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पहली भारत यात्रा पर कोलकाता पहुंचे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो; आज दिल्ली में पीएम मोदी से द्विपक्षीय वार्ता

कोलकाता/नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति और दक्षिण एशिया के रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से एक बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरा के तहत अपनी चार दिवसीय यात्रा के पहले चरण में पश्चिम बंगाल की सांस्कृतिक राजधानी कोलकाता पहुंच चुके हैं। रूबियो के अमेरिकी विदेश मंत्री का पदभार संभालने के बाद यह उनका पहला आधिकारिक भारत दौरा है, जिसे वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच भविष्य के रिश्तों की दिशा तय करने वाला ‘टर्निंग पॉइंट’ माना जा रहा है।

कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। अमेरिकी विदेश मंत्री के इस हाई-प्रोफाइल दौरे को देखते हुए कोलकाता के प्रमुख रणनीतिक और ऐतिहासिक स्थलों पर सुरक्षा के कड़े और व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। कोलकाता में अपने संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद मार्को रूबियो आज ही देश की राजधानी नई दिल्ली के लिए रवाना होंगे, जहां वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

मदर टेरेसा हाउस पहुंचे रूबियो, विक्टोरिया मेमोरियल पर सुरक्षा सख्त

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अपने भारत प्रवास की शुरुआत कोलकाता में एक बेहद मानवीय और संवेदनशील कदम के साथ की। वह सीधे ‘मदर टेरेसा हाउस ऑफ द मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ (Mother Teresa House) पहुंचे। रूबियो ने वहां जाकर शांति की दूत और नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और सिस्टर्स से मुलाकात कर उनके सेवा कार्यों की सराहना की।

“इस यात्रा में मार्को रूबियो के साथ भारत में नियुक्त नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर भी मौजूद हैं। अमेरिकी राजनयिकों के इस दौरे के मद्देनजर कोलकाता के ऐतिहासिक विक्टोरिया मेमोरियल और उसके आसपास के पूरे क्षेत्र को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। स्थानीय पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के साथ चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जा रही है।”

दिल्ली में पीएम मोदी से महामुलाकात: रक्षा, तकनीक और व्यापार पर होगी बात

कोलकाता के बाद आज शाम राजधानी नई दिल्ली में कूटनीति का असली केंद्र सजेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के बीच होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस महामुलाकात के दौरान दोनों देशों के बीच कई ऐसे समझौतों पर मुहर लग सकती है, जो आने वाले दशकों में हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र की भू-राजनीति को प्रभावित करेंगे।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच मुख्य रूप से निम्नलिखित चार बड़े एजेंडों पर गहन चर्चा होगी:

  1. रक्षा सहयोग (Defense Cooperation): द्विपक्षीय सैन्य तकनीक हस्तांतरण, सह-उत्पादन और लड़ाकू विमानों के इंजनों के निर्माण की प्रगति की समीक्षा।

  2. क्रिटिकल टेक्नोलॉजी और AI: सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को मजबूत करना, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग में साझा निवेश।

  3. द्विपक्षीय व्यापार: दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करना और नए बाजार पहुंच समझौतों को अंतिम रूप देना।

  4. क्वाड (QUAD) और क्षेत्रीय सुरक्षा: हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच चारों लोकतांत्रिक देशों (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के गठबंधन को और अधिक धार देना।

भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी: प्रमुख स्तंभ और प्रगति

रणनीतिक क्षेत्र वर्तमान सहयोग का स्वरूप रूबियो की यात्रा का संभावित फोकस
सेमीकंडक्टर (Semiconductor) भारत में नई फैब्रिकेशन यूनिट्स की स्थापना अमेरिकी निवेश और तकनीक का तेजी से ट्रांसफर
डिफेंस सिंडिकेट (iCET) क्रिटिकल और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी पहल जेट इंजन और ड्रोन तकनीक पर अंतिम समझौता
हिंद-प्रशांत रणनीति मुक्त और खुले समुद्री मार्ग का समर्थन नौसैनिक सहयोग और साझा गश्त की रूपरेखा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) संयुक्त अनुसंधान एवं विकास (R&D) प्रोजेक्ट्स डेटा गवर्नेंस और सुरक्षित एआई फ्रेमवर्क

क्यों बेहद खास है मार्को रूबियो का यह दौरा?

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के संबंध महज औपचारिक न रहकर एक गहरी ‘रणनीतिक साझेदारी’ में बदल चुके हैं। चाहे वह यूक्रेन संकट के बीच वैश्विक भू-राजनीति को संभालना हो या फिर एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन बनाए रखना, दोनों देशों की निर्भरता एक-दूसरे पर बढ़ी है।

ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर कई मोर्चों पर तनाव जारी है, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो भारत दौरा यह साफ संदेश देता है कि अमेरिकी प्रशासन भारत को अपना सबसे विश्वसनीय और मजबूत रणनीतिक साझेदार मानता है। विशेषज्ञों को उम्मीद है कि रूबियो की इस यात्रा के बाद दोनों देशों के रक्षा मंत्रालयों और तकनीकी उद्योगों के बीच कई नई साझा घोषणाएं देखने को मिलेंगी, जो ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को भी वैश्विक स्तर पर एक नई ऊंचाई देंगी।

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