हरिद्वार/लक्सर: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के शिक्षा महकमे में उस समय हड़कंप मच गया, जब जिला शिक्षा अधिकारी ने नियमों की अनदेखी कर सेवा में आए लक्सर ब्लॉक के 9 शिक्षकों की बर्खास्तगी के आदेश जारी कर दिए। यह कड़ा कदम नैनीताल हाईकोर्ट द्वारा हाल ही में दिए गए अंतिम आदेश के अनुपालन में उठाया गया है। सेवा से हटाए गए इन शिक्षकों में 5 उर्दू शिक्षक और 4 अन्य विषयों के शिक्षक शामिल हैं। इस कार्रवाई के बाद उन अभ्यर्थियों में भी खलबली मची है जिनकी नियुक्तियां इसी तरह के विवादों के घेरे में रही हैं।
क्या है 50 प्रतिशत अंकों का यह पेचीदा मामला?
इस पूरे विवाद की जड़ें साल 2018-19 की शिक्षक भर्ती प्रक्रिया से जुड़ी हैं। उस समय प्रदेश में बेसिक शिक्षकों की भर्ती के लिए जारी नियमावली में यह स्पष्ट प्रावधान था कि बीएड (B.Ed) डिग्री के साथ स्नातक (Graduation) में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक होना अनिवार्य है। हालांकि, भर्ती प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया था जिनके स्नातक में अंक इस निर्धारित सीमा से कम थे।
शिक्षा विभाग ने शुरुआत में मानकों को पूरा न करने वाले इन आवेदनों को निरस्त कर दिया था। विभाग की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए प्रभावित आवेदकों ने नैनीताल हाईकोर्ट की शरण ली थी। उस समय कोर्ट ने मानवीय और तकनीकी पहलुओं को देखते हुए अंतरिम आदेश जारी किया, जिसके तहत इन अभ्यर्थियों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने की अनुमति मिल गई और उन्हें विभिन्न विद्यालयों में नियुक्तियां भी दे दी गईं।
हाईकोर्ट का अंतिम प्रहार: ‘अपात्र’ को जगह नहीं
पिछले कई वर्षों से यह मामला नैनीताल हाईकोर्ट में विचाराधीन था। शिक्षक अंतरिम आदेश के संरक्षण में अपनी सेवाएं दे रहे थे और वेतन ले रहे थे। लेकिन मार्च 2026 में हाईकोर्ट ने इस पर अपनी अंतिम मुहर लगाते हुए स्पष्ट कर दिया कि जो अभ्यर्थी विज्ञापन की मूल शर्तों (न्यूनतम अंक) को पूरा नहीं करते, उन्हें नियुक्ति का अधिकार नहीं है।
कोर्ट ने ऐसे आवेदनों को पूर्णतः ‘अयोग्य’ करार दिया। इसके बाद शिक्षा विभाग ने उन सभी शिक्षकों की सूची खंगालनी शुरू की, जो इस श्रेणी में आते थे। विभाग के नए दिशा-निर्देशों के अनुसार, सामान्य श्रेणी के लिए 50% से कम और आरक्षित श्रेणी के लिए 45% से कम स्नातक अंक वाले शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से ‘अनअर्ह’ (Ineligible) घोषित कर दिया गया है।
लक्सर ब्लॉक में सर्वाधिक प्रभाव, शिक्षा अधिकारियों ने की पुष्टि
जिला शिक्षा अधिकारी अमित कुमार चंद ने पूरे जिले में कुल 16 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त करने के आदेश जारी किए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा मार लक्सर ब्लॉक पर पड़ी है, जहाँ 9 शिक्षकों को एक साथ बाहर का रास्ता दिखाया गया है।
लक्सर के खंड शिक्षा अधिकारी (BEO) विनोद कुमार ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया, “माननीय नैनीताल हाईकोर्ट के आदेशों का अक्षरशः पालन किया जा रहा है। लक्सर ब्लॉक में तैनात 5 उर्दू शिक्षकों और 4 अन्य शिक्षकों की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। इस संबंध में औपचारिक आदेश संबंधितों को तामील करा दिए गए हैं।”
नियुक्तियों पर सवाल और भविष्य की चुनौती
इस कार्रवाई ने शिक्षा विभाग की चयन प्रक्रिया और कानूनी पेचीदगियों पर एक बार फिर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर प्रदेश के अन्य जिलों में भी पड़ सकता है, जहाँ इसी भर्ती के तहत कम अंकों वाले शिक्षक नियुक्त हुए थे। बर्खास्त शिक्षकों के सामने अब करियर का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि उनकी सालों की सेवा अब शून्य मानी जा रही है।
प्रशासन की इस ‘क्लीन-अप’ ड्राइव से स्पष्ट है कि अब भविष्य की भर्तियों में योग्यता के मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, विभाग अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि इन शिक्षकों की जगह नई नियुक्तियों या समायोजन के माध्यम से शिक्षण कार्य बाधित न हो।



