उत्तर प्रदेशफीचर्ड

यूपी पंचायत चुनाव का रास्ता साफ! योगी कैबिनेट आज कर सकती है बड़ा ऐलान, OBC आयोग के गठन पर फैसला संभव

उत्तर प्रदेश में लंबे समय से लंबित पंचायत चुनावों को लेकर अब बड़ी हलचल तेज हो गई है। माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथकी अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट बैठक में पिछड़ा वर्ग आयोग यानी ओबीसी आयोग के गठन को मंजूरी मिल सकती है। इस फैसले के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने का रास्ता काफी हद तक साफ हो जाएगा।

सूत्रों के अनुसार, सरकार पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था तय करने के लिए नए ओबीसी आयोग का गठन करने जा रही है। यही आयोग प्रदेश के सभी जिलों में सामाजिक और आर्थिक आंकड़ों का अध्ययन कर आरक्षण की अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा। इसके बाद पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। हालांकि फिलहाल यह साफ माना जा रहा है कि 26 मई तक पंचायत चुनाव कराना संभव नहीं होगा।

दरअसल, ओबीसी आयोग को प्रदेश के सभी 75 जिलों में जाकर जातिवार और आर्थिक स्थिति का सर्वेक्षण करना होगा। इसके लिए आयोग अलग-अलग जिलों में बैठकों का आयोजन करेगा और पंचायत स्तर तक डेटा जुटाया जाएगा। माना जा रहा है कि इस पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच महीने का समय लग सकता है। इसके बाद आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को देगा, जिसके आधार पर पंचायत चुनाव में आरक्षण तय किया जाएगा।

इतना ही नहीं, आयोग की रिपोर्ट आने के बाद सरकार आरक्षण से जुड़ी सिफारिशों पर राजनीतिक दलों और अन्य पक्षों से आपत्तियां भी मांगेगी। इन आपत्तियों के निस्तारण में भी लगभग एक महीने का अतिरिक्त समय लग सकता है। यही वजह है कि निकट भविष्य में पंचायत चुनाव कराना मुश्किल दिखाई दे रहा है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बरसात और खरीफ फसलों की बुवाई के दौरान पंचायत चुनाव कराना व्यावहारिक रूप से आसान नहीं होगा। ऐसे में संभावना जताई जा रही है कि पंचायत चुनाव अक्टूबर-नवंबर में कराए जा सकते हैं। हालांकि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार इस मुद्दे पर बेहद सावधानी बरत रही है।

पंचायत चुनावों को लेकर सरकार की चिंता इसलिए भी बढ़ी हुई है क्योंकि इन चुनावों में अक्सर स्थानीय स्तर पर गुटबाजी, राजनीतिक टकराव और वर्चस्व की लड़ाई देखने को मिलती है। पंचायत चुनावों का असर सीधे तौर पर राजनीतिक दलों के संगठन और आगामी विधानसभा चुनावों पर भी पड़ सकता है।

उधर, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार को पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आयोग के गठन का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट में दाखिल याचिका में समय पर पंचायत चुनाव कराने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पंचायत चुनाव टालना और ग्राम प्रधानों की जगह प्रशासकों को जिम्मेदारी देना संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। कोर्ट ने इसी आधार पर सरकार को आवश्यक कदम उठाने का आदेश दिया था।

इसके अलावा पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची तैयार करने का काम भी अभी पूरा नहीं हो पाया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने 10 जून तक अंतिम वोटर लिस्ट जारी करने का लक्ष्य रखा है। लेकिन बड़ी संख्या में आपत्तियां आने की संभावना के कारण इसमें और समय लग सकता है।

एक और बड़ा कारण यह भी है कि प्रदेश की कई ग्राम पंचायतों के इलाके नगर निकायों और शहरों में शामिल हो चुके हैं। इससे इस बार ग्राम पंचायतों की संख्या में कमी आने की संभावना जताई जा रही है।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश में कुल 57,695 ग्राम पंचायतें, 826 ब्लॉक पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव केवल राजनीतिक ही नहीं बल्कि प्रशासनिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अब सभी की नजरें योगी कैबिनेट की बैठक पर टिकी हुई हैं, जहां ओबीसी आयोग के गठन पर अंतिम मुहर लग सकती है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button