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बदरीनाथ धाम में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितता पर BKTC सख्त; 4 सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित, हड़कंप

The Hill India News
Last updated: July 4, 2026 1:33 pm
The Hill India News
Published: July 4, 2026
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फाइल फ़ोटो
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देहरादून / ऋषिकेश: सनातन धर्म के सर्वोच्च केंद्रों में से एक और देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के प्रतीक भू-वैकुंठ श्री बदरीनाथ धाम से एक बेहद संवेदनशील और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। बदरीनाथ मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं (Financial Irregularities) के आरोपों को बदरी-केदार मंदिर समिति (BKTC) ने अत्यंत गंभीरता से लिया है। आस्था के इस पावन केंद्र की शुचिता और पारदर्शिता पर उठे गंभीर सवालों के बीच, मंदिर समिति ने त्वरित कार्रवाई करते हुए पूरे प्रकरण की परतें खोलने के लिए एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय विशेष जांच समिति का गठन कर दिया है।

Contents
जांच समिति में शामिल हैं विभाग के ये शीर्ष अधिकारीक्या है पूरा विवाद और कैसे फूटा यह मामला?BKTC अध्यक्ष का सख्त रुख: “दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा”पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा और आगे की राह

यह प्रशासनिक कदम सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर जनता व तीर्थ पुरोहितों के बीच उपजे असंतोष को शांत करने और मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है। बदरी-केदार मंदिर समिति से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे Badrinath Temple Theft Case की गहन और बिंदुवार जांच बीकेटीसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) सोहन रांगड़ के सीधे निर्देशन में संचालित की जाएगी। समिति को सख्त हिदायत दी गई है कि वे तय समय सीमा के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें ताकि दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जा सके।

जांच समिति में शामिल हैं विभाग के ये शीर्ष अधिकारी

मामले की संवेदनशीलता, तकनीकी जटिलताओं और वित्तीय पहलुओं को देखते हुए इस जांच दल में प्रशासनिक, कानूनी और वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। चार सदस्यीय इस विशेष टीम में निम्नलिखित अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है:

  1. शिशुपाल सिंह बर्तवाल (विधि अधिकारी): यह पूरे मामले के कानूनी पहलुओं, मंदिर नियमावली के उल्लंघन और भविष्य में होने वाली कानूनी कार्रवाई की रूपरेखा तय करेंगे।

  2. हेम कांडपाल (वित्त नियंत्रक): चढ़ावे से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों, ऑडिट रिपोर्ट और कथित वित्तीय हेरफेर के तकनीकी साक्ष्यों की बारीक पड़ताल इनके जिम्मे होगी।

  3. राजन नैथानी (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी): यह मंदिर प्रबंधन के भीतर प्रशासनिक खामियों और सुरक्षा प्रोटोकॉल की चूक की जांच करेंगे।

  4. डबर सिंह भुजवान (प्रभारी अधिकारी, केदारनाथ): इन्हें जमीनी हकीकत और फील्ड स्तर पर कर्मचारियों की कार्यप्रणाली के मूल्यांकन के लिए पैनल में रखा गया है।

बीकेटीसी प्रबंधन के अनुसार, ये चारों शीर्ष अधिकारी एक संयुक्त पैनल के रूप में काम करेंगे और अपनी जांच के दौरान मिले हर एक इनपुट, गवाहों के बयान और सीसीटीवी फुटेज की समीक्षा कर सीधे सीईओ को अपनी गोपनीय रिपोर्ट प्रेषित करेंगे।

क्या है पूरा विवाद और कैसे फूटा यह मामला?

इस पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब धार्मिक और सामाजिक संगठन ‘भैरव सेना’ के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने बदरी-केदार मंदिर समिति के एक अंदरूनी कर्मचारी पर मंदिर परिसर के भीतर ही चोरी करने और चढ़ावे की राशि में वित्तीय हेराफेरी करने का सनसनीखेज आरोप लगाया। संदीप खत्री का दावा है कि उन्हें पुख्ता सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि यह कोई सामान्य भूल नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश है, जिसके तहत मंदिर के चढ़ावे और दान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।

शिकायतकर्ता ने अपने आरोपों में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला दावा यह किया है कि चोरी की यह पूरी कथित घटना मंदिर परिसर में सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी (CCTV) कैमरों में भी कैद हुई है। इस सीसीटीवी फुटेज के अस्तित्व की बात सामने आने के बाद से ही तीर्थ पुरोहितों, स्थानीय हक-हकूकधारियों और आम श्रद्धालुओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। भैरव सेना के अध्यक्ष ने इस संबंध में साक्ष्यों के साथ बीकेटीसी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी को एक आधिकारिक पत्र लिखकर त्वरित जांच और दोषी कर्मचारी की तत्काल बर्खास्तगी व गिरफ्तारी की मांग की थी।

BKTC अध्यक्ष का सख्त रुख: “दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा”

जैसे ही यह मामला मुख्यधारा के मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की सुर्खियों में आया, बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने तुरंत मोर्चा संभाला। 3 जुलाई को जारी अपने एक आधिकारिक बयान में अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि आस्था के इस पावन मंदिर में किसी भी प्रकार का भ्रष्टाचार, लापरवाही या अनैतिक कार्य कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा, “यह मामला सीधे तौर पर भगवान बदरी विशाल के चरणों में अर्पित होने वाले श्रद्धालुओं के दान और उनकी अटूट धार्मिक भावनाओं से जुड़ा है। मामला संज्ञान में आते ही मैंने स्वयं इसकी उच्च स्तरीय जांच के निर्देश दिए थे।”

अध्यक्ष ने मीडिया के माध्यम से जनता और श्रद्धालुओं को आश्वस्त करते हुए साफ तौर पर चेतावनी दी है कि जांच समिति की रिपोर्ट में यदि मंदिर समिति का कोई भी छोटा या बड़ा कर्मचारी, अथवा कोई भी बाहरी व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ बिना किसी ढिलाई के सख्त से सख्त कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर पुलिस में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराकर सख्त कानूनी धाराएं भी लगवाई जाएंगी।

पारदर्शिता की अग्निपरीक्षा और आगे की राह

आज, 4 जुलाई को आधिकारिक तौर पर समिति गठन के आदेश जारी होने के बाद से ही बदरीनाथ और केदारनाथ दोनों धामों के प्रशासनिक हलकों में खलबली मची हुई है। चूंकि Badrinath Temple Theft Case अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है, इसलिए मंदिर प्रशासन पर इस जांच को पूरी तरह से पारदर्शी और निष्पक्ष रखने का भारी दबाव है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चार सदस्यीय इस कमेटी में वित्त नियंत्रक और विधि अधिकारी की मौजूदगी यह सुनिश्चित करेगी कि वित्तीय ऑडिट के साथ-साथ कानूनी साक्ष्य भी मजबूती से जुटाए जाएं, ताकि कोर्ट में मामला जाने पर विभाग का पक्ष कमजोर न पड़े। सीईओ सोहन रांगड़ की सीधी निगरानी होने के कारण उम्मीद जताई जा रही है कि अगले कुछ ही दिनों में सीसीटीवी फुटेज की फॉरेंसिक और तकनीकी जांच पूरी कर ली जाएगी और सच सबके सामने होगा। फिलहाल, देवभूमि के तमाम श्रद्धालु और स्थानीय संगठन इस जांच समिति की रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि इस पावन धाम की गरिमा पर लगा दाग साफ हो सके।

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