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Reading: गोवा : निर्माताओं के लिए इफ्फी एक मौका है जहां वे अपनी फिल्मों को दिखा सकते हैं और मार्केटिंग कर सकते हैं: आशा पारेख
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गोवा : निर्माताओं के लिए इफ्फी एक मौका है जहां वे अपनी फिल्मों को दिखा सकते हैं और मार्केटिंग कर सकते हैं: आशा पारेख

The Hill India News
Last updated: November 27, 2022 10:39 am
The Hill India News
Published: November 27, 2022
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इफ्फी-53 में सदाबहार क्लासिक फिल्म ‘कटी पतंग’ का प्रदर्शन आशा पारेख को अतीत की स्मृतियों में वापस ले गया

किशोर कुमार की दिव्य आवाज और राजेश खन्ना का दमदार चरित्र एक बार फिर इस सदाबहार गीत के साथ पणजी के मैकिनेज पैलेस ऑडिटोरियम के पर्दे पर जीवंत हो उठा, और ये दर्शकों के लिए एक सुनहरा क्षण था। गुजरे जमाने की अभिनेत्री और दर्शकों के दिल की धड़कन आशा पारेख, जिन्होंने इस फिल्म में मुख्य किरदार निभाया और इस गाने में भी नजर आई थीं, उनके लिए फिल्म कटी पतंग की स्क्रीनिंग में उपस्थित होना दिल को छू लेने वाले पलों से भरे अतीत की स्मृतियों की लौट जाने जैसा था। 53वें भारतीय अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड रेट्रो सेक्शन में कटी पतंग को प्रदर्शित किया गया था। इफ्फी का ये खंड इस वर्ष आशा पारेख को समर्पित है जो साल 2020 के दादा साहेब फाल्के पुरस्कार की विजेता हैं।

इस स्क्रीनिंग में भाग लेते हुए और इस महोत्सव के प्रतिनिधियों से बातचीत करते हुए आशा पारेख ने कहा कि बीते वर्षों में इफ्फी बहुत बड़ा हो गया है और ये निर्माताओं को अपनी फिल्मों को प्रदर्शित करने और बेचने का अवसर देता है। उन्होंने कहा, “मुझे अपनी फिल्म इंडस्ट्री से प्यार है। फिल्म प्रेमियों के लिए इफ्फी सबसे अच्छी जगह है, क्योंकि यहां देश भर के लोग एक साथ आते हैं। आशा पारेख ने सम्मानित किए जाने के लिए इफ्फी, एनएफडीसी और सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय को धन्यवाद दिया।

कई सुपरहिट फिल्मों में काम कर चुकीं आशा पारेख को प्यार से 1960 और 70 के दशक में हिंदी सिनेमा की ‘हिट गर्ल’ कहा जाता था। एक बाल कलाकार के रूप में शुरुआत करने वाली आशा पारेख की डेब्यू फिल्म दिल देके देखो (1959) थी, जो एक बड़ी हिट बन गई जिसने उन्हें स्टारडम की ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया। उन्होंने 95 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया, जिसमें कुछ तब के शीर्ष फिल्मकारों और उस समय के प्रमुख कलाकारों के साथ थीं, जैसे कि – शक्ति सामंत, राज खोसला, नासिर हुसैन, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, शम्मी कपूर, मनोज कुमार, देव आनंद और कई अन्य। उन्होंने कटी पतंग (1971) के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता और कई अन्य प्रतिष्ठित सम्मानों के साथ फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड (2002) भी पाया। आशा पारेख एक फिल्म निर्देशक, निर्माता और कुशल भारतीय शास्त्रीय नृत्यांगना भी हैं।

शक्ति सामंत द्वारा निर्देशित कटी पतंग, गुलशन नंदा के इसी शीर्षक वाले सबसे अधिक बिकने वाले उपन्यास पर आधारित थी। इस फिल्म में केंद्रीय पात्र माधवी (आशा पारेख) कमल (राजेश खन्ना) के साथ अपनी शादी के दिन घर से दूर पतंग की तरह कट कर उड़ जाती है, लेकिन आगे उसे अपने ‘प्रेमी’ कैलाश (प्रेम चोपड़ा) के नापाक इरादे पता चलते हैं। परिस्थितियां माधवी को मजबूर कर देती हैं और उसे एक घर में शरण लेनी पड़ती है और उस घर की बहू होने का नाटक करना पड़ता है। असली बहू पूनम (नाज़) की रेल दुर्घटना में मृत्यु हो जाती है, लेकिन मरने से पहले वो अपने बच्चे को माधवी के हाथों सौंप जाती है। आगे फिल्म की कहानी माधवी की जिदंगी दिखाती है, कैसे वो एक झूठी पहचान के साथ जीने लगती है। संगीतकार आरडी बर्मन और सुपरस्टार राजेश खन्ना को एक साथ लाने के लिए भी इस फिल्म को सबसे ज्यादा याद किया जाता है। इस फिल्म में ‘ये शाम मस्तानी’, ‘प्यार दीवाना होता है’ और ‘ये जो मोहब्बत है’ जैसे सदाबहार मधुर हिट गानों का संग्रह सुनने को मिलता है।

पद्म श्री (1992) से सम्मानित आशा पारेख ने 1998-2001 के दौरान केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (सीबीएफसी) के प्रमुख के रूप में भी काम किया।

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