सफाई व्यवस्था ठप कर नगर निगम में प्रदर्शन, रामपुर-हल्द्वानी हाईवे पर लगाया जाम; पुलिस-प्रशासन ने संभाला मोर्चा, दोपहर बाद कोतवाली पहुंचा सैकड़ों लोगों का हुजूम
रुद्रपुर: उधम सिंह नगर के रुद्रपुर में भाजपा नेता और उनके भाई के खिलाफ दर्ज मुकदमे में गिरफ्तारी की मांग को लेकर वाल्मीकि समाज का आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को मामला उस समय और गरमा गया, जब बड़ी संख्या में वाल्मीकि समाज के लोग नगर निगम परिसर में एकत्र हुए और सफाई कार्य का बहिष्कार करते हुए पुलिस-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने नामजद आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी की मांग को लेकर जमकर नारेबाजी की। कुछ ही देर में विरोध प्रदर्शन सड़क तक पहुंच गया और रामपुर-हल्द्वानी हाईवे पर भी जाम की स्थिति पैदा हो गई।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मामले में नामजद भाजपा मंडल महामंत्री पारस चुघ और उनके भाई सन्नी चुघ की गिरफ्तारी जल्द से जल्द होनी चाहिए। वाल्मीकि समाज ने चेतावनी दी है कि यदि पुलिस ने तय समय के भीतर कार्रवाई नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। दोपहर दो बजे तक गिरफ्तारी नहीं होने के बाद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रुद्रपुर कोतवाली की ओर पहुंच गए और कोतवाली घेराव तथा सड़क जाम करने की तैयारी शुरू कर दी।
सफाई कर्मचारियों ने किया काम का बहिष्कार
मामले को लेकर सोमवार को वाल्मीकि समाज के लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली। बड़ी संख्या में समाज के लोग नगर निगम परिसर में पहुंचे। इनमें महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग करते हुए सफाई कार्य का बहिष्कार कर दिया। इससे शहर की सफाई व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका पैदा हो गई।
प्रदर्शन के दौरान लोगों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कहा कि जब तक मामले में नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि घटना के बाद मुकदमा दर्ज होने के बावजूद गिरफ्तारी नहीं होने से समाज में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन के सामने अपनी मांग स्पष्ट रूप से रख दी है। उनका कहना है कि यदि पुलिस कानून के तहत कार्रवाई कर रही है तो नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी क्यों हो रही है।
स्कूटी को टक्कर के बाद शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, पूरा मामला 9 अगस्त को स्कूटी को टक्कर लगने के बाद हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोप है कि इस विवाद ने बाद में मारपीट का रूप ले लिया। पीड़ित पक्ष की ओर से पुलिस को दी गई तहरीर के आधार पर भाजपा मंडल महामंत्री पारस चुघ और उनके भाई सन्नी चुघ के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया गया है।
पीड़ित पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया है कि विवाद के दौरान डंडों और लोहे की रॉड से हमला किया गया, जिसमें तीन लोग घायल हुए। घायलों का उपचार चल रहा है। मामले में जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यही वजह है कि गिरफ्तारी की मांग को लेकर वाल्मीकि समाज ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।
हाईवे पर पहुंचा प्रदर्शन, कुछ देर के लिए लगा जाम
नगर निगम परिसर में प्रदर्शन के बाद बड़ी संख्या में लोग रामपुर-हल्द्वानी हाईवे की ओर बढ़ गए। देखते ही देखते सड़क पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और यातायात प्रभावित होने लगा। प्रदर्शनकारियों ने कुछ समय के लिए हाईवे पर जाम लगा दिया।
हाईवे पर जाम की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया। ट्रांजिट कैंप कोतवाली, पंतनगर थाना और दिनेशपुर थाना से पुलिस बल मौके पर पहुंचा। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की और उन्हें सड़क से हटाने का प्रयास किया। काफी समझाने के बाद प्रदर्शनकारियों को सड़क से हटाया गया और हाईवे पर यातायात व्यवस्था बहाल कराई गई।
इसके बाद प्रदर्शनकारी दोबारा नगर निगम परिसर में पहुंचे और धरने पर बैठ गए। मौके पर प्रभारी सीओ अखिलेश कुमार सिंह भी पहुंचे। पुलिस और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत हुई। प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को समझाने और मामले में नियमानुसार कार्रवाई का भरोसा दिया गया।
दो बजे तक गिरफ्तारी की मांग, फिर कोतवाली की ओर कूच
प्रदर्शनकारियों के मुताबिक, पुलिस प्रशासन की ओर से उन्हें दोपहर दो बजे तक का समय मांगा गया था। समाज के लोगों ने स्पष्ट किया था कि यदि तय समय तक नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो वे रुद्रपुर कोतवाली का घेराव करेंगे।
दोपहर दो बजे के बाद जब गिरफ्तारी नहीं होने की बात सामने आई तो प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में कोतवाली की ओर बढ़ने लगे। सैकड़ों लोगों के कोतवाली पहुंचने से पुलिस-प्रशासन की चिंता बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों की ओर से सड़क जाम करने की तैयारी की सूचना के बाद पुलिस बल की तैनाती बढ़ाई गई।
फिलहाल प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी तरह के टकराव को रोकना है। पुलिस अधिकारियों की ओर से प्रदर्शनकारियों से लगातार बातचीत की जा रही है।
पुलिस बोली- मुकदमा दर्ज है, जांच जारी
इस मामले में पुलिस का कहना है कि शिकायत के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जा चुका है और पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। इससे पहले सीओ प्रभारी रुद्रपुर प्रशांत कुमार ने कहा था कि घटना के संबंध में पुलिस को तहरीर प्राप्त हुई थी। तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज करते हुए पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुलिस की ओर से यह भी कहा गया है कि कोतवाली का घेराव करने पहुंचे लोगों से बातचीत की गई है और मामले में कानून के अनुसार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस का रुख साफ है कि जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक भी सामने आए
मामले ने राजनीतिक रंग भी लेना शुरू कर दिया है। पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल ने कोतवाली पहुंचकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की और उन्हें न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
वहीं रुद्रपुर विधायक शिव सिंह अरोड़ा ने भी मामले को लेकर कहा कि कानून अपना काम करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध करने वाला व्यक्ति चाहे किसी भी राजनीतिक दल या वर्ग से जुड़ा हो, उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में सरकार चल रही है और किसी भी तरह की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उनका कहना है कि सरकार किसी अपराधी को संरक्षण नहीं देगी और कानून के मुताबिक कार्रवाई होगी।
आंदोलन से शहर की व्यवस्था पर भी असर की आशंका
वाल्मीकि समाज के सफाई कार्य के बहिष्कार और सड़क पर प्रदर्शन के कारण रुद्रपुर में स्थिति संवेदनशील हो गई है। यदि आंदोलन लंबा चलता है तो इसका सीधा असर शहर की सफाई व्यवस्था और आम लोगों की आवाजाही पर पड़ सकता है। हाईवे पर जाम की स्थिति बनने से पहले ही पुलिस प्रशासन ने मोर्चा संभाल लिया है।
फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती प्रदर्शनकारियों की मांग और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना है। समाज गिरफ्तारी की मांग पर अड़ा है, जबकि पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रुद्रपुर में अब सभी की नजर इस बात पर है कि पुलिस इस मामले में आगे क्या कदम उठाती है। फिलहाल वाल्मीकि समाज ने साफ संकेत दे दिया है कि यदि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आंदोलन और बड़ा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन के लिए आने वाले घंटे बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। दूसरी ओर, पुलिस बल की तैनाती और अधिकारियों की मौजूदगी से साफ है कि प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह सतर्क है।
नोट: मामले में लगाए गए मारपीट, जातिसूचक शब्दों और अन्य आरोप फिलहाल शिकायत/एफआईआर में लगाए गए आरोप हैं। इनकी अंतिम पुष्टि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
