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दिनेशपुर में 12वीं पास फर्जी डॉक्टर चला रहा था क्लीनिक, आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथी मिलाकर करता था जिंदगी से खिलवाड़

रुद्रपुर (उधम सिंह नगर): उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले से इंसानी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करने और चिकित्सा जगत को शर्मसार करने वाला एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। जिले के दिनेशपुर थाना क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने एक बड़े औचक निरीक्षण (रेड) के दौरान एक कथित झोलाछाप और फर्जी डॉक्टर को रंगे हाथों दबोचा है।

आरोप है कि यह स्वयंभू डॉक्टर बिना किसी वैध डिग्री या सरकारी अनुमति के पिछले एक साल से इलाके में धड़ल्ले से क्लीनिक चला रहा था। इतना ही नहीं, यह शातिर युवक मासूम और भोले-भाले मरीजों को जल्द ठीक करने का झांसा देकर आयुर्वेदिक दवाओं के नाम पर भारी मात्रा में प्रतिबंधित या अनियंत्रित एलोपैथिक दवाइयां मिलाकर दे रहा था। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से पूरे दिनेशपुर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में हड़कंप मचा हुआ है।

गुप्त सूचना पर प्रशासन का कड़ा एक्शन, संयुक्त टीम ने मारी रेड

दिनेशपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत पिछले काफी समय से इस संदिग्ध क्लीनिक और वहां दी जाने वाली दवाइयों के गोरखधंधे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश पनप रहा था। मरीजों को मिल रही दवाओं के अजीब साइड इफेक्ट्स और डॉक्टर के संदिग्ध व्यवहार को लेकर लगातार प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को गोपनीय शिकायतें मिल रही थीं।

इन गंभीर शिकायतों का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए एक उच्चस्तरीय संयुक्त टीम का गठन किया। इस टीम में:

  • दिनेशपुर पुलिस के जांबाज अधिकारी

  • आयुर्वेदिक और यूनानी स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञ

  • वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ऋचा सिंह

टीम ने पूरी रणनीति के साथ योजना बनाकर संदिग्ध क्लीनिक पर अचानक छापा मार दिया। अचानक हुई इस छापेमारी से क्लीनिक के भीतर अफरा-तफरी मच गई और आरोपी को संभलने या भागने का मौका तक नहीं मिला।

केवल 12वीं पास और पीलीभीत का निवासी है आरोपी

संयुक्त टीम ने जब मौके पर पहुंचकर कथित डॉक्टर से उसकी मेडिकल डिग्री, रजिस्ट्रेशन नंबर और क्लीनिक संचालन से जुड़े वैध लाइसेंस मांगे, तो उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। प्रारंभिक पूछताछ और दस्तावेजों की पड़ताल में जो सच सामने आया, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।

चौंकाने वाला खुलासा: खुद को बड़ी बीमारियों का विशेषज्ञ बताने वाला यह कथित डॉक्टर केवल 12वीं पास है। उसके पास चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) से जुड़ी कोई भी औपचारिक या अनौपचारिक डिग्री नहीं है। आरोपी की पहचान उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के मूल निवासी के रूप में हुई है, जो पिछले करीब 1 साल से दिनेशपुर में अपनी जड़ें जमाए बैठा था और रोजाना दर्जनों मरीजों की जान जोखिम में डाल रहा था।

आयुर्वेद की आड़ में एलोपैथी का खतरनाक कॉकटेल

जांच टीम को क्लीनिक के भीतर भारी मात्रा में संदिग्ध और बिना लेबल वाली दवाइयां बरामद हुईं। आरोपी का काम करने का तरीका बेहद खतरनाक था। वह मरीजों को यह विश्वास दिलाता था कि वह पूरी तरह शुद्ध और प्राकृतिक आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों से उनका इलाज कर रहा है, जबकि असल में वह उन पुड़िया और सीरप में तेज असर वाली एलोपैथिक दर्द निवारक (Painkillers) और स्टेरॉयड (Steroids) जैसी दवाएं पीसकर मिला देता था।

चिकित्सकीय विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह बिना किसी अनुपात और डॉक्टरी सलाह के आयुर्वेदिक दवाओं में एलोपैथिक रसायनों का मिश्रण इंसानी लिवर, किडनी और दिल के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। प्रशासन ने मौके से मिली सभी संदिग्ध दवाओं को तत्काल प्रभाव से जब्त कर लिया है।

दवाओं के सैंपल लैब भेजे गए, रिपोर्ट के बाद बढ़ेगी धाराएं: ड्रग इंस्पेक्टर

इस पूरे मामले पर उधम सिंह नगर के ड्रग इंस्पेक्टर (औषधि निरीक्षक) ने बताया कि विभागीय नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए बरामद की गई सभी संदिग्ध और मिश्रित दवाओं की विधिवत सैंपलिंग कर ली गई है। इन सैंपलों को तुरंत राजकीय राजकीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला (Drug Testing Laboratory) भेजा जा रहा है।

ड्रग इंस्पेक्टर के मुताबिक, प्रयोगशाला से रासायनिक विश्लेषण की रिपोर्ट आते ही आरोपी के खिलाफ औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम (Drugs and Cosmetics Act) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर व गैर-जमानती धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। फिलहाल पुलिस आरोपी को हिरासत में लेकर यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसे इन दवाओं की सप्लाई कहां से होती थी।

स्थानीय जनता में रोष, झोलाछापों के खिलाफ बड़े अभियान की मांग

इस दिनेशपुर फर्जी डॉक्टर गिरफ्तार मामले के बाद से स्थानीय जनता में स्वास्थ्य महकमे के प्रति जहां एक तरफ राहत है, वहीं दूसरी तरफ इस बात को लेकर भारी गुस्सा है कि एक साल से उनकी आंखों के सामने यह अवैध धंधा चल रहा था। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उधम सिंह नगर के सुदूरवर्ती और ग्रामीण इलाकों में कुकुरमुत्ते की तरह खुल गए ऐसे सभी अवैध क्लीनिकों और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ एक व्यापक और ब्लॉक-स्तरीय जांच अभियान चलाया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी मासूम को अपनी जान न गंवानी पड़े।

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