
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में ऐतिहासिक जीत दर्ज करने के बाद आखिरकार नए मुख्यमंत्री के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी विधायक दल की बैठक में वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के नाम पर सर्वसम्मति से मुहर लग गई। अब शुभेंदु अधिकारी कल सुबह 11 बजे पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इस घोषणा के साथ ही बंगाल की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत मानी जा रही है।
बीजेपी विधायक दल की बैठक में प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने शुभेंदु अधिकारी के नाम का प्रस्ताव रखा। बैठक में मौजूद सभी विधायकों ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया। इसके बाद केंद्रीय पर्यवेक्षक और गृह मंत्री अमित शाह ने आधिकारिक तौर पर शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता घोषित किया। बीजेपी की इस जीत को बंगाल की राजनीति में बड़ा सत्ता परिवर्तन माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से राज्य की राजनीति ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही थी।
अमित शाह ने बैठक के बाद कहा कि बीजेपी ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत विधायक दल की बैठक आयोजित की थी। पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की ओर से उन्हें और मोहन चरण माझी को पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया था। शाह ने बताया कि मुख्यमंत्री पद के लिए कई प्रस्ताव आए, लेकिन सभी प्रस्ताव सिर्फ एक ही नाम यानी शुभेंदु अधिकारी के समर्थन में थे। किसी दूसरे नेता के नाम का प्रस्ताव नहीं आया, जिसके बाद सर्वसम्मति से शुभेंदु अधिकारी को पश्चिम बंगाल विधानमंडल दल का नेता चुना गया।
शुभेंदु अधिकारी लंबे समय से बंगाल की राजनीति का बड़ा चेहरा रहे हैं। उनका जन्म 15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर जिले के कांथी में हुआ था। वह एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता शिशिर अधिकारी भी बंगाल की राजनीति में बेहद सम्मानित नेता रहे हैं। अधिकारी परिवार का पूर्वी मेदिनीपुर और आसपास के क्षेत्रों में वर्षों से मजबूत राजनीतिक प्रभाव रहा है।
शुभेंदु अधिकारी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत कांग्रेस की छात्र राजनीति से की थी। साल 1989 में उन्होंने छात्र परिषद के जरिए राजनीति में कदम रखा। उस समय बंगाल में वामपंथी संगठनों का दबदबा था और विपक्षी राजनीति करना आसान नहीं माना जाता था। इसके बावजूद शुभेंदु ने संघर्ष करते हुए अपनी अलग पहचान बनाई। बाद में 1995 में वह कांथी नगर पालिका में पार्षद चुने गए और यहीं से उनके चुनावी सफर की औपचारिक शुरुआत हुई।
राजनीतिक जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उन्होंने ममता बनर्जी के साथ तृणमूल कांग्रेस की नींव रखने में अहम भूमिका निभाई। कई वर्षों तक वह टीएमसी के मजबूत नेताओं में गिने जाते रहे। लेकिन विधानसभा चुनाव से पहले उन्होंने पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। उस समय उनके बीजेपी में शामिल होने को बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम माना गया था।
शुभेंदु अधिकारी की सबसे बड़ी पहचान ममता बनर्जी के खिलाफ चुनावी जीत रही है। साल 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम सीट से ममता बनर्जी को हराकर पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। इसके बाद इस चुनाव में भी वह ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुर सीट से मैदान में उतरे और एक बार फिर उन्हें हराने में सफल रहे। इतना ही नहीं, शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज कर अपनी राजनीतिक ताकत साबित कर दी।
बीजेपी की बंगाल में जीत का श्रेय भी काफी हद तक शुभेंदु अधिकारी को दिया जा रहा है। उन्होंने राज्यभर में आक्रामक चुनाव प्रचार किया और पार्टी संगठन को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ग्रामीण बंगाल में बीजेपी की पकड़ मजबूत करने में शुभेंदु का योगदान निर्णायक रहा।
अब मुख्यमंत्री बनने के बाद शुभेंदु अधिकारी के सामने कई बड़ी चुनौतियां होंगी। राज्य में कानून व्यवस्था, उद्योग, रोजगार और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे। बीजेपी नेतृत्व को उम्मीद है कि शुभेंदु अधिकारी अपने अनुभव और संगठनात्मक क्षमता के दम पर बंगाल में नई सरकार को मजबूत दिशा देंगे।
सूत्रों के मुताबिक, शुभेंदु अधिकारी जल्द ही राज्यपाल से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश कर सकते हैं। इसके बाद कल राजभवन में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित होगा। बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों में इस फैसले को लेकर भारी उत्साह देखने को मिल रहा है। राज्यभर में जश्न का माहौल है और पार्टी कार्यालयों में मिठाइयां बांटी जा रही हैं।
पश्चिम बंगाल की राजनीति में यह बदलाव सिर्फ सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि एक बड़े राजनीतिक समीकरण के बदलने का संकेत माना जा रहा है। अब सबकी नजरें शुभेंदु अधिकारी की नई सरकार और उनके पहले फैसलों पर टिकी होंगी।



