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चंपावत कथित गैंगरेप केस: उत्तराखंड में सियासी भूचाल, कांग्रेस ने घेरी सरकार तो भाजपा ने बताया ‘सुनियोजित साजिश’

देहरादून: उत्तराखंड का शांत कहा जाने वाला चंपावत जिला इन दिनों एक कथित नाबालिग गैंगरेप प्रकरण को लेकर प्रदेश की राजनीति का केंद्र बन गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। जहाँ कांग्रेस इसे प्रदेश की कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा प्रश्नचिह्न बता रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इसे सरकार की छवि धूमिल करने की एक गहरी राजनीतिक साजिश करार दिया है।

कांग्रेस का तीखा प्रहार: ‘अपराधों में भाजपा नेताओं के नाम चिंताजनक’

चंपावत का दौरा कर लौटीं महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने देहरादून में प्रेस वार्ता कर धामी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। रौतेला ने कहा कि उत्तराखंड में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते जघन्य अपराधों में सत्ताधारी दल से जुड़े लोगों के नाम आना एक चिंताजनक प्रवृत्ति बन गई है। उन्होंने हरिद्वार की भाजपा नेत्री अनामिका और नैनीताल दुग्ध संघ के अध्यक्ष मुकेश बोरा के मामलों का हवाला देते हुए कहा कि सरकार आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रही है।

ज्योति रौतेला ने इस दौरान कई तीखे सवाल खड़े किए:

  • पीड़िता और उसके पिता घटना के बाद 48 घंटे तक कहाँ गायब थे?

  • दो दिनों के भीतर पीड़िता को दो बार मजिस्ट्रेट के सामने पेश करने की क्या आवश्यकता पड़ी?

  • यदि भाजपा इसे साजिश बता रही है, तो क्या पुलिस ने पीड़िता के पिता के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है?

  • बरामदगी के समय पीड़िता के हाथ बंधे होने की बात में कितनी सच्चाई है और उन्हें कब खोला गया?

रौतेला ने अंकिता भंडारी मामले का जिक्र करते हुए कहा कि सत्ता से जुड़े लोगों के नाम सामने आने के बावजूद आज तक सीबीआई जांच की प्रगति रिपोर्ट जनता के सामने नहीं आई है, जिससे सरकार की मंशा पर शक होता है।

भाजपा का पलटवार: ‘कांग्रेस की चुनावी महत्वाकांक्षा और बदले की भावना’

दूसरी ओर, भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कांग्रेस पर ही सवाल दाग दिए हैं। भाजपा की प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत ने कहा कि शुरुआती पुलिस जांच और पीड़िता के बयानों से यह साफ हो चुका है कि यह पूरा मामला बदले की भावना से प्रेरित है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कथित प्रकरण के पीछे कांग्रेस नेता आनंद मेहरा की भूमिका संदिग्ध है।

दीप्ति रावत ने कहा, “कांग्रेस अपनी चुनावी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए भाजपा कार्यकर्ताओं को झूठे और गंभीर आरोपों में फंसाने की कोशिश कर रही है। आनंद मेहरा लगातार अपने बयान बदल रहे हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि यह एक सुनियोजित साजिश है।” उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस महिला सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर ‘गैर-जिम्मेदाराना और शर्मनाक’ राजनीति कर रही है।

पुराने विवादों का भी हुआ जिक्र

भाजपा ने कांग्रेस के इतिहास को याद दिलाते हुए कहा कि यह पहली बार नहीं है जब विपक्ष ने झूठ का सहारा लिया हो। दीप्ति रावत ने जनवरी में कांग्रेस नेता तिलक राज बेहड़ के बेटे पर हुए कथित हमले और भाजपा विधायक अरविंद पांडे के नाम से वायरल हुए फर्जी पत्र का उदाहरण देते हुए कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों के केवल प्रेस वार्ता कर सरकार को बदनाम करने का प्रयास करती रही है।

कानून-व्यवस्था बनाम राजनीतिक नैरेटिव

चंपावत का यह मामला अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आगामी चुनावों और प्रदेश की राजनीतिक छवि का मुद्दा बन गया है। एक तरफ जहाँ पुलिस तथ्यों को खंगालने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ देहरादून की सड़कों से लेकर सोशल मीडिया तक “राजनीतिक नैरेटिव” की जंग जारी है। जनता की नजर अब इस बात पर टिकी है कि पुलिस की अंतिम जांच रिपोर्ट में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या वास्तव में किसी निर्दोष को फंसाया गया या फिर किसी अपराधी को सियासी संरक्षण मिल रहा है।

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