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Reading: बिहार में सत्ता परिवर्तन से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, नीतीश कुमार के करीबी अफसरों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति
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बिहार में सत्ता परिवर्तन से पहले बड़ा प्रशासनिक फेरबदल, नीतीश कुमार के करीबी अफसरों को केंद्र में प्रतिनियुक्ति

The Hill India News
Last updated: April 14, 2026 6:44 am
The Hill India News
Published: April 14, 2026
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पटना: बिहार की राजनीति में संभावित बड़े बदलाव से ठीक पहले प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे की अटकलों के बीच राज्य में बड़े पैमाने पर आईएएस (IAS) और आईपीएस (IPS) अधिकारियों का तबादला और केंद्रीय प्रतिनियुक्ति चर्चा का विषय बन गया है। केंद्र सरकार द्वारा जारी पहली सूची में कई ऐसे अधिकारियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री का बेहद करीबी माना जाता रहा है। इस घटनाक्रम को आने वाले राजनीतिक बदलाव और नई सरकार की कार्यशैली से जोड़कर देखा जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, बिहार कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारियों को केंद्र सरकार में महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया है। इनमें मुख्यमंत्री के सचिव रहे अनुपम कुमार को ऊर्जा मंत्रालय में ज्वाइंट सेक्रेटरी बनाया गया है। अनुपम कुमार 2003 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और लंबे समय से मुख्यमंत्री कार्यालय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी गिनती मुख्यमंत्री के भरोसेमंद अधिकारियों में होती है। उनके अलावा उनकी पत्नी प्रतिमा एस वर्मा को भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर भेजा जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासनिक स्तर पर एक बड़ा बदलाव सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है।

इसी कड़ी में आईएएस अधिकारी वंदना प्रेयसी को उर्वरक (फर्टिलाइजर) विभाग में ज्वाइंट सेक्रेटरी के पद पर नियुक्त किया गया है। वहीं आईपीएस अधिकारी राकेश राठी और आईएएस अधिकारी श्रवनन एम जैसे कई अन्य अधिकारियों को भी केंद्र में जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इन अधिकारियों का राज्य से एक साथ केंद्र में जाना कई सवाल खड़े कर रहा है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया चल रही है।

राजनीतिक सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके बाद 15 अप्रैल को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के नेतृत्व में नई सरकार के गठन की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी तक आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों से संकेत साफ मिल रहे हैं कि बिहार में जल्द ही सत्ता परिवर्तन हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के प्रशासनिक फेरबदल का सीधा संबंध आने वाली सरकार की प्राथमिकताओं और कार्यशैली से होता है। जब भी किसी राज्य में नई सरकार बनने की संभावना होती है, तो अक्सर पुराने प्रशासनिक ढांचे में बदलाव किया जाता है ताकि नई नीतियों को लागू करने में सुविधा हो। ऐसे में मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों को केंद्र में भेजना एक रणनीतिक कदम भी माना जा सकता है।

इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई यह पहली सूची ही नहीं है। सूत्रों के अनुसार, जल्द ही दूसरी सूची भी जारी हो सकती है, जिसमें और अधिक अधिकारियों के नाम शामिल होंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि यह केवल शुरुआती चरण है और आने वाले दिनों में प्रशासनिक स्तर पर और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम को केवल प्रशासनिक फेरबदल के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह एक बड़े राजनीतिक बदलाव की तैयारी का हिस्सा भी हो सकता है। जिस तरह से मुख्यमंत्री के करीबी अधिकारियों को केंद्र में भेजा जा रहा है, उससे यह भी संकेत मिलता है कि नई सरकार अपने तरीके से प्रशासनिक ढांचा तैयार करना चाहती है।

वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि यह सब कुछ पूर्व नियोजित तरीके से किया जा रहा है और इसमें पारदर्शिता की कमी है। हालांकि सरकार की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

कुल मिलाकर, बिहार में राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर तेजी से बदलाव हो रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित इस्तीफे से पहले ही जिस तरह से प्रशासनिक फेरबदल किया गया है, उसने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति किस दिशा में जाती है और नई सरकार बनने के बाद प्रशासनिक ढांचे में और क्या बदलाव देखने को मिलते हैं।

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