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केरल में नए मुख्यमंत्री की रेस तेज: क्या केसी वेणुगोपाल बनने जा रहे हैं कांग्रेस का सबसे बड़ा चेहरा?

The Hill India News
Last updated: May 8, 2026 11:13 am
The Hill India News
Published: May 8, 2026
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केसी वेणुगोपाल कांग्रेस संगठन में लंबे समय से बेहद प्रभावशाली भूमिका निभा रहे हैं। वह वर्तमान में लोकसभा सांसद हैं और पिछले सात वर्षों से कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। उन्हें राहुल गांधी का बेहद करीबी और भरोसेमंद नेता माना जाता है।

Contents
वीडी सतीशन भी मैदान में, लेकिन चुनौतियां बड़ीक्या रमेश चेन्नीथला की लग सकती है लॉटरी?दिल्ली में होगा अंतिम मंथनजातीय समीकरण भी अहमकांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी

वेणुगोपाल का राजनीतिक अनुभव भी काफी व्यापक है। वह केरल सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं और मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री का पद भी संभाल चुके हैं। संगठन और सरकार—दोनों स्तरों पर उनका अनुभव उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है।

कांग्रेस के भीतर यह भी माना जा रहा है कि केरल में पार्टी की ऐतिहासिक जीत के बाद एक ऐसा चेहरा चुना जाए जो संगठन और सरकार के बीच संतुलन बना सके। वेणुगोपाल इस कसौटी पर फिट बैठते हैं।

हालांकि अगर उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाता है तो उन्हें विधानसभा का उपचुनाव लड़ना पड़ेगा, क्योंकि फिलहाल वे लोकसभा सांसद हैं। साथ ही उनकी लोकसभा सीट खाली होने पर उपचुनाव भी कराना होगा। इसके अलावा कांग्रेस को राष्ट्रीय संगठन महासचिव के पद के लिए नया चेहरा तलाशना पड़ेगा। यही कारण है कि अंतिम फैसला पूरी तरह राहुल गांधी और कांग्रेस नेतृत्व की रणनीति पर निर्भर माना जा रहा है।

वीडी सतीशन भी मैदान में, लेकिन चुनौतियां बड़ी

मुख्यमंत्री पद की रेस में नेता विपक्ष वीडी सतीशन भी मजबूत दावेदार माने जा रहे हैं। छह बार विधायक रह चुके सतीशन पिछले पांच वर्षों में केरल की राजनीति में बेहद लोकप्रिय नेता बनकर उभरे हैं। उन्होंने विपक्ष के नेता के रूप में एलडीएफ सरकार के खिलाफ कई बड़े मुद्दे उठाए और जनता के बीच अपनी पहचान मजबूत की।

लेकिन उनकी सबसे बड़ी कमजोरी प्रशासनिक अनुभव की कमी मानी जा रही है। उन्होंने कभी सरकार में मंत्री पद नहीं संभाला। इसी मुद्दे पर जब उनसे सवाल पूछा गया तो उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया था, तब उनके पास भी कोई प्रशासनिक अनुभव नहीं था।

हालांकि पार्टी के भीतर कुछ वरिष्ठ नेता सतीशन के समर्थकों द्वारा चलाए जा रहे दबाव अभियान को पसंद नहीं कर रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि अंदरखाने की यह “प्रेशर पॉलिटिक्स” उनके खिलाफ जा सकती है।

यूडीएफ की दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) भी सतीशन के पक्ष में बताई जा रही है। लेकिन कांग्रेस विधायकों के बीच उन्हें उतना समर्थन नहीं मिल रहा जितना वेणुगोपाल को मिल रहा है।

क्या रमेश चेन्नीथला की लग सकती है लॉटरी?

मुख्यमंत्री पद की दौड़ में तीसरा बड़ा नाम वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला का है। 70 वर्षीय चेन्नीथला के पास संगठन और सरकार दोनों का लंबा अनुभव है। वह केरल कांग्रेस अध्यक्ष, नेता विपक्ष और राज्य सरकार में मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने छह बार लोकसभा और छह बार विधानसभा चुनाव जीते हैं।

इंदिरा गांधी के दौर में वह एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, जबकि राजीव गांधी के समय यूथ कांग्रेस की कमान संभाल चुके हैं। अनुभव के मामले में वह सबसे आगे माने जाते हैं।

हालांकि उनकी उम्र और नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति उनकी राह में बाधा बन सकती है। लेकिन अगर वेणुगोपाल और सतीशन के बीच सहमति नहीं बनती, तो चेन्नीथला “समझौता उम्मीदवार” के रूप में उभर सकते हैं। यही वजह है कि राजनीतिक गलियारों में उनकी संभावनाओं को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा रहा।

दिल्ली में होगा अंतिम मंथन

मुख्यमंत्री के नाम पर अंतिम निर्णय लेने से पहले कांग्रेस आलाकमान ने केरल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं को दिल्ली बुलाया है। प्रदेश अध्यक्ष सनी जोसफ, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला शुक्रवार शाम दिल्ली पहुंचने वाले हैं। केसी वेणुगोपाल पहले से ही दिल्ली में मौजूद हैं।

बताया जा रहा है कि राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे इन नेताओं से अलग-अलग बातचीत करेंगे और उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा। कांग्रेस नेतृत्व इस बार ऐसा निर्णय लेना चाहता है जिससे सरकार स्थिर रहे और पार्टी के भीतर किसी तरह की नाराजगी पैदा न हो।

जातीय समीकरण भी अहम

मुख्यमंत्री पद की रेस में शामिल तीनों प्रमुख नेता—केसी वेणुगोपाल, वीडी सतीशन और रमेश चेन्नीथला—नायर समुदाय से आते हैं। केरल की राजनीति में नायर समुदाय को बेहद प्रभावशाली माना जाता है और कांग्रेस लंबे समय से इस सामाजिक समीकरण को साधने की कोशिश करती रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस इस बार ऐसा चेहरा चुनना चाहती है जो संगठन, जातीय संतुलन और प्रशासनिक क्षमता—तीनों को साथ लेकर चल सके।

कांग्रेस की ऐतिहासिक वापसी

केरल की 140 सदस्यीय विधानसभा में इस बार कांग्रेस नीत यूडीएफ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 102 सीटें जीत लीं। इनमें कांग्रेस को 63 सीटें मिलीं, जबकि आईयूएमएल ने 22 सीटों पर जीत दर्ज की। लंबे समय बाद कांग्रेस को राज्य में स्पष्ट जनादेश मिला है।

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि कांग्रेस नेतृत्व किस चेहरे पर भरोसा जताता है। फिलहाल सभी संकेत केसी वेणुगोपाल की ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला शनिवार को ही सामने आएगा।

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