देहरादून, 3 जुलाई। उत्तराखंड के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य की कमान संभालने वाली आंगनबाड़ी व्यवस्था को लेकर धामी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग में लंबे समय से खाली चल रहे पदों को भरने के लिए सरकार ने हरी झंडी दे दी है। विभागीय मंत्री रेखा आर्या ने विधानसभा स्थित सभागार कक्ष में अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी स्तर पर स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती प्रक्रिया को बिना किसी देरी के समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए।
इस बैठक में न केवल रोजगार के नए अवसरों को लेकर चर्चा हुई, बल्कि नौनिहालों के स्वास्थ्य, डिजिटल गवर्नेंस और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर भी कई कड़े फैसले लिए गए।
बेरोजगार युवाओं के लिए बड़ी सौगात: 3,211 पदों पर नियुक्तियां
राज्य के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग को लंबे समय से कर्मचारियों की कमी का सामना करना पड़ रहा था, जिससे जमीनी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में दिक्कतें आ रही थीं। समीक्षा बैठक के दौरान मंत्री रेखा आर्या ने इन रिक्तियों पर चिंता व्यक्त की और अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का आदेश दिया।
पदों का विवरण इस प्रकार है:
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आंगनबाड़ी कार्यकत्री (Workers): 438 पद
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आंगनबाड़ी सहायिका (Helpers): 2,773 पद
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कुल रिक्तियां: 3,211 पद
मंत्री ने कहा कि इन रिक्त पदों के भर जाने से न केवल हजारों महिलाओं को रोजगार मिलेगा, बल्कि आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन और उनकी कार्यप्रणाली में अभूतपूर्व सुधार देखने को मिलेगा। इस उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती को पूरी तरह से पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए जिला स्तर के अधिकारियों को विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कुपोषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’: हर महीने तौलेगा नौनिहालों का वजन
बैठक में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर मंत्री रेखा आर्या का बेहद संवेदनशील रूप देखने को मिला। उन्होंने कहा कि पहाड़ के बच्चों का स्वास्थ्य हमारी पहली प्राथमिकता है। आंगनबाड़ी सेवाओं की समीक्षा के दौरान उन्होंने कड़े निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत बच्चों का हर महीने अनिवार्य रूप से वजन तौला जाए।
इस कवायद का मुख्य उद्देश्य राज्य में कुपोषित (Malnourished) और अतिकुपोषित (Severely Acute Malnourished) बच्चों की सटीक पहचान करना है। समय पर सही डेटा मिलने से इन बच्चों को केंद्र और राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विशेष पोषाहार योजनाओं का लाभ दिया जा सकेगा, ताकि उन्हें जल्द से जल्द स्वस्थ बच्चों की श्रेणी में लाया जा सके। मंत्री ने साफ लहजे में चेतावनी दी कि बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े इस बेहद संवेदनशील कार्य में किसी भी स्तर पर हीला-हवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
डिजिटल गवर्नेंस: एफआरएस ट्रैकर और बजट का सीधा कनेक्शन
प्रशासनिक पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए बैठक में तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया गया। टेक होम राशन (THR) यानी वितरित किए जाने वाले पोषाहार की व्यवस्था को पारदर्शी बनाने के लिए सरकार फेशियल रिकॉग्निशन सिस्टम (FRS) का उपयोग कर रही है।
मंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पोषाहार वितरण से जुड़ा शत-प्रतिशत डेटा एफआरएस ट्रैकर में अनिवार्य रूप से फीड किया जाए। डिजिटल रिकॉर्ड दुरुस्त रहने से न केवल कालाबाजारी पर रोक लगेगी, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्तराखंड का प्रदर्शन बेहतर होगा। इसके फलस्वरूप, केंद्र सरकार से विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए मिलने वाले बजट को समय पर और समुचित मात्रा में जारी कराने में मदद मिलेगी।
चुनाव ड्यूटी और केंद्र संचालन में बनाना होगा संतुलन
वर्तमान में भारत निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के चलते कई आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की ड्यूटी निर्वाचन संबंधी कार्यों में लगी हुई है। बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि इस व्यस्तता के कारण कई क्षेत्रों में आंगनबाड़ी केंद्र बंद मिल रहे हैं या वहां विभागीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
इस समस्या का व्यावहारिक समाधान निकालते हुए मंत्री रेखा आर्या ने जिला स्तरीय अधिकारियों को पत्राचार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि चुनाव ड्यूटी महत्वपूर्ण है, लेकिन बच्चों का भविष्य और उनका पोषण भी उतना ही जरूरी है। इसलिए सभी आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां कार्य दिवसों में कम से कम एक घंटा अनिवार्य रूप से अपने मूल केंद्र पर उपस्थित रहेंगी और जरूरी विभागीय कार्यों का संपादन करेंगी।
एक महीने का अल्टीमेटम: बच्चों के बनेंगे डिजिटल पहचान पत्र
पहाड़ के बच्चों को डिजिटल इंडिया की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विभाग ने एक बड़ी समयसीमा तय कर दी है। सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों (DPOs) को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत 3 से 6 वर्ष की आयु के सभी बच्चों के डिजिटल हेल्थ आईडी (आभा आईडी) और आवश्यक पहचान पत्र (दस्तावेज) एक महीने के भीतर अनिवार्य रूप से बनवाए जाएं।
इससे बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा का एक सेंट्रलाइज्ड डेटा तैयार हो सकेगा, जो भविष्य में उनके विकास और सरकारी योजनाओं के सीधे हस्तांतरण (DBT) में मददगार साबित होगा।
लापरवाही पर होगी सीधे बर्खास्तगी और सख्त कार्रवाई
बैठक के समापन पर कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या ने शासन और जिला स्तर के अधिकारियों व कर्मचारियों को अपनी कार्यशैली में सुधार लाने की अंतिम चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा बहुत साफ है—योजनाओं का लाभ हर हाल में अंतिम छोर पर बैठे पात्र लाभार्थी तक पहुंचना चाहिए।
उन्होंने कड़े शब्दों में कहा:
“अगर किसी भी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही की वजह से जनता को परेशानी होती है या योजनाओं के क्रियान्वयन में ढिलाई पाई जाती है, तो उनके खिलाफ कठोरतम अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जनसेवा के काम में शिथिलता के लिए विभाग में कोई जगह नहीं है।”
इस बैठक में विभाग के तमाम उच्च अधिकारी, निदेशक और जिला कार्यक्रम अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने मंत्री द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों को तय समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारने का संकल्प लिया। निश्चित रूप से, उत्तराखंड आंगनबाड़ी भर्ती और इन कड़े प्रशासनिक सुधारों से आने वाले दिनों में राज्य के महिला एवं बाल विकास की तस्वीर बदली हुई नजर आएगी।
