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Uttarakhand: संविधान दिवस पर मुख्यमंत्री धामी का संबोधन: नए आपराधिक कानूनों के व्यापक प्रसार, अभियोजन विभाग को मिलेगा अतिरिक्त सहयोग

The Hill India News
Last updated: November 26, 2025 12:45 pm
The Hill India News
Published: November 26, 2025
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देहरादून/ 26 नवंबर। संविधान दिवस के अवसर पर बुधवार को देहरादून पुलिस लाइन में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भारतीय संविधान की उद्देशिका का सामूहिक वाचन कराया और अभियोजन विभाग की वार्षिक पत्रिका का विधिवत विमोचन किया। कार्यक्रम में उपस्थित न्यायिक, पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि “अभियोजन सेवा हमारी न्याय व्यवस्था का वह मजबूत स्तंभ है, जो सत्य को प्रतिष्ठित करने और न्याय प्रक्रिया को पारदर्शी व प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।”

Contents
नए आपराधिक कानूनों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष सहायताविधि दिवस से ‘संविधान दिवस’ तक—एक ऐतिहासिक यात्रान्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तीव्र कदमउत्तराखंड में न्याय व्यवस्था के डिजिटलीकरण पर जोरराज्य में लिए गए कई ऐतिहासिक फैसलेअभियोजन विभाग के लिए नई पहलेंकार्यक्रम में गणमान्यजनों की उपस्थिति

उन्होंने इस अवसर पर अभियोजन विभाग के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं, जिनमें विभाग के डिजिटलीकरण, नए आपराधिक कानूनों के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए वित्तीय सहायता और उत्कृष्ट कार्य के लिए पुरस्कार प्रणाली विकसित करने का ऐलान प्रमुख रहा।


नए आपराधिक कानूनों के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष सहायता

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि भारत में लागू किए गए नए आपराधिक कानून—भारतीय न्याय संहिता 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023, और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023—न्याय प्रणाली को अधिक सक्षम, वैज्ञानिक, पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाने की दिशा में ऐतिहासिक परिवर्तन हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य सरकार अभियोजन विभाग को इन नए कानूनों के बारे में जन-जागरूकता बढ़ाने, पुलिस-प्रशिक्षण, विधि शिक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में इनका प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने हेतु विशेष बजट सहायता उपलब्ध कराएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि ये नए कानून अपराध के स्वरूप, डिजिटल वातावरण और आधुनिक तकनीक के अनुरूप निर्मित किए गए हैं। इनमें इलेक्ट्रॉनिक एवं डिजिटल रिकॉर्ड को सबूत के रूप में मान्यता देकर जांच और अभियोजन प्रक्रिया को अधिक विश्वसनीय और प्रमाणिक बनाया गया है।


विधि दिवस से ‘संविधान दिवस’ तक—एक ऐतिहासिक यात्रा

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री धामी ने 26 नवंबर के ऐतिहासिक महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि “26 नवंबर 1949 का दिन भारतीय इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है, जब संविधान सभा ने भारतीय संविधान को औपचारिक रूप से अंगीकृत किया।”

उन्होंने बताया कि 1979 में मशहूर विधिवेत्ता स्व. डॉ. लक्ष्मीमल्ल सिंघवी और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के प्रयासों से इस दिन को पहली बार विधि दिवस के रूप में मनाने की शुरुआत हुई।
वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे संविधान दिवस के रूप में राष्ट्रीय महत्व का पर्व घोषित किया, ताकि संविधान-निर्माताओं के योगदान को व्यापक स्तर पर सम्मानित किया जा सके।


न्याय व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तीव्र कदम

मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम में यह भी उल्लेख किया कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश में न्यायपालिका को आधुनिक, मजबूत और नागरिक-केंद्रित बनाने के लिए व्यापक सुधार लागू किए गए हैं।

उन्होंने कहा कि:

  • ई-कोर्ट्स प्रोजेक्ट
  • नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड
  • फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स
  • महिला एवं बाल अपराधों के लिए त्वरित न्याय तंत्र
  • डिजिटल केस मैनेजमेंट सिस्टम
  • टेलीकॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई

जैसी पहलों ने न्याय प्रणाली को अधिक पारदर्शी, तेज़, सुगम और प्रभावी बनाया है।


उत्तराखंड में न्याय व्यवस्था के डिजिटलीकरण पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि उत्तराखंड सरकार न्यायिक ढांचे को आधुनिक बनाने के लिए अत्यधिक सक्रिय रूप से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य में:

  • नए न्यायालय भवनों का निर्माण,
  • पुरानी संरचनाओं का सुदृढ़ीकरण,
  • डिजिटल कोर्ट्स की स्थापना,
  • ई-फाइलिंग और वर्चुअल हियरिंग की प्रणालियों का विस्तार

तेजी से आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी बताया कि विधि शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालयों व संस्थानों में सुधार किए जा रहे हैं। युवा अधिवक्ताओं के लिए मेंटरशिप कार्यक्रम और महिला अधिवक्ताओं के लिए सुरक्षित व अनुकूल कार्य वातावरण विकसित करना भी सरकार की प्राथमिकता है।


राज्य में लिए गए कई ऐतिहासिक फैसले

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने न्यायिक व प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।
उन्होंने उल्लेख किया:

  • सख्त नकल-विरोधी कानून,
  • यूसीसी लागू करने का निर्णय,
  • और न्यायालयी ढांचे को डिजिटल रूप देने जैसी पहलों का।

उन्होंने कहा कि ये फैसले उत्तराखंड को नए युग के न्याय मॉडल की ओर ले जा रहे हैं।


अभियोजन विभाग के लिए नई पहलें

मुख्यमंत्री ने अभियोजन विभाग को और अधिक सक्षम बनाने के लिए चार प्रमुख घोषणाएं कीं:

  1. नए आपराधिक कानूनों के प्रचार-प्रसार के लिए वित्तीय सहायता।
  2. डिजिटलीकरण कार्य हेतु बजट सहयोग।
  3. उत्कृष्ट कार्य करने वाले अभियोजन अधिकारियों के लिए पुरस्कार प्रणाली।
  4. राज्य की विभिन्न बोलियों का प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की व्यवस्था।

उन्होंने कहा कि यह आवश्यक है कि अभियोजन अधिकारी स्थानीय बोलियों व संस्कृति को समझें, ताकि गवाहों, पीड़ितों और आम जनता के साथ संप्रेषण अधिक संवेदनशील और प्रभावी हो।


कार्यक्रम में गणमान्यजनों की उपस्थिति

इस अवसर पर विधायक विनोद चमोली, गृह सचिव शैलेश बगोली, पुलिस महानिदेशक दीपम सेठ, निदेशक अभियोजन ए.पी. अंशुमान, पुलिस एवं अभियोजन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, और बड़ी संख्या में कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में संविधान की उद्देशिका का उत्साहपूर्ण सामूहिक वाचन किया गया, जिसने पूरे समारोह को विशेष भावनात्मक आयाम प्रदान किया।

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