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ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई के निधन पर भारत ने जताया शोक; विदेश सचिव विक्रम मिस्री पहुंचे दूतावास, कूटनीतिक हलचल तेज

नई दिल्ली | विशेष संवाददाता मध्य पूर्व (मिडल ईस्ट) में गहराते युद्ध के बादलों और अनिश्चितता के माहौल के बीच, भारत ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर औपचारिक शोक व्यक्त किया है। भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने गुरुवार को राजधानी नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया। उन्होंने वहां रखी गई शोक पुस्तिका (कंडोलेंस बुक) में हस्ताक्षर कर भारत सरकार की ओर से संवेदनाएं प्रकट कीं।

मिस्री ने ईरानी राजदूत मोहम्मद फथाली से मुलाकात कर इस कठिन समय में ईरानी जनता के प्रति एकजुटता प्रदर्शित की। यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब ईरान अपने सबसे शक्तिशाली नेता के खोने के बाद 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक से गुजर रहा है।

शोक पुस्तिका पर हस्ताक्षर और वैश्विक संवेदनाएं

ईरानी दूतावास ने खामेनेई की ‘शहादत’ के बाद एक शोक पुस्तिका रखी है, जिस पर विभिन्न देशों के राजनयिक, भारतीय नागरिक और समर्थक अपनी संवेदनाएं दर्ज करा सकते हैं। दूतावास के अनुसार, यह पुस्तिका गुरुवार (5 मार्च), शुक्रवार (6 मार्च) और सोमवार (9 मार्च) को दर्शनार्थियों के लिए उपलब्ध रहेगी।

भारतीय विदेश सचिव का यह कदम भारत की उस संतुलित विदेश नीति का हिस्सा है, जहां वह ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को प्राथमिकता देता रहा है। इससे पहले भारत लगातार दोनों ही पक्षों (ईरान और इजरायल-अमेरिका) से संयम बरतने की अपील करता रहा है।


सैन्य हमले में हुआ था खामेनेई का निधन

उल्लेखनीय है कि 86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई की 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका के एक संयुक्त सैन्य हमले में मृत्यु हो गई थी। अमेरिका द्वारा किए गए दावों के अनुसार, इस सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान एक उच्च स्तरीय सैन्य बैठक को निशाना बनाया गया था।

इस हमले में केवल खामेनेई ही नहीं, बल्कि ईरान की सत्ता के कई अन्य स्तंभ भी ढह गए:

  • सैन्य नेतृत्व: हमले में ईरान के रक्षा मंत्री और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख सहित कई शीर्ष जनरल मारे गए।

  • पारिवारिक क्षति: खबरों के अनुसार, हमले में खामेनेई की बहू, बेटी और नाती की भी जान चली गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल उनकी पत्नी ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।


विदेश मंत्री एस. जयशंकर की कूटनीतिक सक्रियता

इस वैश्विक संकट के बीच भारत के विदेश मंत्री ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर जानकारी दी कि उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के साथ एक विस्तृत टेलीकॉन्फ्रेंस की है। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखना और आगे की रणनीति पर चर्चा करना था। इससे पहले भारतीय विदेश मंत्री ने ओमान के विदेश मंत्री से भी संवाद कर क्षेत्रीय शांति की संभावनाओं को टटोला।

मध्य पूर्व में बिगड़ते हालात: तेहरान का पलटवार

खामेनेई की मौत के बाद से ही मध्य पूर्व में स्थिति विस्फोटक बनी हुई है। तेहरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों (US Bases) को निशाना बनाया है। तनाव की आंच अब पड़ोसी देशों तक भी पहुंचने लगी है।

  1. अजरबैजान पर हमला: गुरुवार को ईरान की सीमा से सटे अजरबैजान पर दो ड्रोन हमले हुए। बाकू प्रशासन के अनुसार, इन हमलों में एक हवाई अड्डे और एक स्कूल को निशाना बनाया गया, जिसमें दो नागरिक घायल हुए हैं। इसके बाद अजरबैजान ने ईरानी दूत को तलब कर सख्त विरोध दर्ज कराया है।

  2. मिस्र में उमड़ा जनसैलाब: खामेनेई के निधन का असर केवल ईरान तक सीमित नहीं रहा। मिस्र की राजधानी काहिरा स्थित ईरानी दूतावास के बाहर शोक व्यक्त करने वालों की भारी भीड़ देखी गई, जो मध्य पूर्व की राजनीति में खामेनेई के प्रभाव को दर्शाती है।


खामेनेई का युग: 1989 से 2026 तक का सफर

अयातुल्ला अली खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे। उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक ईरान की आंतरिक और विदेश नीति का मार्गदर्शन किया। उनके निधन को ईरान के इतिहास में एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। ईरानी राज्य मीडिया ने उनकी मृत्यु की पुष्टि करते हुए उन्हें एक ‘शहीद’ का दर्जा दिया है, जिसने पश्चिमी ताकतों के खिलाफ देश की संप्रभुता की रक्षा की।

भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

भारत के लिए ईरान एक महत्वपूर्ण ऊर्जा आपूर्तिकर्ता और चाबहार बंदरगाह के माध्यम से मध्य एशिया तक पहुंचने का प्रवेश द्वार है। ऐसे में ईरान में सत्ता का कोई भी अस्थिर बदलाव या युद्ध की स्थिति भारत के आर्थिक और सामरिक हितों को प्रभावित कर सकती है। यही कारण है कि भारत इस मामले में अत्यंत सावधानी और संवेदनशीलता के साथ कदम बढ़ा रहा है।

अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु ने विश्व राजनीति में एक बड़ा निर्वात पैदा कर दिया है। जहां एक ओर पश्चिमी देश इसे आतंकवाद के खिलाफ बड़ी जीत मान रहे हैं, वहीं ईरान और उसके सहयोगी इसे एक अपूर्णीय क्षति बता रहे हैं। भारत की ओर से विदेश सचिव विक्रम मिस्री का दूतावास जाना यह संदेश देता है कि नई दिल्ली क्षेत्र में शांति चाहती है और अपने पुराने मित्रों के प्रति कूटनीतिक शिष्टाचार निभाने में पीछे नहीं है।

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