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The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > रंग भगवा, कांग्रेस का गढ़ और मैदान में लाल टोपी का सैलाब! रायबरेली से अखिलेश यादव ने शुरू की PDA रथ यात्रा, 2027 के लिए सियासी संदेश
उत्तर प्रदेशफीचर्डराजनीति

रंग भगवा, कांग्रेस का गढ़ और मैदान में लाल टोपी का सैलाब! रायबरेली से अखिलेश यादव ने शुरू की PDA रथ यात्रा, 2027 के लिए सियासी संदेश

The Hill India News
Last updated: September 24, 2026 9:54 am
The Hill India News
Published: September 24, 2026
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रायबरेली: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गुरुवार को रायबरेली से अपनी PDA रथ यात्रा की शुरुआत कर दी। कांग्रेस के पारंपरिक प्रभाव वाले इस जिले को यात्रा की शुरुआत के लिए चुने जाने के बाद यूपी की सियासत में इसके राजनीतिक मायनों पर चर्चा तेज हो गई है। अखिलेश यादव विशेष रूप से तैयार किए गए रथ पर सवार होकर रायबरेली पहुंचे, जहां बड़ी संख्या में सपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उनका स्वागत किया।

Contents
रायबरेली से ही क्यों शुरू हुई यात्रा?रथ पर लिखा- ‘जो पीड़ित, वो PDA’हाइड्रोलिक लिफ्ट से रथ की छत पर पहुंचे अखिलेश‘हमारे रंग बढ़ रहे हैं, इसलिए भाजपा के रंग उड़ रहे हैं’राहुल लोधी के घर जाएंगे अखिलेशसपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच रायबरेली का महत्वइमरान मसूद ने क्या कहा?क्या यह 2027 के चुनावी अभियान का आगाज है?रायबरेली में दिखा सपा समर्थकों का जोश

रायबरेली में अखिलेश यादव के स्वागत के लिए कई जगह कार्यकर्ता जुटे नजर आए। चुरुआ बॉर्डर से लेकर बछरावां तक कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी और पुष्पवर्षा के साथ उनका स्वागत किया। इसके बाद अखिलेश यादव PDA रथ पर सवार हुए और रायबरेली की ओर आगे बढ़े।

इस पूरे कार्यक्रम में सपा के पारंपरिक लाल टोपी पहने कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी दिखाई दी। दूसरी ओर जिस बस को रथ का रूप दिया गया है, उसका रंग भगवा रखा गया है। यही वजह है कि रायबरेली में आज का राजनीतिक दृश्य चर्चा का विषय बन गया—रथ भगवा, कार्यकर्ताओं की पहचान लाल टोपी और यात्रा का केंद्र PDA।

रायबरेली से ही क्यों शुरू हुई यात्रा?

अखिलेश यादव की इस यात्रा की शुरुआत रायबरेली से होने को लेकर राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं हैं। रायबरेली लंबे समय से कांग्रेस के प्रभाव वाले प्रमुख क्षेत्रों में गिना जाता है और वर्तमान में लोकसभा में इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व राहुल गांधी करते हैं। ऐसे में सपा अध्यक्ष का यहां से PDA रथ के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम शुरू करना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से यह कहा गया है कि मौजूदा कार्यक्रम को सीधे तौर पर चुनावी PDA यात्रा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। पार्टी के अनुसार अखिलेश यादव का दौरा स्थानीय कार्यकर्ताओं से संवाद, पार्टी नेताओं से मुलाकात और हाल की घटनाओं के बाद कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ाने से भी जुड़ा है।

इसके बावजूद 2027 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले इतनी बड़ी राजनीतिक यात्रा का आगाज होना इसे चुनावी तैयारियों से जोड़कर देखने की वजह जरूर बन रहा है।

रथ पर लिखा- ‘जो पीड़ित, वो PDA’

अखिलेश यादव के इस विशेष रथ को खास तौर पर तैयार किया गया है। रथ पर ‘जो पीड़ित, वो PDA’ संदेश को प्रमुखता से प्रदर्शित किया गया है। समाजवादी पार्टी लंबे समय से PDA के जरिए पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और भागीदारी का मुद्दा उठाती रही है।

इस रथ पर समाजवादी आंदोलन और सामाजिक न्याय से जुड़े प्रमुख नेताओं की तस्वीरें और संदेश भी लगाए गए हैं। रिपोर्टों के अनुसार रथ को विशेष रूप से तैयार कर उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों तक पार्टी के संदेश को पहुंचाने के उद्देश्य से इस्तेमाल किया जा रहा है।

अखिलेश यादव की यात्रा में कार्यकर्ताओं की भीड़ और नारेबाजी ने माहौल को चुनावी रंग दे दिया। पार्टी समर्थकों में खासा उत्साह देखने को मिला और कई स्थानों पर उनके स्वागत की तैयारियां पहले से की गई थीं।

हाइड्रोलिक लिफ्ट से रथ की छत पर पहुंचे अखिलेश

इस रथ की एक खासियत इसकी तकनीकी व्यवस्था भी है। जिस बस को PDA रथ में बदला गया है, उसमें हाइड्रोलिक सिस्टम से लैस लिफ्ट लगाई गई है। इसके जरिए अखिलेश यादव बस के ऊपरी हिस्से तक पहुंचे और वहां से सड़क किनारे मौजूद समर्थकों का अभिवादन किया।

रथ के आगे बढ़ने के दौरान समर्थक नारे लगाते रहे। अखिलेश यादव भी हाथ हिलाकर और हाथ जोड़कर लोगों का अभिवादन स्वीकार करते नजर आए। रायबरेली में इस रोड शो जैसे माहौल ने सपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया।

‘हमारे रंग बढ़ रहे हैं, इसलिए भाजपा के रंग उड़ रहे हैं’

यात्रा के दौरान अखिलेश यादव ने भाजपा पर भी निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया पर यात्रा से जुड़े वीडियो साझा करते हुए लिखा कि ‘हमारे रंग बढ़ रहे हैं, इसीलिए भाजपा के रंग उड़ रहे हैं।’

अखिलेश यादव ने PDA की एकजुटता और बदलाव की बात भी कही। उनके बयान को सपा की आगामी राजनीतिक रणनीति के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि चुनाव अभी दूर है, लेकिन पार्टी ने संगठन और अपने सामाजिक गठजोड़ को लेकर गतिविधियां तेज कर दी हैं।

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब उत्तर प्रदेश में सभी प्रमुख राजनीतिक दल 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारियों में जुटने लगे हैं।

राहुल लोधी के घर जाएंगे अखिलेश

अखिलेश यादव के रायबरेली कार्यक्रम में हरचंदपुर से सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाना भी शामिल है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार अखिलेश यादव चुरुआ से PDA रथ पर सवार होकर रायबरेली की ओर बढ़ेंगे और इसके बाद राहुल लोधी के आवास पर पहुंचेंगे।

राहुल लोधी को रायबरेली में सपा के प्रमुख OBC नेताओं में गिना जाता है। ऐसे में अखिलेश का उनके घर जाना PDA रणनीति के संदर्भ में भी चर्चा का विषय बना हुआ है।

इसके अलावा अखिलेश यादव समाजवादी छात्रसभा से जुड़े उन कार्यकर्ताओं से भी मुलाकात करने वाले हैं, जिनका नाम 17 सितंबर को रायबरेली के फिरोज गांधी डिग्री कॉलेज में हुई झड़प के बाद सामने आया था। इस घटना के बाद सपा कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच भी विवाद की स्थिति बनी थी। रिपोर्टों के अनुसार इसी घटनाक्रम के बाद अखिलेश यादव ने रायबरेली जाने और स्थानीय कार्यकर्ताओं से मिलने की घोषणा की थी।

सपा-कांग्रेस गठबंधन के बीच रायबरेली का महत्व

अखिलेश यादव का रायबरेली से यात्रा शुरू करना सपा और कांग्रेस के संबंधों के संदर्भ में भी चर्चा में है। दोनों दलों ने हाल के चुनावों में साथ काम किया है और 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर गठबंधन की संभावनाओं पर राजनीतिक चर्चा जारी है।

रायबरेली कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र रहा है। ऐसे में इसी जिले से समाजवादी पार्टी की बड़ी राजनीतिक गतिविधि शुरू होना स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित कर रहा है।

कुछ राजनीतिक विश्लेषणों में इसे आगामी सीट बंटवारे और दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रभाव के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हालांकि सीटों के बंटवारे को लेकर अंतिम तस्वीर अभी सामने नहीं आई है, इसलिए इस यात्रा को किसी निश्चित सीट-समझौते का संकेत मानना जल्दबाजी होगी।

इमरान मसूद ने क्या कहा?

अखिलेश यादव की रायबरेली यात्रा पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश यादव वहां से यात्रा कर रहे हैं तो इसके राजनीतिक अर्थ को समझना चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी और अखिलेश यादव के संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि जब राहुल गांधी का हाथ उनके हाथ में है तो चिंता की कोई वजह नहीं है।

उनका यह बयान दोनों दलों के बीच सहयोग की संभावनाओं के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि अलग-अलग नेताओं की ओर से सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर समय-समय पर अलग-अलग बयान सामने आते रहे हैं।

क्या यह 2027 के चुनावी अभियान का आगाज है?

समाजवादी पार्टी इसे अभी सीधे चुनावी अभियान के रूप में परिभाषित करने से बच रही है, लेकिन समय और राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस यात्रा का चुनावी महत्व स्पष्ट रूप से चर्चा में है।

2027 के विधानसभा चुनाव में अभी कुछ महीने बाकी हैं। ऐसे में अखिलेश यादव का विशेष रथ तैयार कर एक महत्वपूर्ण राजनीतिक जिले से यात्रा शुरू करना पार्टी के संगठनात्मक और जनसंपर्क अभियान की दिशा को दर्शाता है। AajTak की रिपोर्ट के अनुसार पार्टी इसे चुनावी PDA यात्रा नहीं बता रही है, जबकि अन्य रिपोर्टों में इसे 2027 के लिए पार्टी की आउटरीच रणनीति से जोड़ा गया है।

रायबरेली से शुरू हुई यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सपा अपने PDA सामाजिक समीकरण को लगातार राजनीतिक विमर्श के केंद्र में रख रही है। यात्रा के दौरान अखिलेश यादव का फोकस कार्यकर्ताओं से संपर्क, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समूहों के बीच पार्टी की पहुंच बढ़ाने पर दिखाई दे रहा है।

रायबरेली में दिखा सपा समर्थकों का जोश

अखिलेश यादव के पहुंचने से पहले ही रायबरेली में पोस्टर और होर्डिंग लगाए गए थे। उनके स्वागत के लिए कार्यकर्ता अलग-अलग स्थानों पर मौजूद रहे। चुरुआ से बछरावां तक स्वागत कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में लोग जुटे। कई जगह पुष्पवर्षा की तैयारी भी की गई थी।

अब इस यात्रा के जरिए सपा अपने संदेश को रायबरेली से आगे उत्तर प्रदेश के दूसरे हिस्सों तक ले जाने की तैयारी में है। PDA की राजनीति, संगठन की सक्रियता और विपक्षी गठबंधन के बीच तालमेल—इन तीनों मोर्चों पर आने वाले महीनों में पार्टी की रणनीति पर नजर रहेगी।

फिलहाल रायबरेली से शुरू हुई PDA रथ यात्रा ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले हलचल जरूर बढ़ा दी है। लाल टोपी पहने कार्यकर्ताओं की भीड़, विशेष रूप से तैयार PDA रथ और अखिलेश यादव के राजनीतिक संदेश ने जिले में चुनावी चर्चा को तेज कर दिया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह जनसंपर्क अभियान आने वाले महीनों में किस तरह आगे बढ़ता है और सपा इसे प्रदेश के अन्य क्षेत्रों तक किस रूप में ले जाती है।

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