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Reading: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
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The Hill India > Blog > दिल्ली > जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
दिल्लीफीचर्ड

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब

The Hill India News
Last updated: August 3, 2026 7:16 am
The Hill India News
Published: August 3, 2026
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नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शनों का प्रमुख केंद्र रहे जंतर-मंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी की है। शीर्ष अदालत ने कहा है कि यह एक गंभीर और महत्वपूर्ण विषय है कि क्या जंतर-मंतर अब भी धरना-प्रदर्शन के लिए उपयुक्त स्थान है या फिर इसके लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिससे भविष्य में प्रदर्शन स्थलों को लेकर नई नीति बनने की संभावना भी तेज हो गई है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में कहा गया कि जंतर-मंतर पर लगातार होने वाले धरना-प्रदर्शनों से आसपास का जनजीवन प्रभावित होता है। याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रदर्शन के कारण आवागमन बाधित होता है, ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है और मेडिकल जैसी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति भी प्रभावित होती है। ऐसे में राजधानी के बीचों-बीच स्थित इस स्थान की जगह किसी अन्य उपयुक्त स्थान को विरोध-प्रदर्शनों के लिए निर्धारित किया जाना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जताई चिंता

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने कहा कि याचिका में उठाए गए मुद्दे बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि यदि किसी स्थान पर लगातार प्रदर्शन होने से आम नागरिकों की आवाजाही और आवश्यक सेवाओं पर असर पड़ता है, तो इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

सीजेआई ने केंद्र सरकार की ओर से उपस्थित सॉलिसिटर जनरल से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा और केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले को अलग से सूचीबद्ध करने का आदेश दिया। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि अदालत इस विषय पर विस्तृत सुनवाई कर भविष्य के लिए दिशा-निर्देश भी जारी कर सकती है।

सुनवाई के दौरान अरविंद केजरीवाल के प्रस्तावित मार्च का भी जिक्र

सुनवाई के दौरान एक वकील ने अदालत को बताया कि अरविंद केजरीवाल ने एक टाउनहॉल बैठक बुलाई है और प्रधानमंत्री आवास तक मार्च निकालने की घोषणा की है। उन्होंने अदालत को आगाह करते हुए कहा कि 20 जुलाई जैसी स्थिति दोबारा नहीं दोहराई जानी चाहिए।

इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को स्थिति संभालना आता है और उन्हें विश्वास है कि संबंधित एजेंसियां कानून-व्यवस्था बनाए रखेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि प्रशासन स्थिति नियंत्रित करने में असफल रहता है और कोई गंभीर समस्या उत्पन्न होती है, तो संबंधित पक्ष अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।

लोकतांत्रिक अधिकार और जनसुविधा के बीच संतुलन पर होगी बहस

यह मामला केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे देशभर में विरोध-प्रदर्शनों के स्वरूप और स्थान को लेकर व्यापक बहस शुरू हो सकती है। एक ओर संविधान नागरिकों को शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार देता है, वहीं दूसरी ओर सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि आम लोगों की दैनिक जिंदगी, यातायात और आपातकालीन सेवाएं प्रभावित न हों।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में कोई व्यापक दिशा-निर्देश जारी करता है, तो भविष्य में देश के विभिन्न राज्यों और शहरों में भी प्रदर्शन स्थलों को लेकर नई नीतियां बनाई जा सकती हैं। इससे प्रदर्शनकारियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और आम जनता को होने वाली असुविधा भी कम की जा सकेगी।

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को जारी नोटिस के बाद सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। यह मामला लोकतांत्रिक अधिकारों और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण न्यायिक पहल माना जा रहा है।

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