
उत्तराखंड के चंपावत जिले से सामने आए कथित नाबालिग गैंगरेप मामले ने पिछले कुछ दिनों में पूरे राज्य को हिलाकर रख दिया था। शुरुआत में यह मामला बेहद गंभीर अपराध के रूप में सामने आया, जिसमें एक नाबालिग लड़की के साथ सामूहिक दुष्कर्म किए जाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू कर दी थी। लेकिन अब इस पूरे मामले में ऐसा मोड़ आया है जिसने सभी को चौंका दिया है। पुलिस जांच, मेडिकल रिपोर्ट और सामने आए वीडियो के बाद दावा किया जा रहा है कि यह गैंगरेप नहीं बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।
मामले में सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब पीड़िता और उसके चचेरे भाई के वीडियो सामने आए। इन वीडियो में दोनों ने जो बातें कहीं, उससे पूरे केस की दिशा ही बदल गई। पुलिस ने भी 7 मई को प्रेस वार्ता कर साफ कर दिया कि मेडिकल जांच में रेप की पुष्टि नहीं हुई है और न ही लड़की के शरीर पर किसी प्रकार के चोट के निशान मिले हैं। इसके बाद से यह मामला अब कथित फर्जी साजिश और झूठे आरोपों के एंगल से देखा जा रहा है।
कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?
जानकारी के अनुसार, नाबालिग लड़की के पिता ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया था कि 5 मई को वह अपनी बेटी के साथ इलाज के लिए चंपावत गए थे। इलाज के बाद पिता गांव लौट आए, लेकिन बेटी ने कहा कि उसे अपनी सहेली की शादी में जाना है। पिता ने बेटी को जाने की अनुमति दे दी।
शाम तक जब बेटी घर नहीं लौटी तो परिवार को चिंता होने लगी। पिता ने फोन किया तो पहले बात हुई, लेकिन बाद में फोन बंद आने लगा। देर रात एक कॉल आया जिसमें लड़की काफी घबराई हुई लग रही थी, लेकिन वह कुछ बोल नहीं पाई और कॉल कट गया। इसके बाद परिवार और गांव के लोग लड़की की तलाश में निकल पड़े।
काफी खोजबीन के बाद लड़की एक कमरे में बंधी हुई हालत में मिली। उस समय लड़की ने अपने साथ गैंगरेप होने की बात कही थी। इस बयान के आधार पर पुलिस ने लड़की के दोस्त समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मामला संवेदनशील था, इसलिए पुलिस ने तेजी से जांच शुरू कर दी।
जांच में सामने आई चौंकाने वाली कहानी
जब पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों, कॉल डिटेल, मेडिकल रिपोर्ट और घटनास्थल से जुड़े तथ्यों की गहराई से जांच की तो मामला पूरी तरह अलग निकला। पुलिस का दावा है कि लड़की के साथ किसी प्रकार का गैंगरेप नहीं हुआ था। मेडिकल जांच में दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई और शरीर पर किसी तरह की हिंसा या संघर्ष के निशान भी नहीं पाए गए।
इसके बाद जांच का फोकस उन लोगों पर गया जिनके नाम लगातार सामने आ रहे थे। पुलिस के अनुसार, कमल रावत नाम के व्यक्ति और उसकी एक महिला मित्र ने मिलकर पूरी साजिश रची थी। आरोप है कि उन्होंने नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर तीन युवकों पर झूठा गैंगरेप केस लगाने के लिए तैयार किया।
पीड़िता के वीडियो ने बदली पूरी तस्वीर
मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब पीड़िता का एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में लड़की खुद कह रही है कि उसके साथ कुछ भी गलत नहीं हुआ। उसने साफ कहा कि उसके साथ गैंगरेप जैसी कोई घटना नहीं हुई थी।
वीडियो में लड़की ने दावा किया कि कमल रावत और उसकी महिला मित्र ने पूरा प्लान बनाया था। लड़की के अनुसार, योजना यह थी कि आरोपियों में से एक के कमरे में ऐसे हालात बनाए जाएं जिससे लगे कि गैंगरेप हुआ है और फिर तीनों युवकों को झूठे केस में फंसा दिया जाए।
वीडियो में लड़की यह भी कहती दिखाई दे रही है कि वह यह बयान बिना किसी दबाव और पूरी होश-हवास में दे रही है। इस वीडियो के सामने आने के बाद पूरे मामले ने नया मोड़ ले लिया और पहले आरोपी बनाए गए लोगों को राहत मिली।
50 लाख के समझौते की कहानी क्या थी?
इस मामले में एक और बड़ा दावा किया गया था कि आरोपी पक्ष पीड़िता के परिवार पर समझौते का दबाव बना रहा है और इसके लिए 50 लाख रुपये तक की पेशकश की जा रही है। यह आरोप भी काफी चर्चा में रहा था। लेकिन अब पीड़िता के चचेरे भाई के वीडियो ने इस दावे पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
वीडियो में पीड़िता के भाई ने कहा कि कई दिनों से उसकी अपने चाचा और बहन से बात नहीं हो पा रही थी। उसने बताया कि जब उसने 7 मई की सुबह अपने चाचा को फोन किया तो कॉल कमल रावत ने उठाया। कमल रावत ने उसे बताया कि उसकी बहन पुलिस हिरासत में है और चाचा का कोई पता नहीं चल रहा।
भाई के अनुसार, इस जानकारी से वह घबरा गया। उसने जब अपने चाचा से बात कराने की मांग की तो कमल रावत ने कहा कि वह एसपी को कॉल करे। इसके बाद कई बार एसपी को फोन किया गया लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई।
कैसे फैली 50 लाख वाले समझौते की बात?
पीड़िता के भाई का कहना है कि इसके बाद कमल रावत ने दोबारा फोन किया और कहा कि आरोपी पक्ष 50 लाख रुपये देकर समझौता करना चाहता है। भाई ने जवाब दिया कि उसकी बहन के साथ गलत हुआ है इसलिए वह समझौता नहीं करेगा।
भाई के मुताबिक, कमल रावत ने उससे कहा कि उसकी बहन भी यही बता रही है कि उसके साथ गलत हुआ है। बाद में कमल रावत ने उससे एक वीडियो बनाकर भेजने को कहा। जब उसने वीडियो बनाने से मना किया तो उसे कुछ बातें लिखकर भेजी गईं। उन्हीं बातों के आधार पर उसने एसपी को मैसेज भेज दिया कि उन पर 50 लाख रुपये लेकर समझौते का दबाव बनाया जा रहा है।
हालांकि, बाद में जब उसकी अपने चाचा से बात हुई तो उसे पता चला कि मामला कुछ और ही है। इसके बाद उसे एहसास हुआ कि उसके जरिए गलत जानकारी फैलवाई गई।
भाई ने मांगी माफी
वीडियो में पीड़िता के चचेरे भाई ने पुलिस और उन लोगों से माफी भी मांगी है जिन पर बिना पूरी जानकारी के आरोप लगाए गए थे। उसने कहा कि कमल रावत पर परिवार को भरोसा था क्योंकि वह कई महीनों से उसके चाचा का इलाज कराने में मदद कर रहा था। इसी भरोसे का फायदा उठाकर पूरे मामले को अलग दिशा दी गई।
भाई ने स्वीकार किया कि बिना पूरी सच्चाई जाने उसने जो आरोप लगाए, उससे निर्दोष लोगों की छवि खराब हुई।
कमल रावत पर पहले भी लग चुके हैं आरोप
इस मामले में जिस कमल रावत का नाम सामने आ रहा है, उसके खिलाफ पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, वर्ष 2023 में उसके खिलाफ एक नाबालिग से दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज हुआ था। हालांकि बाद में वह हाईकोर्ट से बरी हो गया था।
अब इस नए मामले में उसका नाम सामने आने के बाद पुलिस उसकी भूमिका की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित साजिश के पीछे असली मकसद क्या था और इसमें कौन-कौन लोग शामिल थे।
पुलिस की जांच पर टिकी सबकी नजर
इस पूरे मामले ने समाज में कई बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ जहां महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराध बेहद गंभीर विषय हैं, वहीं दूसरी तरफ झूठे मामलों की आशंका भी जांच एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती बनती जा रही है।
अगर पुलिस की जांच पूरी तरह सही साबित होती है, तो यह मामला उन निर्दोष लोगों के लिए बड़ी राहत होगा जिन्हें गंभीर आरोपों का सामना करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर, यदि किसी ने साजिश के तहत झूठा केस तैयार किया है तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई हो सकती है।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की हर कड़ी को जोड़ने में लगी हुई है। वीडियो, कॉल रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। पूरे उत्तराखंड की नजर अब इस केस की अंतिम जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है, क्योंकि इस मामले ने कानून, समाज और संवेदनशील अपराधों की जांच प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।



