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Reading: हरिद्वार: बीमा योजनाओं के नाम पर युवक से 28.81 लाख की ठगी, कोर्ट के आदेश पर चार लोगों के खिलाफ FIR
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उत्तराखंडफीचर्ड

हरिद्वार: बीमा योजनाओं के नाम पर युवक से 28.81 लाख की ठगी, कोर्ट के आदेश पर चार लोगों के खिलाफ FIR

The Hill India News
Last updated: November 25, 2025 2:17 am
The Hill India News
Published: November 25, 2025
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हरिद्वार/लक्सर: उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िले के लक्सर क्षेत्र में बीमा योजनाओं के नाम पर एक युवक से करोड़ों रुपये रिटर्न का लालच देकर करीब 28 लाख 81 हजार रुपये हड़पने का संगीन मामला सामने आया है। स्थानीय पुलिस द्वारा शिकायत पर कोई कार्रवाई न होने पर पीड़ित ने न्यायालय की शरण ली, जिसके बाद कोर्ट ने हस्तक्षेप करते हुए चार आरोपियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने के आदेश जारी किए। पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है।

Contents
पहचान से ठगी की शुरुआतशाखा में मिले ‘प्रबंध निदेशक’ और चमक-दमक का झांसा6 साल तक जमा कराए 28.81 लाख रुपयेदेहरादून जाकर भी मिला धोखा, उल्टा धमकाया गयास्थानीय थाने और एसएसपी दफ्तर से लौटी खाली शिकायतकोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIRक्या यह संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला?पीड़ित अब न्याय की उम्मीद में

मामला बीमा योजना से जुड़ी ठगी से संबंधित है, जिसमें पीड़ित युवक ने छह वर्षों तक कंपनी बताए गए संगठन में अपने परिचितों को जोड़कर लाखों रुपये जमा कराए। लेकिन कोविड काल में कंपनी अचानक गायब हो गई और जिम्मेदार लोग फरार हो गए। बाद में जब पीड़ित ने धनवापसी की मांग की तो उससे न सिर्फ बदसलूकी की गई, बल्कि जान से मारने की धमकियां भी दी गईं।


पहचान से ठगी की शुरुआत

प्राप्त जानकारी के अनुसार, लक्सर कोतवाली क्षेत्र के सेठपुर गांव निवासी मदनपाल ने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दाखिल करते हुए पूरी घटना का ब्यौरा प्रस्तुत किया। मदनपाल ने बताया कि वर्ष 2014 में उसकी पहचान नौशाद अंसारी नाम के व्यक्ति से हुई। इसी पहचान के माध्यम से उसे एक संस्था यूनाइटेड एग्रो लाइफ इंडिया लिमिटेड के बारे में बताया गया, जो कथित रूप से बीमा और निवेश योजनाओं का संचालन करती थी।

नौशाद अंसारी ने यह दावा भी किया कि कंपनी की शाखा लक्सर बस स्टैंड के पास चल रही है और यहां निवेश करने पर अच्छे कमीशन के साथ कई गुना रिटर्न मिलता है। बेहतर रोज़गार और कमाई की उम्मीद में मदनपाल शाखा कार्यालय पहुंच गया।


शाखा में मिले ‘प्रबंध निदेशक’ और चमक-दमक का झांसा

शाखा कार्यालय में मदनपाल की मुलाकात अहसान हैदर, शहनवाज, मौहसीन खान और जावेद (पुत्र युसुफ) से कराई गई। आरोप है कि अहसान हैदर ने खुद को कंपनी का प्रबंध निदेशक (Managing Director) बताया और बड़े-बड़े निवेशकर्ताओं का हवाला देते हुए कंपनी की विश्वसनीयता का दावा किया।

यही नहीं, मदनपाल को सेल्समैन/फील्ड एजेंट के रूप में नौकरी का प्रस्ताव दिया गया। पीड़ित के अनुसार, उसे एक फील्ड एजेंट के तौर पर रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और पहचान पत्र भी सौंपा गया, जिससे उसे कंपनी के वास्तविक होने का विश्वास हो गया।

कंपनी ने उसे भरोसा दिलाया कि यदि वह लोगों को बीमा योजनाओं से जोड़ेगा तो भारी भरकम कमीशन मिलेगा और निवेशकों को उनकी जमा राशि पर समय–समय पर बोनस और परिपक्वता पर लाखों रुपये की राशि दी जाएगी।


6 साल तक जमा कराए 28.81 लाख रुपये

नए अवसर और कमाई की उम्मीद में मदनपाल ने अपने परिचित, रिश्तेदार और गांव के लोगों के साथ कई बीमा नीतियां जमा करानी शुरू कीं। इसी प्रक्रिया में उसने कुल 28,81,060 रुपये कंपनी के खातों में जमा कराए।

उसका दावा है कि कंपनी योजनाओं के नाम पर 10 गुना तक रिटर्न देने का दावा कर रही थी और कई बैठकों में निवेशकों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रेजेंटेशन भी दिखाए जाते थे।

लेकिन वर्ष 2020 में कोविड महामारी के दौरान अचानक कंपनी का कार्यालय बंद हो गया। न कोई कर्मचारी मिला, न कोई अधिकारी। इसके बाद सभी के फोन भी स्विच ऑफ रहने लगे।


देहरादून जाकर भी मिला धोखा, उल्टा धमकाया गया

घटना के बाद मदनपाल देहरादून स्थित उस पते पर पहुंचा, जिसे कंपनी का हेड ऑफिस बताया गया था। लेकिन वहां पहुंचकर उसे और भी बड़ा झटका लगा। आरोपियों ने न सिर्फ धनवापसी से इनकार कर दिया, बल्कि उससे बदसलूकी करते हुए धमकी दी कि अगर उसने ज्यादा दबाव बनाया तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

पीड़ित ने कहा कि वह लगातार कई महीनों तक नंबरों पर संपर्क करता रहा, लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। इस दौरान जिन लोगों के पैसे उसने कंपनी में जमा कराए थे, वे उससे जवाब मांगने लगे। धीरे-धीरे स्थिति इतनी खराब हो गई कि उसे अपनी प्रतिष्ठा और सुरक्षा, दोनों की चिंता होने लगी।


स्थानीय थाने और एसएसपी दफ्तर से लौटी खाली शिकायत

पीड़ित ने पहले लक्सर कोतवाली और बाद में हरिद्वार एसएसपी कार्यालय में भी शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। मदनपाल के अनुसार, उसे आश्वासन जरूर दिया जाता रहा, लेकिन प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई।

थक-हारकर उसने न्यायालय में प्रार्थनापत्र दाखिल किया और पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच एवं आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।


कोर्ट के आदेश पर दर्ज हुई FIR

मामले का संज्ञान लेते हुए न्यायालय ने पुलिस को तुरंत एफआईआर दर्ज करने के आदेश जारी किए। इसके बाद लक्सर कोतवाली प्रभारी राजीव रौथाण ने बताया कि कोर्ट के निर्देश पर चारों आरोपियों —
अहसान हैदर, शहनवाज, मौहसीन खान और जावेद (पुत्र युसुफ) — के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

उन्होंने बताया कि मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है और बैंक लेनदेन, दस्तावेजों, कंपनी गतिविधियों तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों की जांच की जा रही है। साथ ही, आरोपियों की पृष्ठभूमि और अन्य निवेशकों से जुड़ी संभावित शिकायतों की भी जांच की जाएगी।


क्या यह संगठित वित्तीय धोखाधड़ी का मामला?

प्राथमिक तौर पर पुलिस इसे बीमा योजनाओं की आड़ में चल रहा संगठित वित्तीय घोटाला मानकर चल रही है। ऐसे मामलों में देखा जाता है कि कई कंपनियां फर्जी नाम, फर्जी पते और फर्जी पद डिज़ाइन कर लोगों को भरोसा दिलाती हैं और लाखों–करोड़ों रुपये जुटाकर गायब हो जाती हैं।

2014 से 2020 तक कंपनी का सक्रिय रहना, शाखा संचालन दिखाना, एजेंट बनाना और बड़े रिटर्न का लालच देना—ये सभी तरीके पोंज़ी और मल्टी-लेवल मार्केटिंग घोटालों से मेल खाते हैं।


पीड़ित अब न्याय की उम्मीद में

दर्जनों परिचितों के सामने अपनी विश्वसनीयता दांव पर लगाने वाले मदनपाल अब पुलिस कार्यवाही और न्यायालय के फैसले के सहारे अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद कर रहे हैं। उनका कहना है कि आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से भरोसा तोड़ा और उनकी आर्थिक स्थिति को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है।

पुलिस जांच में आरोपियों की गिरफ्तारी और धनवापसी की संभावनाओं पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

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