBhagirathpura Water ContaminationContaminated Water Deaths IndoreIndore Water Crisis
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

CM थलापति विजय की पार्टी TVK का केंद्र पर बड़ा हमला, NEET परीक्षा रद्द व मेडिकल शिक्षा को राज्य सूची में शामिल करने की माँग

The Hill India News
The Hill India News
July 22, 2026
जंतर-मंतर पर 32वें दिन भी डटे छात्र: JP नड्डा ने अस्पताल में वांगचुक से की मुलाकात, सड़क से संसद तक क्यों गरमाई नीट पेपर लीक पर सियासत?
दिल्ली में हाई-वोल्टेज ड्रामा: राहुल, प्रियंका और अखिलेश यादव पुलिस हिरासत में, पीएम आवास के बाहर धरना स्थल छावनी में तब्दील
हरिद्वार आम महोत्सव में मुख्यमंत्री धामी का बड़ा ऐलान: किसान उत्तराखंड की असली ताकत, एप्पल मिशन पर 80% सब्सिडी और ‘हिमालय ब्रांड’ से ग्लोबल पहचान
उत्तराखंड हाईकोर्ट की पुलिस को सख्त फटकार: प्रभात ध्यानी की ट्रेन से गिरफ्तारी पर पूछा- क्या नागरिकों की स्वतंत्रता छीन ली गई है?
राहुल गांधी का 7 लोक कल्याण मार्ग पर धरना: शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पेपर लीक पर संसद से सड़क तक संग्राम
बारिश का महाअलर्ट: दिल्ली से हिमाचल और यूपी-बिहार तक मौसम का कहर, 20 राज्यों में भारी वर्षा की चेतावनी; प्रशासन अलर्ट पर
छात्रों के समर्थन में सड़क पर उतरी कांग्रेस: राहुल, प्रियंका और खड़गे का पीएम आवास तक मार्च, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज
‘मेरी पीठ में खंजर घोंपा, सारे चोर भाजपा में चले गए’— ममता बनर्जी का बड़ा हमला, विपक्षी एकता की भी दोहराई अपील
मध्यप्रदेश में UCC को मिली विधानसभा की मंजूरी: हंगामे, ‘जय श्रीराम’ के नारों और तीखी बहस के बीच पास हुआ ऐतिहासिक विधेयक
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?