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क्या अमेरिका के एक सीक्रेट मैसेज से गई थी इमरान खान की सरकार? पाकिस्तान का चर्चित ‘साइफर’ फिर बना सियासी तूफान

The Hill India News
Last updated: May 18, 2026 5:37 am
The Hill India News
Published: May 18, 2026
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पाकिस्तान की राजनीति में लंबे समय से विवादों और साजिशों का केंद्र बना “साइफर केस” एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस बार वजह है उस कथित सीक्रेट दस्तावेज की तस्वीरों का सामने आना, जिसे लेकर पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान लगातार दावा करते रहे हैं कि उनकी सरकार गिराने के पीछे विदेशी दबाव था। अब अमेरिकी न्यूज वेबसाइट “ड्रॉप साइट” द्वारा कथित साइफर दस्तावेज जारी किए जाने के बाद पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

Contents
क्या है पूरा साइफर विवाद?रूस-यूक्रेन युद्ध बना विवाद की जड़“अगर अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाए तो सब माफ”अमेरिका और यूरोप में “अलगाव” की चेतावनीपाकिस्तान की ओर से क्या सफाई दी गई?अफगानिस्तान और क्षेत्रीय राजनीति का भी जिक्रपाकिस्तान की अमेरिका से नाराजगी भी आई सामनेभारत का भी हुआ जिक्रसाइफर का सबसे अहम हिस्सा – “आकलन”पाकिस्तान की राजनीति में फिर बढ़ सकता है विवादक्या सच में विदेशी साजिश थी?

यह वही साइफर है जिसे लेकर इमरान खान ने कई बार कहा था कि अमेरिका उनकी रूस समर्थक नीति से नाराज था और इसी कारण उनकी सरकार के खिलाफ साजिश रची गई। अब सामने आए तीन पन्नों के दस्तावेज में पाकिस्तान के तत्कालीन अमेरिका स्थित राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी विदेश विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई बातचीत का उल्लेख बताया जा रहा है।

इस कथित दस्तावेज ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या वास्तव में अमेरिका ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति में हस्तक्षेप किया था? क्या इमरान खान की सरकार गिरने के पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय दबाव था? और आखिर इस साइफर में ऐसा क्या लिखा था जिसने पाकिस्तान की राजनीति को हिला कर रख दिया?

क्या है पूरा साइफर विवाद?

साल 2022 में पाकिस्तान की राजनीति उस समय अचानक उथल-पुथल में आ गई थी जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। सत्ता संकट के बीच इमरान खान ने दावा किया कि उनकी सरकार को हटाने के पीछे विदेशी ताकतों की साजिश है।

इमरान खान ने सार्वजनिक सभाओं में एक “सीक्रेट लेटर” लहराते हुए कहा था कि अमेरिका उनकी सरकार से नाराज है और वाशिंगटन नहीं चाहता कि वे प्रधानमंत्री बने रहें। बाद में इसी दस्तावेज को “साइफर” कहा जाने लगा।

अब जो दस्तावेज सामने आया है, उसमें 7 मार्च 2022 को पाकिस्तान के अमेरिका में तत्कालीन राजदूत असद मजीद खान और अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू के बीच हुई बातचीत दर्ज होने का दावा किया गया है।

रूस-यूक्रेन युद्ध बना विवाद की जड़

साइफर के अनुसार बातचीत की शुरुआत रूस-यूक्रेन संकट से हुई थी। अमेरिकी अधिकारी डोनाल्ड लू ने पाकिस्तान की विदेश नीति और रूस के प्रति उसके “आक्रामक तटस्थ” रुख पर सवाल उठाए।

दस्तावेज के मुताबिक उन्होंने कहा कि अमेरिका और यूरोप यह समझ नहीं पा रहे कि पाकिस्तान रूस-यूक्रेन युद्ध के मामले में इतना अलग रुख क्यों अपना रहा है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यह नीति सीधे प्रधानमंत्री इमरान खान की सोच को दर्शाती है।

दरअसल, फरवरी 2022 में जब रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू किया, उसी समय इमरान खान मॉस्को दौरे पर थे। यह दौरा पहले से तय था, लेकिन युद्ध शुरू होने के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी काफी आलोचना हुई।

अमेरिका को यह बात नागवार गुजरी कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ऐसे समय रूस पहुंचे जब पूरी दुनिया मॉस्को के खिलाफ खड़ी हो रही थी।

“अगर अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाए तो सब माफ”

साइफर का सबसे विवादित हिस्सा वह माना जा रहा है जिसमें डोनाल्ड लू ने कथित तौर पर पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर टिप्पणी की।

दस्तावेज के अनुसार, असद मजीद खान ने अमेरिकी अधिकारी से पूछा कि क्या अमेरिका पाकिस्तान से इसलिए नाराज है क्योंकि उसने संयुक्त राष्ट्र महासभा में रूस के खिलाफ मतदान में हिस्सा नहीं लिया।

इस पर डोनाल्ड लू ने कथित रूप से जवाब दिया कि असली समस्या इमरान खान की मॉस्को यात्रा है। उन्होंने कहा कि अगर प्रधानमंत्री के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सफल हो जाता है, तो “वॉशिंगटन में सब माफ कर दिया जाएगा”, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो पाकिस्तान को आगे मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

यही वह कथित बयान है जिसे इमरान खान लंबे समय से अमेरिकी साजिश का सबूत बताते रहे हैं।

अमेरिका और यूरोप में “अलगाव” की चेतावनी

साइफर में यह भी कहा गया है कि यदि इमरान खान सत्ता में बने रहते हैं तो अमेरिका और यूरोप में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का “अलगाव” बढ़ सकता है।

डोनाल्ड लू ने कथित तौर पर कहा कि वॉशिंगटन में यह माना जा रहा है कि रूस यात्रा इमरान खान का व्यक्तिगत राजनीतिक फैसला था। यह बयान पाकिस्तान में काफी चर्चा का विषय बना हुआ है क्योंकि इससे अमेरिकी नाराजगी स्पष्ट दिखाई देती है।

हालांकि अमेरिका पहले भी कई बार यह कह चुका है कि उसने पाकिस्तान की राजनीति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

पाकिस्तान की ओर से क्या सफाई दी गई?

साइफर के अनुसार पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने अमेरिकी अधिकारी को समझाने की कोशिश की कि इमरान खान की रूस यात्रा पहले से तय थी और जब यात्रा की तैयारी हुई थी, तब तक रूस ने यूक्रेन पर हमला शुरू नहीं किया था।

उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल आर्थिक और द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के उद्देश्य से थी और इसे रूस के समर्थन के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

इसके अलावा असद मजीद खान ने यह भी कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति किसी एक व्यक्ति का फैसला नहीं होती, बल्कि कई सरकारी संस्थाओं के परामर्श के बाद तय की जाती है।

अफगानिस्तान और क्षेत्रीय राजनीति का भी जिक्र

साइफर में अफगानिस्तान का मुद्दा भी सामने आया है। दस्तावेज के अनुसार पाकिस्तानी राजदूत ने अमेरिका को बताया कि यूक्रेन संकट के कारण अफगानिस्तान का मुद्दा पीछे छूटता जा रहा है।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अफगान संघर्ष की भारी कीमत चुकाई है और क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए रूस समेत सभी बड़ी शक्तियों के साथ संपर्क बनाए रखना जरूरी है।

यह बयान पाकिस्तान की उस रणनीति को दिखाता है जिसमें वह अमेरिका, रूस और चीन के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करता रहा है।

पाकिस्तान की अमेरिका से नाराजगी भी आई सामने

साइफर में पाकिस्तान की नाराजगी भी झलकती दिखाई देती है। असद मजीद खान ने कथित तौर पर कहा कि पिछले एक साल से पाकिस्तान को महसूस हो रहा था कि अमेरिकी नेतृत्व उससे दूरी बना रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका पाकिस्तान से हर मुद्दे पर समर्थन चाहता है, लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर पाकिस्तान की चिंताओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

इससे यह संकेत मिलता है कि उस समय पाकिस्तान-अमेरिका संबंधों में तनाव पहले से ही मौजूद था।

भारत का भी हुआ जिक्र

कथित दस्तावेज में भारत का भी उल्लेख है। असद मजीद खान ने कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के साथ अलग-अलग व्यवहार करता है।

इसके जवाब में डोनाल्ड लू ने कथित तौर पर कहा कि अमेरिका-भारत संबंधों को चीन के नजरिये से देखा जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन संकट के बाद भारत की रूस नीति में बदलाव आ सकता है।

हालांकि बाद की घटनाओं में देखा गया कि भारत ने रूस के साथ अपने संबंधों को पूरी तरह बनाए रखा और पश्चिमी दबाव के बावजूद संतुलित नीति अपनाई।

साइफर का सबसे अहम हिस्सा – “आकलन”

दस्तावेज का अंतिम हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें पाकिस्तानी राजदूत असद मजीद खान ने अपने आकलन में लिखा कि डोनाल्ड लू इतनी कड़ी बातें अमेरिकी सरकार की मंजूरी के बिना नहीं कह सकते थे।

उन्होंने यह भी लिखा कि अमेरिकी अधिकारी ने पाकिस्तान की आंतरिक राजनीति पर खुलकर चर्चा की, इसलिए इस्लामाबाद को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।

साथ ही उन्होंने सुझाव दिया कि पाकिस्तान को अमेरिका के सामने औपचारिक विरोध दर्ज कराने पर भी विचार करना चाहिए।

पाकिस्तान की राजनीति में फिर बढ़ सकता है विवाद

इस कथित साइफर के सामने आने के बाद पाकिस्तान की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो सकता है। इमरान खान और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पहले से ही यह आरोप लगाती रही है कि उनकी सरकार को विदेशी दबाव में हटाया गया।

अब दस्तावेज सामने आने के बाद पीटीआई समर्थक इसे अपने दावों का सबूत बता रहे हैं। वहीं विरोधी दलों का कहना है कि इमरान खान ने सत्ता बचाने के लिए विदेशी साजिश का नैरेटिव गढ़ा था।

क्या सच में विदेशी साजिश थी?

सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि क्या वास्तव में अमेरिका ने पाकिस्तान की राजनीति में दखल दिया था या यह केवल एक राजनीतिक नैरेटिव था?

विशेषज्ञों का मानना है कि साइफर में मौजूद भाषा को कई तरीकों से समझा जा सकता है। कुछ लोगों के अनुसार यह सामान्य कूटनीतिक बातचीत थी, जबकि इमरान खान समर्थकों का कहना है कि यह साफ तौर पर दबाव और चेतावनी थी।

हालांकि अब तक अमेरिका ने हर बार इन आरोपों से इनकार किया है और कहा है कि उसने पाकिस्तान की राजनीति में कोई हस्तक्षेप नहीं किया।

लेकिन इतना जरूर है कि इस कथित साइफर ने पाकिस्तान की राजनीति, विदेश नीति और अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले समय में यह मामला फिर पाकिस्तान की सियासत का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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