By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: उत्तराखंड में ‘फायर सीजन’ की दस्तक: वनाग्नि से निपटने को 20 विभागों का महाप्लान; फायर लाइन के लिए हटाए जाएंगे पेड़
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > उत्तराखंड में ‘फायर सीजन’ की दस्तक: वनाग्नि से निपटने को 20 विभागों का महाप्लान; फायर लाइन के लिए हटाए जाएंगे पेड़
उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में ‘फायर सीजन’ की दस्तक: वनाग्नि से निपटने को 20 विभागों का महाप्लान; फायर लाइन के लिए हटाए जाएंगे पेड़

The Hill India News
Last updated: February 9, 2026 3:17 am
The Hill India News
Published: February 9, 2026
Share
SHARE

देहरादून | देवभूमि उत्तराखंड के बेशकीमती जंगलों को धधकने से बचाने के लिए सरकार और वन विभाग ने अपनी कमर कस ली है। हर साल की तरह इस बार भी 15 फरवरी से 15 जून तक की अवधि को ‘फॉरेस्ट फायर सीजन’ घोषित किया गया है। आगामी चार महीने राज्य की जैव विविधता और वन संपदा के लिए बेहद संवेदनशील रहने वाले हैं। इस बार विभाग की रणनीति न केवल बचाव की है, बल्कि सुरक्षा के लिए ‘आक्रामक’ कदम उठाने की भी है, जिसके तहत राज्यभर में 13 हजार किलोमीटर लंबी फायर लाइन (Fire Line) को सुव्यवस्थित किया जा रहा है।

Contents
फायर लाइन का सुदृढ़ीकरण: सुरक्षा बनाम पर्यावरण का सवाल?20 विभागों का साझा ‘कवच’: सामूहिक जिम्मेदारी की नई पहलतकनीक का ‘प्रहार’: ड्रोन और सैटेलाइट से होगी निगरानीग्राउंड फोर्स का मनोबल: बीमा और सुरक्षा उपकरणवनाग्नि: उत्तराखंड की एक पुरानी चुनौती

फायर लाइन का सुदृढ़ीकरण: सुरक्षा बनाम पर्यावरण का सवाल?

वनाग्नि को एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने से रोकने के लिए ‘फायर लाइन’ सबसे कारगर हथियार मानी जाती है। यह जंगल के भीतर एक ऐसी खाली पट्टी होती है जहाँ पेड़-पौधे और सूखी पत्तियां नहीं होतीं।

  • पेड़ों की छंटान: वन विभाग ने इस बार करीब 13,000 किलोमीटर क्षेत्र में फायर लाइन को दुरुस्त करने का लक्ष्य रखा है। विभाग का कहना है कि वर्षों से रखरखाव न होने के कारण कई पुरानी फायर लाइन झाड़ियों और पेड़ों से भर चुकी हैं।

  • चिन्हीकरण: फायर लाइन को चौड़ा करने के लिए बड़ी संख्या में हरे पेड़ों को चिन्हित किया गया है। विभाग के अनुसार, इन पेड़ों को हटाना ‘मजबूरी’ है ताकि आग लगने की स्थिति में उसे एक सीमित दायरे में रोका जा सके। हालांकि, विभाग ने स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं पेड़ों को काटा जाएगा जो सुरक्षा मानकों में बाधा डाल रहे हैं।

20 विभागों का साझा ‘कवच’: सामूहिक जिम्मेदारी की नई पहल

इस साल की तैयारियों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वन विभाग अब अकेले इस मोर्चे पर नहीं है। सरकार ने ‘इंटर-डिपार्टमेंटल को-ऑर्डिनेशन’ यानी अंतर-विभागीय समन्वय का एक नया मॉडल तैयार किया है। इस अभियान से 20 से अधिक विभागों को जोड़ा गया है:

  1. आपदा प्रबंधन और पुलिस: त्वरित कार्रवाई और जनहानि रोकने के लिए।

  2. राजस्व और ग्रामीण विकास: स्थानीय ग्रामीणों के साथ तालमेल बिठाने के लिए।

  3. स्वास्थ्य और ऊर्जा: आपात स्थिति में उपचार और बिजली लाइनों से लगने वाली आग पर नियंत्रण हेतु।

इस रणनीति को परखने के लिए आगामी 13 फरवरी को राज्य स्तर पर एक ‘मगा मॉक ड्रिल’ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें सभी विभागों की सक्रियता और प्रतिक्रिया समय (Response Time) को मापा जाएगा।

तकनीक का ‘प्रहार’: ड्रोन और सैटेलाइट से होगी निगरानी

पुरानी पद्धतियों के साथ-साथ इस बार आधुनिक तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

  • रियल टाइम अलर्ट: भारतीय वन सर्वेक्षण (FSI) के सैटेलाइट डेटा का उपयोग कर आग लगने के 15-20 मिनट के भीतर संबंधित फॉरेस्ट गार्ड को अलर्ट भेजा जाएगा।

  • ड्रोन सर्विलांस: संवेदनशील और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में ड्रोन के जरिए निगरानी की जाएगी ताकि समय रहते ‘धुएं’ का पता लगाया जा सके।

  • बजट की उपलब्धता: वनाग्नि प्रबंधन के लिए इस बार धन की कमी आड़े नहीं आएगी। राज्य सरकार ने आपदा मद और विभागीय बजट से सभी डिवीजनों को उनकी मांग के अनुरूप अग्रिम धनराशि जारी कर दी है।

[Image showing satellite thermal imaging for forest fire detection]

ग्राउंड फोर्स का मनोबल: बीमा और सुरक्षा उपकरण

जंगल की आग से सीधे जूझने वाले फील्ड स्टाफ के लिए इस बार विशेष प्रावधान किए गए हैं।

  • बीमा कवच: खतरनाक परिस्थितियों में काम करने वाले कर्मियों को स्वास्थ्य और जीवन बीमा का लाभ दिया जा रहा है।

  • सुरक्षा किट: कर्मचारियों को फायर रेजिस्टेंट सूट, आधुनिक रेक-हो (Rake-hoe) और अन्य सुरक्षा उपकरणों से लैस किया जा रहा है।

  • अस्थायी भर्ती: सीजन के दौरान संवेदनशील ‘क्रिटिकल स्पॉट्स’ पर अतिरिक्त फायर वाचर तैनात किए जा रहे हैं।

वनाग्नि: उत्तराखंड की एक पुरानी चुनौती

उत्तराखंड में लाखों हेक्टेयर वन क्षेत्र हर साल आग की चपेट में आता है। चीड़ के जंगलों में गिरने वाली सूखी पत्तियां (पिरुल) ईंधन का काम करती हैं, जो तेज हवाओं के साथ मिलकर विकराल रूप धारण कर लेती हैं। राष्ट्रीय स्तर पर भी उत्तराखंड के जंगलों की आग चिंता का विषय रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार विभाग की ‘आक्रामक’ तैयारी और जनसहभागिता ही इस संकट को कम कर सकती है।

15 फरवरी से शुरू हो रहा यह अग्नि-इम्तिहान न केवल वन विभाग बल्कि पूरे प्रशासन के लिए एक चुनौती है। जहाँ एक ओर फायर लाइन बनाने के लिए पेड़ों की कटाई पर कुछ सवाल उठ सकते हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों हेक्टेयर वन को राख होने से बचाने के लिए विभाग इसे अनिवार्य कदम बता रहा है। 13 फरवरी की मॉक ड्रिल यह स्पष्ट कर देगी कि उत्तराखंड इस बार वनाग्नि से लड़ने के लिए कितना तैयार है।

You Might Also Like

उत्तराखंड: उत्तराखंड में बिजली दरों पर ब्रेक, नियामक आयोग ने 2026-27 के लिए बढ़ोतरी प्रस्ताव किया खारिज, उपभोक्ताओं को बड़ी राहत
राष्ट्रीय खेल दिवस पर मुख्यमंत्री धामी ने खिलाड़ियों को दी बड़ी सौगात
Winter Session of Parliament: आज से शुरू हो रहा संसद का शीतकालीन सत्र, कई विधयेक होंगे पेश
स्वामी प्रसाद मौर्य की बयानबाजी से मचा घमासान, समाजवादी पार्टी के नेताओं की बड़ी टेंशन
“अजित पवार एक सच्चे जननेता थे”: PM मोदी ने शरद पवार को फोन कर जताया शोक, बारामती हादसे से देश स्तब्ध
TAGGED:Fire Line UttarakhandForest Fire Mock DrillForest Fire Prevention MasterplanUttarakhand Forest Department PreparationUttarakhand Forest Fire Season 2026
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

‘बम-बम भोले’ के जयघोष के बीच अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हुआ चौथा जत्था, प्रशासन ने जारी की अहम गाइडलाइन

The Hill India News
The Hill India News
July 5, 2026
Uttarakhand: नीट पेपर लीक विवाद के बीच देहरादून की होनहार रिया थापा की मौत, सड़कों पर उतरा कांग्रेस का जनआक्रोश
दिल्ली दंगा मामला 2020: उमर खालिद और शरजील इमाम को कड़कड़डूमा कोर्ट से बड़ा झटका, दूसरी बार जमानत याचिका खारिज
इतिहास रच गया बालक: 15 साल के वैभव सूर्यवंशी ने किया डेब्यू, तोड़ डाला महान सचिन तेंदुलकर का 37 साल पुराना ‘विराट’ रिकॉर्ड
सेवा, सुशासन और समर्पण का महाकुंभ बना ‘सेवा पखवाड़ा’; ऋषिकेश में उमड़ा 20 हजार लोगों का सैलाब, युवाओं को मिला जापान का टिकट
बदरीनाथ धाम में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितता पर BKTC सख्त; 4 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित, हड़कंप
एमपी का ‘घोस्ट हॉस्पिटल’: इंदौर में ज़मीन पर ईंट तक नहीं रखी, लेकिन सरकारी पोर्टल पर सालों से चल रही है डॉक्टरों की ट्रांसफर-पोस्टिंग
समुद्र तल से 3,680 मीटर ऊपर ‘तृतीय केदार’ तुंगनाथ धाम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, टूट गए पिछले सारे रिकॉर्ड
सोशल मीडिया का चश्मा और कानून के हाथ: देहरादून में लाखों के हीरे की चोरी का वो अनसुना किस्सा, जिसे एक ‘इंस्टाग्राम रील’ ने बेपर्दा कर दिया
यूपी का बड़ा भूमि घोटाला: संभल में गंगा किनारे की 1144 बीघा सरकारी जमीन माफियाओं के हवाले, पूर्व SDM और वकील समेत 6 गिरफ्तार
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?