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डिजिटल जनगणना 2026: 10 अप्रैल से उत्तराखंड में शुरुआत, साइबर ठगी से बचाव के लिए सतर्क रहें नागरिक

The Hill India News
Last updated: April 7, 2026 6:58 am
The Hill India News
Published: April 7, 2026
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देहरादून: देश में पहली बार पूरी तरह डिजिटल तरीके से होने जा रही जनगणना को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। उत्तराखंड में इस ऐतिहासिक प्रक्रिया की शुरुआत 10 अप्रैल से होने जा रही है, जो 24 अप्रैल तक चलेगी। इस दौरान राज्य के प्रत्येक परिवार को जनगणना प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। तकनीक के उपयोग से पारदर्शी, सटीक और रियल-टाइम डेटा जुटाने की दिशा में यह एक बड़ा कदम माना जा रहा है। हालांकि, इस डिजिटल बदलाव के साथ साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ गया है, जिसे देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने लोगों से विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।

डिजिटल जनगणना का उद्देश्य केवल जनसंख्या की गणना करना नहीं है, बल्कि समाज की वास्तविक स्थिति को समझना और उसके आधार पर भविष्य की योजनाओं को तैयार करना भी है। उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से संवेदनशील राज्य में यह पहल विकास योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने में मदद करेगी। लेकिन इसके साथ ही साइबर अपराधियों की सक्रियता भी बढ़ सकती है, जो लोगों की निजी जानकारी चुराने के लिए नए-नए तरीके अपना सकते हैं।

इस बार की जनगणना की सबसे खास बात “स्वगणना” यानी सेल्फ एन्यूमरेशन है। इसके तहत नागरिक खुद अपने मोबाइल फोन के जरिए अपनी और अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकेंगे। इसके लिए एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन तैयार किया गया है, जिसे सरल और उपयोगकर्ता के अनुकूल बनाया गया है ताकि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के लोग आसानी से इसका उपयोग कर सकें। इस एप्लीकेशन में कुल 33 अनिवार्य प्रश्न शामिल हैं, जिनका उत्तर देना आवश्यक होगा।

इन प्रश्नों में मकान की स्थिति, निर्माण सामग्री, परिवार के सदस्यों की संख्या, परिवार के मुखिया का नाम, लिंग, सामाजिक वर्ग जैसी बुनियादी जानकारियां शामिल हैं। इसके अलावा घर में उपलब्ध सुविधाओं जैसे पीने का पानी, बिजली, शौचालय, रसोई और गैस कनेक्शन से जुड़ी जानकारी भी मांगी जाएगी। साथ ही नागरिकों को यह भी बताना होगा कि उनके पास टीवी, मोबाइल, इंटरनेट, लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण हैं या नहीं। इसके अतिरिक्त साइकिल, मोटरसाइकिल और कार जैसे वाहनों का विवरण भी दर्ज किया जाएगा।

जनगणना निदेशक इवा श्रीवास्तव के अनुसार, इस डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से एकत्रित सभी जानकारी सीधे केंद्रीय सिस्टम में अपलोड होगी, जिससे डेटा संग्रहण और विश्लेषण में पारदर्शिता आएगी। उन्होंने बताया कि इस बार जनगणना केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लोगों की जीवनशैली, संसाधनों और सुविधाओं की वास्तविक तस्वीर सामने लाएगी।

हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया के दौरान नागरिकों को यह ध्यान रखना बेहद जरूरी है कि कोई भी जनगणना कर्मचारी उनसे बैंक खाता, ओटीपी, पासवर्ड या अन्य संवेदनशील जानकारी नहीं मांगेगा। यदि कोई व्यक्ति इस प्रकार की जानकारी मांगता है, तो वह निश्चित रूप से साइबर ठग हो सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत पुलिस को सूचना देने की सलाह दी गई है।

डिजिटल जनगणना में डेटा की सटीकता सुनिश्चित करने के लिए डबल लेयर सिस्टम लागू किया गया है। पहले चरण में नागरिक स्वयं एप्लीकेशन के माध्यम से जानकारी दर्ज करेंगे, जबकि दूसरे चरण में जनगणना अधिकारी घर-घर जाकर इस जानकारी का सत्यापन करेंगे। जरूरत पड़ने पर संबंधित दस्तावेजों की जांच भी की जा सकती है, ताकि किसी भी प्रकार की त्रुटि को सुधारा जा सके।

जनगणना सचिव दीपक गैरोला के अनुसार, इस अभियान के लिए कर्मचारियों को विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। बड़ी संख्या में शिक्षकों को भी इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है, क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच विश्वसनीय माने जाते हैं। एक जनगणना अधिकारी को लगभग 800 घरों का सर्वे एक महीने के भीतर पूरा करना होगा, जिसके लिए विस्तृत कार्य योजना तैयार की गई है।

सुरक्षा के लिहाज से प्रशासन ने कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। जनगणना में शामिल प्रत्येक कर्मचारी को एक आधिकारिक पहचान पत्र दिया जाएगा, जिसमें एक क्यूआर कोड होगा। नागरिक इस कोड को अपने मोबाइल से स्कैन कर कर्मचारी की पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं, जैसे कि उसका नाम, विभाग और उसे आवंटित क्षेत्र। इससे फर्जी कर्मचारियों की पहचान करना आसान हो जाएगा।

देहरादून के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र डोबाल ने बताया कि जनगणना के दौरान पुलिस और साइबर टीम पूरी तरह सतर्क रहेगी। हर गतिविधि पर नजर रखी जाएगी और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति को बिना पहचान सत्यापित किए अपनी जानकारी न दें।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई व्यक्ति जनगणना कर्मचारी बनकर घर आता है, तो उससे उसका आईडी कार्ड अवश्य मांगा जाए। जब तक उसकी पहचान पूरी तरह से सत्यापित न हो जाए, तब तक किसी भी प्रकार की जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यह सावधानी साइबर ठगी से बचने के लिए बेहद जरूरी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल जनगणना देश के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। इससे सरकार को देश की सामाजिक और आर्थिक स्थिति का सटीक आंकलन मिलेगा, जिससे योजनाओं को बेहतर तरीके से लागू किया जा सकेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी नीतियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा।

देशव्यापी स्तर पर जनगणना फरवरी 2027 में शुरू होने की संभावना है, लेकिन उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए यह प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा रही है। इसके लिए केंद्र सरकार की अधिसूचना का इंतजार किया जा रहा है।

अंततः, डिजिटल जनगणना एक आधुनिक और पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसकी सफलता नागरिकों की जागरूकता और सतर्कता पर भी निर्भर करती है। यदि लोग सतर्क रहेंगे और सही तरीके से सहयोग करेंगे, तो यह अभियान न केवल सफल होगा, बल्कि देश के विकास की दिशा भी तय करेगा।

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