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उत्तराखंडफीचर्ड

Earth Hour 2026: अंधेरे में जगमगाएगी जागरूकता; उत्तराखंड में आज रात 1 घंटे रहेगा ‘ब्लैकआउट’, धामी सरकार ने की बड़ी अपील

The Hill India News
Last updated: March 28, 2026 5:47 am
The Hill India News
Published: March 28, 2026
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देहरादून: जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों और ग्लोबल वार्मिंग के बढ़ते खतरों के बीच आज पूरी दुनिया एक अनूठी एकजुटता की गवाह बनने जा रही है। शनिवार, 28 मार्च को वैश्विक स्तर पर Earth Hour 2026 मनाया जा रहा है। भारत सहित दुनिया के तमाम देशों में आज रात एक घंटे के लिए गैर-जरूरी बिजली के उपकरण और लाइटें बंद रखी जाएंगी। देवभूमि उत्तराखंड में भी इसे लेकर व्यापक तैयारियां की गई हैं और शासन ने इसे एक जन-आंदोलन बनाने का आह्वान किया है।

Contents
रात 8:30 से 9:30 बजे तक थमेगी बिजली की खपत20वीं वर्षगांठ: दो दशकों का सफर और नई चुनौतियांऊर्जा प्रदेश उत्तराखंड की विशेष भागीदारीअर्थ आवर डे का उद्देश्य: सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, प्रभावी है यह कदमजनभागीदारी: कैसे बनें इस मुहिम का हिस्सा?छोटे कदम, बड़े बदलाव

रात 8:30 से 9:30 बजे तक थमेगी बिजली की खपत

भारत में अर्थ आवर का निर्धारित समय आज रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक है। इस एक घंटे के दौरान उत्तराखंड के सभी सरकारी कार्यालयों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों, ऐतिहासिक स्मारकों और आवासीय कॉलोनियों में गैर-जरूरी रोशनी बंद रखने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदेश के नागरिकों से इस वैश्विक मुहिम का हिस्सा बनने की पुरजोर अपील की है।

शासन द्वारा जारी निर्देश के अनुसार, अस्पतालों, पुलिस थानों और रेलवे स्टेशनों जैसी आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य सभी संस्थानों से ऊर्जा बचाने की अपेक्षा की गई है।


20वीं वर्षगांठ: दो दशकों का सफर और नई चुनौतियां

संयोग से, आज Earth Hour 2026 अपनी 20वीं वर्षगांठ मना रहा है। साल 2007 में सिडनी से शुरू हुई यह प्रतीकात्मक शुरुआत आज एक विशाल वैश्विक मुहिम बन चुकी है। इस वर्ष की थीम मुख्य रूप से ‘प्रकृति के लिए समय निकालने’ और ‘जीवाश्म ईंधन’ पर हमारी निर्भरता कम करने पर केंद्रित है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही एक घंटे के लिए बिजली बंद करना एक छोटा कदम लगे, लेकिन जब करोड़ों लोग एक साथ ऐसा करते हैं, तो इसका प्रभाव कार्बन फुटप्रिंट को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।


ऊर्जा प्रदेश उत्तराखंड की विशेष भागीदारी

उत्तराखंड, जिसे ‘ऊर्जा प्रदेश’ के नाम से जाना जाता है, इस अभियान में विशेष भूमिका निभा रहा है। राज्य में टिहरी डैम जैसी विशाल हाइड्रोपावर परियोजनाएं हैं, जो पूरे उत्तर भारत को रोशन करती हैं। अधिकारियों का कहना है कि Earth Hour 2026 के दौरान बिजली की मांग में अचानक आने वाली गिरावट और फिर उसके प्रबंधन के लिए लोड डिस्पैच सेंटर (LDC) पूरी तरह तैयार है।

“पृथ्वी हमारा साझा घर है और इसकी रक्षा करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। अर्थ आवर केवल बिजली बचाने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी गंभीरता का प्रतीक है।” — सरकारी प्रवक्ता, उत्तराखंड शासन


अर्थ आवर डे का उद्देश्य: सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, प्रभावी है यह कदम

इस अभियान का मूल उद्देश्य केवल लाइटें बंद करना नहीं है, बल्कि आम जनमानस को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:

  1. ऊर्जा की भारी बचत: एक घंटे के ‘ब्लैकआउट’ से मेगावाट में बिजली की बचत होती है, जो कोयला आधारित बिजली संयंत्रों के बोझ को कम करती है।

  2. कार्बन उत्सर्जन में कमी: बिजली उत्पादन के दौरान होने वाले प्रदूषण और ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में इस दौरान गिरावट आती है।

  3. ग्लोबल वार्मिंग पर प्रहार: यह अभियान लोगों को याद दिलाता है कि बढ़ता तापमान हमारे अस्तित्व के लिए खतरा है।

  4. प्रकृति से जुड़ाव: रोशनी कम होने पर लोग प्रकृति और सितारों के करीब महसूस करते हैं, जो मानसिक शांति और पर्यावरण बोध के लिए आवश्यक है।


जनभागीदारी: कैसे बनें इस मुहिम का हिस्सा?

प्रशासन ने प्रदेशवासियों के लिए कुछ सरल सुझाव साझा किए हैं ताकि वे Earth Hour 2026 में अपना योगदान दे सकें:

  • रात 8:30 बजे अपने घर की बालकनी, गार्डन और कमरों की गैर-जरूरी लाइटें बंद कर दें।

  • एसी, गीजर और अन्य भारी विद्युत उपकरणों का उपयोग इस एक घंटे के दौरान न करें।

  • कैंडल लाइट डिनर या परिवार के साथ अंधेरे में बैठकर पर्यावरण पर चर्चा करें।

  • सोशल मीडिया पर #EarthHour2026 और #SavePlanet हैशटैग के साथ अपनी भागीदारी की फोटो साझा करें ताकि अन्य लोग भी प्रेरित हों।

छोटे कदम, बड़े बदलाव

उत्तराखंड की हसीन वादियों से लेकर मैदानी इलाकों तक, आज रात एक घंटे का यह स्वैच्छिक अंधेरा भविष्य के लिए एक नई रोशनी लेकर आएगा। धामी सरकार की यह अपील और जनता का सहयोग यह सिद्ध करेगा कि जब बात पर्यावरण की आती है, तो हिमालयी राज्य अपनी जिम्मेदारी निभाने में सबसे आगे रहता है।

याद रहे, आज रात 8:30 बजे से 9:30 बजे तक आपकी एक छोटी सी पहल पृथ्वी को ‘सांस लेने’ का मौका देगी।

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