उत्तराखंड के सुप्रसिद्ध और करोड़ों वैश्विक श्रद्धालुओं की अगाध आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम दान चोरी मामले ने अब सूबे में एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक रूप अख्तियार कर लिया है। इस पूरे संवेदनशील प्रकरण में मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल की भूमिका को लेकर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मौजूदा अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी अब पूरी तरह आमने-सामने आ गए हैं। दोनों दिग्गजों के बीच छिड़ी इस तीखी जुबानी जंग और एक-दूसरे पर लगाए जा रहे गंभीर लांछनों ने उत्तराखंड की धामी सरकार की प्रशासनिक जवाबदेही को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।
सोमवार को देहरादून स्थित उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश मुख्यालय में बुलाई गई एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता में गणेश गोदियाल ने न केवल हेमंत द्विवेदी के आरोपों पर पलटवार किया, बल्कि कई ऐसे सनसनीखेज खुलासे किए जिसने मंदिर समिति के भीतर चल रहे कथित भ्रष्टाचार की परतों को उघाड़ कर रख दिया है।
आरोपों का पलटवार: प्रमोद नौटियाल के इतिहास पर बड़ा खुलासा
दरअसल, बीते दिनों बीकेटीसी के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने बदरीनाथ धाम दान चोरी मामले के मुख्य आरोपी प्रमोद नौटियाल के साथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के पुराने संबंधों का दावा करते हुए उन पर राजनीतिक हमला बोला था। द्विवेदी का आरोप था कि प्रमोद नौटियाल और गोदियाल की जान-पहचान बहुत पुरानी है। इस पर कड़ा रुख अपनाते हुए गणेश गोदियाल ने प्रेस वार्ता में ऐतिहासिक साक्ष्यों और तिथियों के साथ हेमंत द्विवेदी को करारा जवाब दिया।
गोदियाल ने मीडिया के सामने स्पष्ट किया कि प्रमोद नौटियाल नाम का यह कर्मचारी उनके बीकेटीसी का अध्यक्ष पद संभालने से बहुत पहले से ही मंदिर समिति में अपनी जड़ें जमा चुका था। उन्होंने प्रामाणिक रूप से बताया कि उनकी खुद की जॉइनिंग बतौर अध्यक्ष साल 2003 में हुई थी, जबकि प्रमोद नौटियाल उससे पहले से ही वहां कार्यरत था। उन्होंने कहा कि वर्ष 2003 से पहले प्रमोद नौटियाल के साथ उनका किसी भी प्रकार का कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक परिचय नहीं था।
गोदियाल ने इस दौरान एक बड़ा खुलासा करते हुए कहा:
“सबसे पहली बात यह है कि प्रमोद नौटियाल मेरे बीकेटीसी का दायित्व ग्रहण करने से पहले से ही कार्यरत था। मेरी ज्वाइनिंग 2003 में हुई थी, उससे पहले मेरी प्रमोद नौटियाल से कोई व्यक्तिगत मुलाकात नहीं थी। इस बारे में जब जानकारी जुटाई गई तो पता चला कि प्रमोद नौटियाल दरअसल भाजपा के ही शासन काल के दौरान साल 2001 में कार्यरत रहे बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति के तत्कालीन अध्यक्ष का सगा भतीजा है।”
गंभीर आरोप: ‘बीकेटीसी अध्यक्ष के इशारे पर हो रही थी चोरी’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मामले को और गंभीर मोड़ देते हुए जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला दिया। गोदियाल के अनुसार, बदरीनाथ धाम दान चोरी मामले में पुलिस और प्रशासन द्वारा जो दूसरा आरोपी पकड़ा गया है, उसने पूछताछ में बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। गिरफ्तार आरोपी ने अपने आधिकारिक बयान में स्वीकार किया है कि मंदिर के चढ़ावे और दान पेटियों से होने वाली हेराफेरी के तमाम कार्य किसी और के नहीं, बल्कि सीधे बीकेटीसी अध्यक्ष के निर्देशों पर और प्रमोद नौटियाल के प्रबंधन में हो रहे थे।
गोदियाल ने जोर देकर कहा कि आरोपियों के बयानों से यह पूरी तरह साफ हो जाता है कि बदरीनाथ मंदिर में पवित्र चढ़ावे की यह सुनियोजित चोरी पूरी तरह से बीकेटीसी अध्यक्ष के निर्देश पर संचालित की जा रही थी। उन्होंने इस बात पर गहरा आश्चर्य और रोष व्यक्त किया कि इतने पुख्ता सबूत और आरोपियों के इकबालिया बयान के बावजूद सूबे के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अब तक हेमंत द्विवेदी को उनके अध्यक्ष पद से क्यों नहीं हटाया है। गोदियाल ने कहा कि सरकार की यह चुप्पी अपने आप में एक बड़े संदेह को जन्म देती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से तीखे राजनीतिक सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान गणेश गोदियाल के निशाने पर सीधे तौर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रहे। उन्होंने मुख्यमंत्री की प्रशासनिक नैतिकता पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब आस्था के सबसे बड़े केंद्र में इस प्रकार का महाघोटाला सामने आ चुका है, तो फिर आरोपी अधिकारियों को अभयदान क्यों दिया जा रहा है?
मुख्यमंत्री से सीधे सवाल करते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा:
“इतना सब कुछ होने के बाद भी अभी तक बीकेटीसी अध्यक्ष को पद का जीवनदान क्यों दे रखा है? उसके पीछे कौन सी दोस्ती या सियासी मजबूरी है? बीकेटीसी अध्यक्ष, मुख्यमंत्री की ऐसी कौन सी कमजोरी जानते हैं, जिसके दबाव में आकर मुख्यमंत्री कोई कड़ा निर्णय नहीं ले पा रहे हैं? अब यहां तो मुख्यमंत्री इस गंभीर मामले पर तत्काल प्रभाव से निर्णय लें, नहीं तो जनता के सामने आकर खुद इस पर अपना जवाब दें।”
हेमंत द्विवेदी के अतीत का रिकॉर्ड और तराई बीज निगम का विवाद
गणेश गोदियाल ने बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी के राजनीतिक और प्रशासनिक अतीत को खंगालते हुए उन पर एक और बड़ा हमला बोला। उन्होंने साल 2011 का एक पुराना वाकया याद दिलाया, जब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की ही सरकार थी और तत्कालीन मुख्यमंत्री दिवंगत भुवन चंद्र खंडूड़ी अपनी भ्रष्टाचार विरोधी छवि के लिए जाने जाते थे। गोदियाल ने दावा किया कि उस दौरान हेमंत द्विवेदी तराई बीज निगम में अध्यक्ष के महत्वपूर्ण पद पर तैनात थे।
गोदियाल ने तत्कालीन समाचार पत्रों की सुर्खियों का हवाला देते हुए कहा कि उस समय अखबारों में प्रमुखता से यह खबर छपी थी कि ‘भ्रष्टाचार पर किया करारा वार, तराई बीज निगम के अध्यक्ष द्विवेदी को पद से हटाया गया’। उन्होंने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जिस व्यक्ति को पूर्व में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के कारण स्वयं भाजपा के ही एक मुख्यमंत्री ने पदमुक्त किया था, आखिर किस योग्यता और मंशा के तहत उन्हें दोबारा बदरीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति जैसे अति-प्रतिष्ठित और संवेदनशील धार्मिक पद की कमान सौंप दी गई? मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि समिति जैसे सम्मानित पद पर उन्हें बैठाए जाने में मुख्यमंत्री का क्या इंटरेस्ट है?
यह व्यक्तिगत चूक नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध है
प्रेस वार्ता के समापन पर गणेश गोदियाल ने पूरी दृढ़ता के साथ कहा कि वे इस मुद्दे पर किसी भी मंच पर, सरकार या मंदिर समिति के किसी भी पदाधिकारी से खुली बहस करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, लेकिन कोई उनसे बहस करने को तैयार नहीं है। इस दौरान उन्होंने समिति और भाजपा सरकार को पूरी तरह से कटघरे में खड़ा किया।
उन्होंने बदरीनाथ धाम दान चोरी मामले को कुछ छोटे कर्मचारियों की व्यक्तिगत लालच का नतीजा मानने से साफ इनकार कर दिया। गोदियाल ने हाल ही में गिरफ्तार हुए पूर्व मंदिर अधिकारी राजेंद्र चौहान के बयानों का संदर्भ देते हुए कहा कि चौहान ने स्वयं जांच में साफ कहा है कि उसे सारे आदेश प्रमोद नौटियाल से मिलते थे और नौटियाल को सीधे समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी आदेश देते थे।
गोदियाल ने निष्कर्ष निकालते हुए कहा कि यह कड़ियां स्पष्ट रूप से साबित करती हैं कि यह पवित्र मंदिर में की गई कोई सामान्य चोरी नहीं है, बल्कि यह शीर्ष स्तर से संचालित एक अत्यंत गंभीर, सुनियोजित और संगठित अपराध है। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में जल्द ही बीकेटीसी अध्यक्ष की बर्खास्तगी और निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच सुनिश्चित नहीं की गई, तो पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेगी।
