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देहरादूनफीचर्ड

देहरादून में अवैध डॉग केयर सेंटर पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई, बिना लाइसेंस संचालित सुविधा सील

The Hill India News
Last updated: November 15, 2025 1:03 pm
The Hill India News
Published: November 15, 2025
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देहरादून, 15 नवंबर 2025। शहर में पशुओं—विशेषकर श्वानों—द्वारा काटने की बढ़ती घटनाओं पर गंभीर संज्ञान लेते हुए देहरादून जिला प्रशासन ने शुक्रवार को एक और बड़ा कदम उठाया। प्रशासन ने शिमला बाईपास रोड पर बिना लाइसेंस संचालित “बदमाश डॉग बोर्डिंग हाउस” नामक डॉग केयर सेंटर को सील कर दिया। जिलाधिकारी सविन बंसल के निर्देश पर यह कार्रवाई उप जिलाधिकारी कुमकुम जोशी और उनकी टीम द्वारा की गई।

Contents
बढ़ती डॉग-बाइट घटनाओं के बीच कड़ा प्रशासनिक रुखशिकायतों के बाद गठित की गई कमेटी की रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागरघर के भीतर मिली अव्यवस्था और अवैध पशु रखने की पुष्टिपहली मंजिल:दूसरी मंजिल:तीसरी मंजिल:कर्मचारियों का सहयोग न करना और अनुमति पत्र का अभावजिलाधिकारी के आदेश पर तत्काल सीलिंग—कानूनी कार्रवाई सुनिश्चितशहर में अगले चरण में बड़े पैमाने पर अभियानपशु कल्याण NGOs ने कार्रवाई का स्वागत कियासुरक्षित शहर और जिम्मेदार पशुपालन की दिशा में निर्णायक कदम

अवैध रूप से चल रहे इस डॉग बोर्डिंग हाउस से 10 पालतू पशु—श्वान और बिल्लियां—को सुरक्षित रूप से एनजीओ को सौंपने की तैयारी की जा रही है, जहां उनकी देखभाल के लिए उचित व्यवस्था उपलब्ध है।


बढ़ती डॉग-बाइट घटनाओं के बीच कड़ा प्रशासनिक रुख

पिछले कुछ महीनों में देहरादून शहर में श्वानों द्वारा काटने की घटनाएँ लगातार बढ़ी हैं। कई मामलों में अस्पतालों और निगम को शिकायतें दर्ज कराई गईं, जिसके बाद जिलाधिकारी ने व्यापक अभियान चलाने के आदेश दिए थे।

डीएम सविन बंसल ने कहा है कि—

“बिना लाइसेंस, अवैध रूप से संचालित पेट शॉप, केयर सेंटर और बोर्डिंग हाउस पर सख्त कार्रवाई अनिवार्य है। यह सिर्फ नियमों का मामला नहीं, बल्कि जन-सुरक्षा और पशु कल्याण दोनों से जुड़ा विषय है। ऐसे प्रतिष्ठानों पर प्रवर्तन अभियान निरंतर जारी रहेगा।”


शिकायतों के बाद गठित की गई कमेटी की रिपोर्ट में गंभीर खामियां उजागर

जिला प्रशासन को अवैध पेट शॉप, अप्रशिक्षित संचालकों और प्रतिबंधित नस्लों के श्वानों को रखने से जुड़ी कई शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इसके बाद जिलाधिकारी ने एक जांच समिति गठित कर स्थलीय निरीक्षण के आदेश दिए।

जाँच समिति जब बदमाश डॉग बोर्डिंग हाउस पहुंची, तब—

  • भवन तीन मंजिला पाया गया,
  • प्रवेश द्वार पर बोर्डिंग हाउस का बड़ा बैनर लगा था,
  • बैनर पर “Badtamaash Boarding House & Crockery” का नाम और GST नंबर लिखा था।

लेकिन समिति द्वारा मुख्य द्वार पर कई बार घंटी बजाने के बावजूद कोई उत्तर नहीं आया। यह संदेहास्पद परिस्थिति प्रशासनिक दृष्टि से गंभीर मानी गई।


घर के भीतर मिली अव्यवस्था और अवैध पशु रखने की पुष्टि

जांच अधिकारी ऊपर की मंजिलों पर पहुँचे, जहां उन्हें निम्न स्थिति मिली—

पहली मंजिल:

कोई भी पशु नहीं मिला।

दूसरी मंजिल:

  • दो पर्शियन बिल्लियाँ स्वतंत्र रूप से घूम रही थीं,
  • बालकनी में 7–8 पक्षी पाए गए, जिन्हें अंदर से तार-बाड़ कर बंद किया गया था—जो पशु कल्याण मानकों के अनुरूप नहीं है।

तीसरी मंजिल:

  • चार श्वान एक कमरे में बंद मिले। इनमें
    • एक Golden Retriever
    • और एक Pitbull शामिल था।

Pitbull को कई राज्यों में प्रतिबंधित या नियंत्रित नस्ल माना जाता है, जिसके लिए विशेष अनुमति आवश्यक होती है।

समिति ने पाया कि भवन की संरचना न तो डॉग बोर्डिंग सुविधा के मानकों को पूरा करती है और न ही उसमें पशुओं के लिए पर्याप्त रोशनी, वेंटिलेशन, स्वच्छता या सुरक्षा की व्यवस्था थी।


कर्मचारियों का सहयोग न करना और अनुमति पत्र का अभाव

तीसरी मंजिल पर दो व्यक्ति कार्यरत मिले, जिन्होंने बताया कि वे “वेल्डिंग का काम” कर रहे थे।
लेकिन दोनों ने—

  • बिना अनुमति के घर में प्रवेश करने पर आपत्ति जताई,
  • जाँच टीम को कोई सहयोग नहीं किया,
  • और बोर्डिंग हाउस का कोई वैध लाइसेंस, अनुमति पत्र या पंजीकरण प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया।

यहां तक कि कई बार पूछने पर भी संचालक या मालिक का कोई आधिकारिक विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया।

इन सभी परिस्थितियों को देखते हुए समिति ने स्पष्ट रूप से इसे अवैध व्यावसायिक पशु सुविधा करार दिया।


जिलाधिकारी के आदेश पर तत्काल सीलिंग—कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित

प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर जिलाधिकारी सविन बंसल द्वारा तुरंत प्रभाव से सीलिंग आदेश जारी किए गए, जिसके बाद SDM कुमकुम जोशी की अगुवाई में टीम ने प्रतिष्ठान को सील कर दिया।

प्रशासन का कहना है कि—

  • ऐसे अवैध बोर्डिंग हाउस न केवल पशुओं के अधिकारों का उल्लंघन करते हैं,
  • बल्कि शहर में डॉग-बाइट जैसी घटनाओं की जड़ भी हो सकते हैं,
  • इनमें बिना प्रशिक्षण वाले लोग पशुओं को संभालते हैं,
  • सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया जाता,
  • और किसी भी समय दुर्घटना या पड़ोसियों को खतरा उत्पन्न हो सकता है।

शहर में अगले चरण में बड़े पैमाने पर अभियान

जिलाधिकारी कार्यालय के अनुसार, इस कार्रवाई के बाद प्रशासन ने निम्न कदम उठाने की तैयारी कर ली है—

  • पूरे जिले में बिना लाइसेंस के चल रही पेट शॉप, ग्रूमिंग सर्विस, बोर्डिंग हाउस और केयर सेंटर की सूची तैयार की जा रही है।
  • प्रतिबंधित या खतरनाक नस्लों को रखने वालों के सत्यापन की प्रक्रिया आरंभ होगी।
  • अवैध संस्थानों पर पुलिस व निगम के साथ संयुक्त प्रवर्तन अभियान चलेगा।
  • प्रत्येक वैध पेट व्यवसाय को अनिवार्य पंजीकरण, स्वच्छता मानक, पशु कल्याण नियम, और सुरक्षा मानदंड का पालन कराना होगा।

पशु कल्याण NGOs ने कार्रवाई का स्वागत किया

इस कार्रवाई के बाद देहरादून के पशु कल्याण संगठनों ने प्रशासन का समर्थन किया।
एनिमल रेस्क्यू ग्रुप के एक सदस्य ने कहा—

“ऐसे अवैध बोर्डिंग हाउस पशुओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए अत्यंत खतरनाक हैं। प्रशासन का यह कदम सही दिशा में महत्वपूर्ण शुरुआत है।”


सुरक्षित शहर और जिम्मेदार पशुपालन की दिशा में निर्णायक कदम

देहरादून प्रशासन की इस कार्रवाई ने शहर में पशु कल्याण और जन सुरक्षा को लेकर एक स्पष्ट संदेश दिया है—
अवैध, असुरक्षित या नियम-विरुद्ध किसी भी प्रकार की पशु सुविधा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

यह कदम न केवल जनसुरक्षा के लिए, बल्कि पशुओं के अधिकारों और उनके सम्मानजनक व्यवहार को सुनिश्चित करने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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