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हल्द्वानी टांडा जंगल हत्याकांड: वन विभाग के संविदाकर्मी की कुल्हाड़ी से काटकर निर्मम हत्या, इलाके में सनसनी

हल्द्वानी: उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी से एक बेहद चौंकाने वाली और दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यहाँ के सुरक्षित माने जाने वाले टांडा जंगल क्षेत्र में देर रात एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इस सनसनीखेज घटना के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा हुआ है। हमलावर ने इतनी क्रूरता दिखाई कि वन विभाग में संविदाकर्मी के रूप में कार्यरत 50 वर्षीय व्यक्ति की गर्दन पर कुल्हाड़ी (धारदार हथियार) से ताबड़तोड़ वार कर उसे मौत के घाट उतार दिया।

सूचना मिलते ही पुलिस के आला अधिकारी और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम मौके पर पहुंच गई है। शुरुआती जांच और घटनास्थल के हालातों को देखते हुए पुलिस को मृतक के ही एक करीबी साथी पर हत्या का गहरा शक है, जो घटना के बाद से ही फरार बताया जा रहा है।

खून से लथपथ मिला शव, फॉरेंसिक टीम ने जुटाए साक्ष्य

यह पूरा मामला हल्द्वानी कोतवाली के अंतर्गत आने वाले टीपी नगर चौकी क्षेत्र का है। पुलिस को देर रात सूचना मिली थी कि टांडा जंगल के भीतर एक व्यक्ति का खून से लथपथ शव पड़ा हुआ है। रात के अंधेरे में मिली इस सूचना के बाद पुलिस महकमे में खलबली मच गई। टीपी नगर चौकी पुलिस और कोतवाली की टीम तुरंत भारी पुलिस बल के साथ जंगल के भीतर दाखिल हुई।

घटनास्थल का मंजर: जब पुलिस मौके पर पहुंची, तो वहां का नजारा बेहद खौफनाक था। चारों तरफ खून बिखरा हुआ था और मृतक का शव जमीन पर पड़ा था। पुलिस ने तुरंत क्राइम सीन को सील कर दिया और फॉरेंसिक टीम को मौके पर बुलाया। साइंटिफिक एविडेंस (वैज्ञानिक साक्ष्य) जुटाने के लिए फॉरेंसिक टीम ने उंगलियों के निशान (फिंगरप्रिंट्स) और आसपास बिखरे खून के नमूने एकत्र किए हैं।

मूल रूप से यूपी का रहने वाला था मृतक मेवा लाल

पुलिस द्वारा की गई शुरुआती शिनाख्त में मृतक की पहचान 50 वर्षीय मेवा लाल के रूप में हुई है। जांच में सामने आया कि मेवा लाल मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले का निवासी था। वह पिछले लंबे समय से हल्द्वानी और आसपास के क्षेत्रों में रहकर आजीविका कमा रहा था। वर्तमान में वह वन विभाग में एक संविदाकर्मी (कॉन्ट्रैक्ट वर्कर) के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा था और जंगल के ही आसपास अस्थाई रूप से रह रहा था।

स्थानीय लोगों और उसके सहकर्मियों के अनुसार, मेवा लाल स्वभाव से शांत था, लेकिन इस हल्द्वानी टांडा जंगल हत्याकांड के पीछे की असल वजह क्या है, इसका खुलासा होना अभी बाकी है।

गहरी साजिश या आपसी रंजिश? जांच के केंद्र में कई बिंदु

प्राथमिक जांच और शव के निरीक्षण से यह साफ हो गया है कि मेवा लाल पर हमला बेहद सुनियोजित तरीके से या फिर अचानक उपजे भयंकर गुस्से में किया गया। हमलावर ने मेवा लाल की गर्दन पर धारदार हथियार (संभवतः कुल्हाड़ी) से जोरदार प्रहार किए, जिससे मौके पर ही अत्यधिक खून बह जाने के कारण उसकी मौत हो गई। हत्या की इस निर्मम कार्यशैली को देखकर पुलिस विभिन्न कोणों से मामले की तफ्तीश कर रही है:

  1. पुरानी रंजिश: क्या मेवा लाल का अपने पैतृक निवास कौशांबी (यूपी) या हल्द्वानी में किसी से कोई पुराना विवाद चल रहा था?

  2. लेन-देन या आपसी कहासुनी: क्या वारदात की रात पैसों के लेन-देन या किसी अन्य बात को लेकर दोस्तों के बीच कोई विवाद हुआ था?

  3. करीबी साथी पर शक: पुलिस की सुई मृतक के एक बेहद करीबी साथी पर टिकी हुई है, जो वारदात के समय उसके साथ था या उसके ठीक बाद से गायब है।

जल्द होगी आरोपी की गिरफ्तारी: सीओ अमित कुमार सैनी

इस पूरे मामले पर आधिकारिक बयान देते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) हल्द्वानी, अमित कुमार सैनी ने बताया कि पुलिस को देर रात टांडा जंगल क्षेत्र में एक शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी। पुलिस टीम ने तुरंत रिस्पॉन्ड किया और शव को अपने कब्जे में लेकर पंचनामा भरने के बाद पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।

"टांडा जंगल क्षेत्र में वन विभाग के एक संविदाकर्मी की धारदार हथियार से गला काटकर हत्या की गई है। प्रथम दृष्टया मामला आपसी विवाद या रंजिश का लग रहा है। मृतक के एक संदिग्ध साथी की तलाश में पुलिस की कई टीमें दबिश दे रही हैं। हमारे पास कुछ अहम सुराग हैं और हम दावा करते हैं कि बहुत जल्द आरोपी को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया जाएगा।"
- अमित कुमार सैनी, सीओ हल्द्वानी

इलाके में खौफ और सुरक्षा पर उठे सवाल

इस हल्द्वानी टांडा जंगल हत्याकांड के बाद से स्थानीय वन कर्मियों और जंगल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के बीच दहशत का माहौल है। टांडा का यह इलाका अमूमन शांत रहता है, लेकिन इस तरह सरेराह और इतनी बेरहमी से हुई हत्या ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय निवासियों ने मांग की है कि जंगल क्षेत्र में गश्त बढ़ाई जाए ताकि भविष्य में ऐसी वारदातों को रोका जा सके।

फिलहाल, पुलिस संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है और मृतक के मोबाइल कॉल डिटेल्स (CDR) को भी खंगाला जा रहा है ताकि अंतिम समय में वह किसके संपर्क में था, इसका पता लगाया जा सके। पुलिस का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और मुख्य संदिग्ध के पकड़े जाने के बाद इस पूरे हत्याकांड का पटाक्षेप हो जाएगा।

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