सोमवार को कारोबारी सप्ताह की शुरुआत ही सोने-चांदी की जोरदार तेजी के साथ हुई। MCX पर सोना 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के करीब पहुंच गया, जबकि चांदी 2.33 लाख रुपये प्रति किलो के पार कारोबार करती नजर आई। महज पांच कारोबारी दिनों में चांदी करीब 15 हजार रुपये महंगी हो चुकी है।
नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर जबरदस्त तेजी देखने को मिल रही है। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन यानी सोमवार, 10 अगस्त को मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दोनों कीमती धातुओं ने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। सोने का भाव जहां 1.52 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर को पार कर गया, वहीं चांदी भी 2.33 लाख रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई। खास बात यह है कि पिछले कुछ कारोबारी दिनों में दोनों धातुओं की कीमतों में तेजी काफी तेज रही है।
अगर आप सोना या चांदी खरीदने की योजना बना रहे हैं, शादी-ब्याह के लिए ज्वेलरी लेने वाले हैं या फिर निवेश के लिहाज से बाजार पर नजर रख रहे हैं, तो आज के भाव और हालिया तेजी को समझना आपके लिए बेहद जरूरी है। क्योंकि कीमतों में तेजी के साथ बाजार में आगे की दिशा को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
सोना 1.52 लाख के पार, जानें आज का MCX भाव
सोमवार सुबह MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 1,52,020 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। सुबह करीब 9:48 बजे सोने के फ्यूचर्स भाव में लगभग 200 रुपये यानी 0.13 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
कारोबारी सत्र के दौरान सोने ने 1,51,461 रुपये का निचला स्तर और 1,52,099 रुपये का ऊपरी स्तर छुआ। यानी दिन के कारोबार में सोना अपने ऊपरी स्तर के काफी करीब बना हुआ था। सोने की लगातार मजबूत होती कीमतें इस बात का संकेत दे रही हैं कि कीमती धातु में निवेशकों की दिलचस्पी अभी भी बनी हुई है।
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि MCX का भाव वायदा बाजार का भाव है। आम ग्राहक को ज्वेलरी खरीदते समय इसके अलावा मेकिंग चार्ज, GST और अन्य लागतों का भी सामना करना पड़ता है। इसलिए दुकान पर मिलने वाला अंतिम भाव MCX कीमत से अलग हो सकता है।
सिर्फ पांच दिन में सोना 8,600 रुपये से ज्यादा महंगा
सोने की हालिया तेजी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 31 जुलाई को MCX पर 24 कैरेट सोना 1,43,376 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था। इसके बाद पिछले शुक्रवार तक इसका भाव बढ़कर 1,51,985 रुपये पहुंच गया।
यानी महज पांच कारोबारी दिनों में सोना करीब 8,609 रुपये प्रति 10 ग्राम महंगा हो गया। अब सोमवार के 1,52,020 रुपये के भाव से तुलना करें तो 31 जुलाई के मुकाबले सोने की कीमत में करीब 8,644 रुपये प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी हो चुकी है।
इस तेजी ने उन निवेशकों को खासा उत्साहित किया है, जिन्होंने पहले से सोने में निवेश कर रखा है। वहीं दूसरी तरफ नए खरीदारों के सामने यह सवाल खड़ा है कि इतनी तेजी के बाद अभी खरीदारी करना सही रहेगा या कुछ समय इंतजार करना बेहतर होगा।
चांदी में ₹2,264 का उछाल, भाव 2.33 लाख के पार
सोने के साथ-साथ चांदी ने भी सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। MCX पर सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2,33,730 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई। इसमें करीब 2,264 रुपये यानी 0.98 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
कारोबार के दौरान चांदी ने 2,33,837 रुपये प्रति किलो का ऊपरी स्तर और 2,31,660 रुपये का निचला स्तर छुआ। यानी चांदी में भी कारोबार के दौरान अच्छी मजबूती देखने को मिली।
चांदी की तेजी को खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसकी कीमतों में हाल के दिनों में सोने की तुलना में भी तेज उछाल देखने को मिला है।
पांच दिन में चांदी ₹15 हजार से ज्यादा महंगी
चांदी के हालिया प्रदर्शन पर नजर डालें तो तेजी और भी साफ दिखाई देती है। 31 जुलाई को MCX पर चांदी का भाव 2,18,295 रुपये प्रति किलो था। पिछले शुक्रवार तक यह बढ़कर 2,31,381 रुपये प्रति किलो हो गया।
इसका मतलब है कि केवल पांच कारोबारी दिनों में चांदी करीब 13,086 रुपये प्रति किलो महंगी हो गई। वहीं सोमवार के 2,33,730 रुपये के भाव को आधार मानें तो 31 जुलाई के मुकाबले चांदी में करीब 15,435 रुपये प्रति किलो का उछाल आ चुका है।
यानी जिसने जुलाई के अंत में चांदी में निवेश किया था, उसके निवेश की कीमत में बेहद कम समय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है।
रिकॉर्ड हाई से अभी काफी नीचे है चांदी
चांदी भले ही इस समय 2.33 लाख रुपये के ऊपर कारोबार कर रही हो, लेकिन यह अभी भी अपने रिकॉर्ड हाई से काफी नीचे है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 29 जनवरी 2026 को चांदी ने 4,20,048 रुपये प्रति किलो का ऑल टाइम हाई बनाया था।
सोमवार के 2,33,730 रुपये प्रति किलो के भाव से तुलना करें तो चांदी अपने रिकॉर्ड स्तर से करीब 1,86,318 रुपये प्रति किलो नीचे है।
इस अंतर को देखकर निवेशकों के बीच यह चर्चा भी तेज हो सकती है कि क्या चांदी भविष्य में एक बार फिर अपने पुराने रिकॉर्ड स्तर की ओर बढ़ सकती है। हालांकि, कमोडिटी बाजार में कीमतों का अनुमान कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू परिस्थितियों पर निर्भर करता है और किसी भी स्तर की गारंटी नहीं दी जा सकती।
सोना-चांदी क्यों हो रहे हैं महंगे?
सोने और चांदी की कीमतों पर इस समय कई वैश्विक कारकों का असर दिखाई दे रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वहां से आने वाले मिले-जुले संकेत निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं।
आमतौर पर वैश्विक स्तर पर अनिश्चितता बढ़ने पर सोने को सुरक्षित निवेश यानी सेफ हेवन एसेट के तौर पर देखा जाता है। ऐसे समय में निवेशक जोखिम वाले बाजारों से पैसा निकालकर सोने जैसी सुरक्षित संपत्तियों की ओर रुख कर सकते हैं।
दूसरी ओर, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और अमेरिकी डॉलर में मजबूती जैसे कारक भी कीमती धातुओं के बाजार को प्रभावित कर रहे हैं। हालांकि, अगर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है तो सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की मांग में और इजाफा देखने को मिल सकता है।
चांदी पर सिर्फ निवेश मांग का ही असर नहीं पड़ता, बल्कि इसका इस्तेमाल कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए चांदी की कीमत को वैश्विक औद्योगिक मांग और आर्थिक गतिविधियों से भी दिशा मिलती है।
क्या अभी सोना-चांदी खरीदना चाहिए?
कीमतों में इतनी तेज तेजी के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अभी खरीदारी करनी चाहिए या इंतजार करना बेहतर होगा?
बाजार विशेषज्ञों का रुख फिलहाल सकारात्मक नजर आ रहा है। JM Financial Services के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रणव मेर के मुताबिक, सोने और चांदी में तेजी की मौजूदा रफ्तार आगे भी जारी रह सकती है। उनके अनुमान के अनुसार, शॉर्ट टर्म में सोना 1.57 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि चांदी 2.80 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
अगर यह अनुमान सही साबित होता है तो मौजूदा स्तर से दोनों धातुओं में और तेजी की गुंजाइश बन सकती है। लेकिन निवेशकों को यह भी समझना चाहिए कि कमोडिटी बाजार में तेजी के साथ अचानक गिरावट भी देखने को मिल सकती है।
खरीदारों के लिए क्या है सलाह?
अगर आपका उद्देश्य शादी या किसी जरूरी काम के लिए सोना खरीदना है, तो केवल कीमतों के उतार-चढ़ाव के आधार पर पूरी खरीदारी टालना हमेशा व्यावहारिक नहीं होता। ऐसे में जरूरत के हिसाब से चरणबद्ध खरीदारी की रणनीति अपनाई जा सकती है।
वहीं, अगर आप केवल निवेश के उद्देश्य से सोना या चांदी खरीदना चाहते हैं, तो एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय बाजार की चाल, वैश्विक परिस्थितियों और अपने जोखिम को ध्यान में रखना जरूरी है।
निवेशकों को यह भी याद रखना चाहिए कि विशेषज्ञों के अनुमान संभावनाओं पर आधारित होते हैं, निश्चित भविष्यवाणी नहीं। इसलिए किसी भी निवेश का फैसला अपनी वित्तीय स्थिति, निवेश अवधि और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही लेना चाहिए।
