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NEET पेपर लीक मामले में बड़ा खुलासा: कमजोर लेकिन अमीर छात्रों को बनाया जाता था निशाना, करोड़ों की डील के शक में जांच तेज

The Hill India News
Last updated: May 18, 2026 7:45 am
The Hill India News
Published: May 18, 2026
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देशभर में चर्चा का विषय बने नीट पेपर लीक मामले में अब एक के बाद एक चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसियों की पड़ताल में पता चला है कि इस पूरे रैकेट के मुख्य आरोपियों में शामिल डॉ. शुभम खैरनार की नजर खास तौर पर उन अमीर परिवारों के बच्चों पर थी, जो पढ़ाई में कमजोर थे लेकिन किसी भी कीमत पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला चाहते थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को शक है कि ऐसे छात्रों को डॉक्टर बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये की डील की जाती थी।

जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह केवल पेपर लीक का मामला नहीं बल्कि एक संगठित नेटवर्क था, जो पैसों के दम पर मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता दिलाने का दावा करता था। इस नेटवर्क के जरिए उन छात्रों और उनके परिवारों को टारगेट किया जाता था, जिनके पास पैसा तो बहुत था लेकिन छात्रों की पढ़ाई कमजोर थी। आरोप है कि ऐसे परिवारों को मेडिकल सीट दिलाने के लिए बड़े पैमाने पर सौदेबाजी की जाती थी।

सीबीआई की जांच में अब महाराष्ट्र के कई नामी कोचिंग क्लास संचालकों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। शुरुआती जांच में पता चला है कि कुछ कोचिंग संस्थानों से जुड़े लोगों ने सीधे छात्रों के माता-पिता को आरोपी शुभम खैरनार से मिलवाया था। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या कोचिंग संचालक इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा थे या सिर्फ संपर्क माध्यम के रूप में काम कर रहे थे।

सूत्रों के अनुसार, शुभम खैरनार छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाता था कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कम अंक आने के बावजूद एडमिशन सुनिश्चित कराया जा सकता है। इसके बदले भारी रकम की मांग की जाती थी। जांच एजेंसियों को आशंका है कि कई मामलों में करोड़ों रुपये तक की डील हुई हो सकती है।

इस मामले में 12 मई को नासिक से डॉ. शुभम खैरनार को हिरासत में लिया गया था। जांच में सामने आया है कि शुभम खुद भी मेडिकल क्षेत्र से जुड़ा हुआ है और भोपाल के एक कॉलेज में बीएएमएस यानी आयुर्वेदिक चिकित्सा के अंतिम वर्ष का छात्र है। इतनी कम उम्र में उसका इतना बड़ा नेटवर्क चलाना जांच एजेंसियों को भी हैरान कर रहा है।

प्रारंभिक जांच में यह जानकारी भी सामने आई है कि शुभम “एसआर एजुकेशन कंसल्टेंसी” नाम से एक नेटवर्क चला रहा था। यह नेटवर्क सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं था, बल्कि कई अन्य राज्यों में भी फैला हुआ था। विज्ञापनों और दस्तावेजों के अनुसार, इस कंसल्टेंसी के कार्यालय नासिक, संभाजीनगर, पुणे और नागपुर के अलावा भोपाल और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी संचालित किए जा रहे थे।

सीबीआई अब इस बात की जांच कर रही है कि इस नेटवर्क के जरिए कितने छात्रों को मेडिकल प्रवेश दिलाया गया और किन-किन राज्यों में इसका प्रभाव था। एजेंसी उन छात्रों और अभिभावकों की सूची भी तैयार कर रही है, जिनका संपर्क इस नेटवर्क से था। इसके साथ ही बैंक खातों, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल ट्रांजैक्शन की भी जांच की जा रही है।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह रैकेट केवल परीक्षा में धांधली तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें शिक्षा माफिया का बड़ा गठजोड़ शामिल हो सकता है। एजेंसियों को शक है कि कई लोग पर्दे के पीछे से इस पूरे खेल को संचालित कर रहे थे।

इस पूरे मामले ने मेडिकल शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पैसे के दम पर अयोग्य छात्रों को डॉक्टर बनाया जाएगा, तो इसका सीधा असर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ेगा। इससे मेहनत करने वाले लाखों छात्रों के साथ भी अन्याय होता है, जो ईमानदारी से परीक्षा की तैयारी करते हैं।

नीट परीक्षा देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक मानी जाती है और हर साल लाखों छात्र इसमें शामिल होते हैं। ऐसे में पेपर लीक और फर्जीवाड़े जैसी घटनाओं ने छात्रों और अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है।

फिलहाल सीबीआई इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस नेटवर्क से जुड़े किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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