देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के सरकारी महकमों की कार्यशैली में अब एक बड़ा और युगांतरकारी बदलाव आने जा रहा है। सरकारी दफ्तरों में धूल फांकती फाइलों, पत्रावलियों के खोने के डर और लालफीताशाही के दिन अब लदने वाले हैं। जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान के कड़े निर्देशों के अनुपालन में पूरे जनपद के समस्त सरकारी कार्यालयों में शासकीय कार्यों का संचालन पूर्णतः डिजिटल यानी ई-ऑफिस प्रणाली देहरादून के माध्यम से सुनिश्चित किए जाने की दिशा में कार्यवाही को बेहद तेज कर दिया गया है।
इसी महत्वाकांक्षी मुहिम के तहत आज देहरादून कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी (NIC) सभागार में ई-ऑफिस कार्यप्रणाली के सफल, निर्बाध और शत-प्रतिशत क्रियान्वयन हेतु एक विशेष और सघन प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस पहल का सीधा मकसद सरकारी कामकाज को आम जनता के लिए अधिक पारदर्शी, समयबद्ध, पर्यावरण-अनुकूल (कागजरहित) और बेहद प्रभावी बनाना है।
फाइलों का ऑनलाइन अग्रसारण और नोटशीट तैयार करने के गुर सीखे
कलेक्ट्रेट के एनआईसी सभागार में आयोजित इस कार्यशाला में जनपद के विभिन्न विभागों के अधिकारियों और अग्रिम पंक्ति के कर्मचारियों ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के दौरान उन्हें फाइलों के पारंपरिक ढर्रे से हटकर डिजिटल स्पेस में काम करने की व्यावहारिक बारीकियां सिखाई गईं।
प्रशिक्षण के मुख्य बिंदु जिन पर फोकस किया गया:
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ई-ऑफिस पोर्टल पर लॉगिन प्रक्रिया: पोर्टल को सुरक्षित तरीके से एक्सेस करने के तरीके।
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फाइल प्रबंधन व ई-फाइल निर्माण: नई फाइलों को ऑनलाइन बनाना और उनका इंडेक्स तैयार करना।
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पत्राचार और नोटशीट: डिजिटल माध्यम से नोटशीट लिखना और वरिष्ठ अधिकारियों को फॉरवर्ड करना।
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दस्तावेज अपलोड और डिजिटलीकरण: पुराने व नए भौतिक दस्तावेजों को स्कैन कर डिजिटल फाइल का हिस्सा बनाना।
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डिजिटल हस्ताक्षर (DSC): फाइलों की सत्यता और सुरक्षा के लिए डिजिटल सिग्नेचर का उपयोग।
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फाइल ट्रैकिंग व ऑनलाइन अनुमोदन: कोई फाइल किस पटल पर रुकी है, इसकी रियल-टाइम ट्रैकिंग।
अधिकारियों-कर्मचारियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना हमारा लक्ष्य: डॉ. आशीष चौहान
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व को रेखांकित करते हुए जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी विभागों में अब शासकीय कार्यों का निष्पादन अनिवार्य रूप से ई-ऑफिस प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही किया जाएगा।
“सरकारी व्यवस्था में गतिशीलता और ईमानदारी लाने के लिए तकनीक का समावेश अनिवार्य है। इसी के दृष्टिगत हमारे अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता वृद्धि तथा उनकी तकनीकी दक्षता (Technical Skill) विकसित करने के लिए यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है। जब तक हर कर्मचारी इस प्रणाली में पूरी तरह पारंगत नहीं हो जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा।”
— डॉ. आशीष चौहान, जिलाधिकारी, देहरादून
एनआईसी और ई-डिस्ट्रिक्ट प्रबंधकों ने दूर की तकनीकी जिज्ञासाएं
प्रशिक्षण सत्र के दौरान जिला सूचना विज्ञान अधिकारी (NIC) अंकुश पाण्डेय एवं ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा मुख्य प्रशिक्षक की भूमिका में रहे। दोनों तकनीकी विशेषज्ञों ने हाइब्रिड मॉडल (वर्चुअल एवं फिजिकल दोनों माध्यमों से) का उपयोग करते हुए प्रतिभाग कर रहे अफसरों और बाबुओं को प्रशिक्षण दिया।
निर्णय प्रक्रिया में आएगी अभूतपूर्व तेजी
प्रशिक्षकों ने लाइव डेमो (व्यावहारिक प्रदर्शन) के जरिए कंप्यूटर स्क्रीन पर एक फाइल को बनाकर, उस पर डिजिटल हस्ताक्षर कर उसे आगे बढ़ाने की पूरी प्रक्रिया दिखाई। इस दौरान कर्मचारियों द्वारा पूछे गए तकनीकी सवालों और शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया।
विशेषज्ञों ने बताया कि ई-ऑफिस प्रणाली देहरादून के लागू होने से न केवल कार्यालयों में ‘वर्क कल्चर’ (कार्य संस्कृति) अधिक सुव्यवस्थित और आधुनिक होगी, बल्कि किसी भी सरकारी फाइल पर निर्णय लेने की प्रक्रिया में अभूतपूर्व तेजी आएगी। इसके अलावा, आपदा या किसी अन्य दुर्घटना की स्थिति में भी शासकीय अभिलेखों का सुरक्षित एवं सुगम रख-रखाव ऑनलाइन क्लाउड पर हमेशा सुनिश्चित रहेगा।
मिशन मोड में प्रशासन: शत-प्रतिशत क्रियान्वयन की तैयारी
इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की खास बात यह रही कि इसमें विकासखंडों और दूरदराज के क्षेत्रों में तैनात अधिकारी भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वर्चुअल माध्यम) के जरिए सीधे जुड़े रहे। जिला प्रशासन के अनुसार, यह कोई एक बार होने वाला कार्यक्रम नहीं है। आने वाले दिनों में विभागवार और आवश्यकता के अनुसार ऐसे और भी व्यावहारिक प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
शासन की मंशा साफ है कि देहरादून को उत्तराखंड के अन्य जनपदों के लिए ‘डिजिटल एडमिनिस्ट्रेशन’ के एक मॉडल के रूप में स्थापित किया जाए।
जनता को मिलेगा त्वरित न्याय और बेहतर सेवाएं
सरकारी दफ्तरों में अक्सर जनता की शिकायत रहती है कि उनकी फाइलें ‘टेबल-दर-टेबल’ सरकने में महीनों लगा देती हैं। लेकिन देहरादून जिला प्रशासन द्वारा ई-ऑफिस प्रणाली देहरादून को जिस गंभीरता से लागू किया जा रहा है, उससे आम जनता को सीधे तौर पर राहत मिलेगी। फाइलों की सुस्ती दूर होने से सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक समय पर पहुंचेगा। डॉ. आशीष चौहान की यह विजनरी पहल देहरादून के प्रशासनिक इतिहास में पारदर्शिता और सुशासन (Good Governance) का एक नया अध्याय लिखने जा रही है।
