
नई दिल्ली: देश के भौगोलिक परिदृश्य पर इस समय मौसम के दो बेहद विपरीत और डरावने रूप देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहां उत्तर, मध्य और पूर्वी भारत के मैदानी इलाके सूरज की तपिश और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में झुलस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ देश के पर्वतीय और तटीय हिस्सों में आसमानी आफत, भारी बारिश और अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है।
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ताजा भारत का मौसम अपडेट देश में प्राकृतिक असंतुलन की एक गंभीर तस्वीर पेश करता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, आगामी एक सप्ताह तक मैदानी इलाकों में राहत मिलने के आसार बेहद कम हैं, जबकि पहाड़ी राज्यों और दक्षिण भारत में भारी मौसमी बदलाव दर्ज किए जा रहे हैं।
मैदानी राज्यों में ‘अग्निकुंड’ जैसी स्थिति, यूपी का बांदा सबसे गर्म
उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश राज्यों में इस समय सूरज की किरणें आग बरसा रही हैं। कई शहरों में तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री सेल्सियस ऊपर बना हुआ है, जिसके कारण सड़कों पर दोपहर के समय सन्नाटा पसर जाता है।
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड इलाके में स्थित बांदा शहर इस समय देश का सबसे गर्म स्थान रिकॉर्ड किया गया है, जहां पारा रिकॉर्ड 46.4 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा है। इसके ठीक बाद संगम नगरी प्रयागराज का नंबर आता है, जहां अधिकतम तापमान 46.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में न केवल दिन के समय भीषण लू चल रही है, बल्कि रात के तापमान में भी भारी बढ़ोतरी के कारण ‘वॉर्म नाइट’ (बेहद गर्म रातें) जैसी स्थिति बनी हुई है, जिससे लोग 24 घंटे बेचैन हैं।
राजस्थान में फिर बढ़ेगा पारा, जून में मानसून-पूर्व राहत की उम्मीद
मरुस्थलीय राज्य राजस्थान में भी गर्मी से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, 24 मई से राज्य के तापमान में एक बार फिर 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी होने की आशंका है। इसके कारण राजस्थान के कई जिलों में ‘भीषण से अत्यधिक भीषण लू’ (Severe Heatwave) का दौर शुरू हो जाएगा।
मौसम पूर्वानुमान सेवा स्काईमेट वेदर के मौसम विज्ञानी महेश पलावत ने इस स्थिति पर महत्वपूर्ण जानकारी देते हुए बताया:
“उत्तर-पश्चिमी भारत के मैदानी इलाकों, मध्य भारत और प्रायद्वीपीय भारत के कुछ हिस्सों में अगले 6 से 7 दिनों तक भीषण लू की स्थिति लगातार बनी रह सकती है। हालांकि, राहत की बात यह है कि जून की शुरुआत से ही देश में मानसून-पूर्व (Pre-Monsoon) गतिविधियां सक्रिय होने की उम्मीद है, जिससे तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को इस तपिश से निजात मिल सकेगी।”
दक्षिण और पूर्व में आसमानी आफत: केरल में ऑरेंज अलर्ट, बंगाल में मूसलाधार की चेतावनी
एक तरफ जहां उत्तर भारत पानी की एक-एक बूंद और ठंडी हवा के लिए तरस रहा है, वहीं दक्षिण भारत के केरल में नए पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव के चलते मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो गया है।
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केरल में चेतावनी: आईएमडी ने केरल के तटीय जिले अलाप्पुझा में भारी से बहुत भारी बारिश का ‘ऑरेंज अलर्ट’ जारी किया है। इसके अलावा तिरुवनंतपुरम, कोल्लम, पतनमथिट्टा, कोट्टायम, एर्नाकुलम और इडुक्की सहित छह अन्य जिलों में ‘येलो अलर्ट’ प्रभावी है। अनुमान है कि 28 मई से 3 जून के बीच केरल में मूसलाधार बारिश का दौर और तेज हो सकता है।
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उत्तर बंगाल का हाल: पश्चिम बंगाल के उत्तरी हिस्सों में भी मौसम विभाग ने आंधी-तूफान के साथ भारी बारिश की चेतावनी दी है। दार्जिलिंग, कालीमपोंग, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार और कूच बिहार में 26 मई तक मूसलाधार बारिश होने के आसार हैं।
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तमिलनाडु में तपिश: तमिलनाडु के 15 से अधिक जिलों में पारा 39 डिग्री सेल्सियस को पार कर चुका है। तटीय तमिलनाडु और पुडुचेरी में लू की स्थिति बनी हुई है, हालांकि स्थानीय स्तर पर कुछ छिटपुट बारिश ने राहत भी दी है।
देश के प्रमुख क्षेत्रों में मौसम की वर्तमान स्थिति पर एक नज़र
| राज्य / क्षेत्र | अधिकतम तापमान / मुख्य घटना | आईएमडी (IMD) की चेतावनी / अलर्ट |
| उत्तर प्रदेश (बांदा) | 46.4°C (देश में सबसे गर्म) | पूर्वी यूपी में भीषण लू और गर्म रातों का अलर्ट |
| राजस्थान | तापमान में 2-3°C की और वृद्धि संभव | 24 मई से पश्चिमी राजस्थान में रेड/येलो अलर्ट |
| केरल | दक्षिणी हिस्सों में भारी बारिश | अलाप्पुझा में ऑरेंज अलर्ट, 6 जिलों में येलो अलर्ट |
| हिमाचल प्रदेश | रोहतांग दर्रे में ताजा बर्फबारी | 5 जिलों (चंबा, शिमला आदि) में तेज हवाओं का येलो अलर्ट |
| अरुणाचल प्रदेश | ऊपरी सुबनसिरी में अचानक आई बाढ़ | नदियों के किनारे न जाने की आधिकारिक एडवाइजरी |
अरुणाचल प्रदेश में अचानक आई बाढ़ से तबाही, संपर्क टूटा
पूर्वोत्तर का राज्य अरुणाचल प्रदेश इस समय प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। राज्य के ऊपरी सुबनसिरी जिले में भारी बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ (Flash Flood) ने भारी तबाही मचाई है। आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, बाढ़ के तेज बहाव में कई महत्वपूर्ण संपर्क पुल बह गए हैं, जिससे दर्जनों गांवों का मुख्य प्रशासनिक मुख्यालयों से संपर्क पूरी तरह कट गया है।
बहने वाले पुलों में निंगपिंग गांव के पास स्थित न्यो कोरो का आरसीसी (RCC) पुल और गीबा मुख्यालय को लॉन्गटे गांव से जोड़ने वाला एक अन्य मुख्य पुल शामिल है। जान-माल के नुकसान को देखते हुए जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) ने एक आपातकालीन परामर्श जारी कर स्थानीय लोगों और पर्यटकों से नदियों, नालों के पास मछली पकड़ने या किसी भी अन्य गतिविधि के लिए न जाने की सख्त अपील की है।
पहाड़ों में कहीं राहत तो कहीं आफत: कश्मीर में ओलावृष्टि, हिमाचल में बर्फबारी
मैदानी इलाकों की तुलना में पहाड़ों का मौसम भी इस बार काफी अनिश्चित बना हुआ है। जम्मू-कश्मीर के बारामूला जिले के रफीबाद (लासर इलाका) और उसके आसपास के ग्रामीण अंचलों में भीषण ओलावृष्टि (Hailstorm) हुई है। इस प्राकृतिक मार के कारण कश्मीर की रीढ़ माने जाने वाले सेब के बागों और खड़ी फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है, जिससे स्थानीय किसान दाने-दाने को मोहताज होने की स्थिति में आ गए हैं।
इसके विपरीत, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ हिस्सों से राहत की खबर भी है। हिमाचल के कुल्लू जिले में स्थित प्रसिद्ध रोहतांग दर्रे और उसके आसपास के ऊंचाई वाले इलाकों में शुक्रवार को ताजा बर्फबारी दर्ज की गई। इस बर्फबारी और मैदानी इलाकों में चली तेज ठंडी हवाओं के कारण पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को कुछ समय के लिए चिलचिलाती गर्मी से बड़ी राहत मिली है।
हालांकि, मौसम विभाग ने शनिवार को हिमाचल के पांच प्रमुख पहाड़ी जिलों—चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला में गरज-चमक के साथ 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का ‘येलो अलर्ट’ जारी किया है। उत्तराखंड के भी पांच पहाड़ी जिलों (उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़) में हल्की से मध्यम बारिश और बिजली गिरने की संभावना जताई गई है।
समग्र रूप से देखें तो वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सीधा असर इस समय भारत का मौसम अपडेट के आंकड़ों में साफ परिलक्षित हो रहा है, जहां एक ही समय में देश सूखा-लू और बाढ़-बर्फबारी की दोहरी चुनौतियों से एक साथ मुकाबला कर रहा है।



