आरा CJM कोर्ट ने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया; 28 वर्षीय भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद से लगातार उठ रहे हैं गंभीर सवाल
पटना/आरा: बिहार के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अदालत ने सोमवार को बड़ा और सख्त आदेश जारी किया है। आरा के मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) कोर्ट ने मामले से जुड़े 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (Non-Bailable Warrant) जारी करते हुए सभी को अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने संबंधित आरोपियों को 12 अगस्त 2026 तक गिरफ्तार कर अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश दिया है।
जिन लोगों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है, उनमें तत्कालीन एसडीएम, एसडीपीओ और थानाध्यक्ष समेत कई अधिकारी और अन्य आरोपी शामिल बताए जा रहे हैं। अदालत के इस आदेश के बाद भरत तिवारी एनकाउंटर मामला एक बार फिर बिहार की सियासत और प्रशासनिक हलकों में चर्चा के केंद्र में आ गया है।
भरत तिवारी की मौत को लेकर उनके परिजन शुरू से ही पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते रहे हैं। परिवार का आरोप है कि यह कोई सामान्य पुलिस मुठभेड़ नहीं थी, बल्कि साजिश के तहत भरत तिवारी को फर्जी एनकाउंटर में मारा गया। हालांकि, इन आरोपों की अंतिम सच्चाई जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगी।
11 आरोपियों को कोर्ट में पेश करने का आदेश
CJM कोर्ट के आदेश के बाद अब मामले में नामजद 11 आरोपियों की गिरफ्तारी और उन्हें अदालत के सामने पेश करने की जिम्मेदारी पुलिस-प्रशासन पर होगी। कोर्ट ने स्पष्ट समयसीमा तय करते हुए 12 अगस्त तक सभी आरोपियों को अदालत में प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
इस सूची में प्रशासन और पुलिस से जुड़े कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। तत्कालीन एसडीएम, एसडीपीओ और थानाध्यक्ष का नाम सामने आने के कारण अदालत की यह कार्रवाई और भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
गैर-जमानती वारंट जारी होने का मतलब है कि अब आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश करने के लिए पुलिस को उनकी गिरफ्तारी की कार्रवाई करनी होगी। यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि इसमें एक युवक की पुलिस मुठभेड़ में मौत हुई थी और उसके बाद से परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है।
क्या है भरत तिवारी एनकाउंटर का मामला?
मामला भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र से जुड़ा है। 28 वर्षीय भरत तिवारी की 17 जून 2026 को एक कथित पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। बताया गया कि यह मुठभेड़ भरत तिवारी के गांव में ही हुई थी।
भरत की मौत के बाद परिवार ने पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया। परिजनों का आरोप रहा है कि भरत को साजिश के तहत निशाना बनाया गया और बाद में घटना को मुठभेड़ का रूप दिया गया।
घटना के बाद परिवार ने न्याय के लिए लगातार आवाज उठाई। मामला धीरे-धीरे स्थानीय स्तर से निकलकर राज्य की राजनीति और न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया। इस मामले में विपक्षी नेताओं के साथ-साथ सत्ता पक्ष से जुड़े कुछ नेताओं की ओर से भी सवाल उठाए गए हैं।
STF के सिपाही अक्षय कुमार की गिरफ्तारी ने बढ़ाई हलचल
इसी मामले में बिहार पुलिस ने हाल ही में STF के सिपाही अक्षय कुमार को गिरफ्तार किया था। बताया जा रहा है कि जांच के दौरान अक्षय कुमार की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल सामने आए।
सूत्रों के अनुसार, आरोप है कि भरत तिवारी पर पहली गोली अक्षय कुमार ने चलाई थी। इसके बाद कथित तौर पर अन्य लोगों ने भी फायरिंग शुरू की। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि और उनकी कानूनी स्थिति का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के तहत होना बाकी है।
अक्षय कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामले में जांच का दायरा और बढ़ गया और अब अदालत की ओर से 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया जाना इस केस में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
परिवार लगातार मांग रहा है न्याय
भरत तिवारी की मौत के बाद से उनका परिवार लगातार न्याय की मांग कर रहा है। परिवार का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की मौत की पूरी सच्चाई जानने का अधिकार है।
परिजनों के आरोपों और लगातार उठते सवालों के कारण यह मामला राजनीतिक मुद्दा भी बन गया। अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं ने भरत तिवारी के परिवार से मुलाकात कर उनकी बात सुनी।
NDA में शामिल चिराग पासवान समेत कई नेताओं ने परिवार से मुलाकात की थी। इसके अलावा हाल ही में पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से जीतने वाले प्रशांत किशोर ने भी परिजनों से मुलाकात की और मामले को लेकर उनकी चिंताओं को सुना।
इन मुलाकातों के बाद मामले को लेकर राजनीतिक दबाव और चर्चा दोनों बढ़े।
दिल्ली तक पहुंचा मामला, सुप्रीम कोर्ट का भी रुख
भरत तिवारी एनकाउंटर केस को लेकर मामला केवल बिहार तक सीमित नहीं रहा। परिवार और समर्थकों की ओर से न्याय की मांग को लेकर दिल्ली में प्रदर्शन भी किया गया। इसके अलावा मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख किए जाने की बात भी सामने आई है।
इससे साफ है कि भरत तिवारी की मौत का मामला अब एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। परिवार जहां इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बता रहा है, वहीं अब अदालत की कार्रवाई के बाद जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सभी की नजरें टिकी हैं।
अदालत के आदेश से बढ़ी प्रशासनिक हलचल
CJM कोर्ट की ओर से 11 आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अब पुलिस और प्रशासन के सामने उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर गिरफ्तार कर अदालत में पेश करने की चुनौती है।
खास बात यह है कि मामले में पुलिस और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों के नाम भी सामने आ रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई का असर केवल आरोपियों तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि पूरे पुलिस-प्रशासनिक तंत्र पर भी नजर रहेगी।
अदालत का आदेश इस बात का संकेत है कि मामले में न्यायिक प्रक्रिया अब गंभीर चरण में पहुंच चुकी है। हालांकि, किसी भी आरोपी को दोषी तब तक नहीं माना जा सकता, जब तक अदालत में आरोप साबित न हो जाएं।
अब 12 अगस्त पर टिकी निगाहें
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में अब सबसे बड़ी तारीख 12 अगस्त 2026 बन गई है। अदालत ने इसी समयसीमा के भीतर सभी 11 आरोपियों को गिरफ्तार कर पेश करने का आदेश दिया है।
अब देखना होगा कि पुलिस कितनी तेजी से वारंट की कार्रवाई करती है और अदालत के सामने आरोपियों की पेशी किस तरह होती है। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि आगे की न्यायिक प्रक्रिया में भरत तिवारी की मौत से जुड़े आरोपों और पुलिस कार्रवाई की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं।
फिलहाल, अदालत के इस आदेश ने करीब दो महीने पुराने इस मामले को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। एक ओर परिवार न्याय की लड़ाई लड़ रहा है, दूसरी ओर राजनीतिक दल अपने-अपने सवाल उठा रहे हैं और अब अदालत ने 11 आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का रास्ता खोल दिया है।
भरत तिवारी एनकाउंटर केस में आगे की जांच और सुनवाई से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि उस दिन वास्तव में क्या हुआ था और 28 वर्षीय युवक की मौत किन परिस्थितियों में हुई। फिलहाल CJM कोर्ट का गैर-जमानती वारंट और 12 अगस्त तक आरोपियों की पेशी का आदेश इस पूरे मामले का सबसे बड़ा घटनाक्रम बन गया है।
