
बीजिंग: साम्यवादी चीन की बंद दीवारों के पीछे से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया के रक्षा और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अपने ‘भ्रष्टाचार विरोधी अभियान’ के तहत अब तक की सबसे बड़ी और कठोरतम कार्रवाई करते हुए देश के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों—वी फेंघे और ली शांगफू—को मौत की सजा सुना दी है। यह फैसला न केवल चीन के सैन्य ढांचे के भीतर मचे आंतरिक कलह को उजागर करता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि जिनपिंग अपनी सत्ता को चुनौती देने वाले या दागदार छवि वाले किसी भी अधिकारी को बख्शने के मूड में नहीं हैं, चाहे वह उनके कितना ही करीब क्यों न रहा हो।
भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी: अदालत का सख्त फैसला
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, देश की एक उच्च अदालत ने दोनों पूर्व रक्षा मंत्रियों को भ्रष्टाचार के गंभीर मामलों में लिप्त पाया था। वी फेंघे को भारी मात्रा में रिश्वत लेने का दोषी ठहराया गया, जबकि उनके उत्तराधिकारी ली शांगफू पर रिश्वत लेने के साथ-साथ रिश्वत देने का भी जुर्म साबित हुआ है।
अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि इन अधिकारियों ने न केवल कानून का उल्लंघन किया, बल्कि देश की सैन्य सुरक्षा और कम्युनिस्ट पार्टी की गरिमा को भी ठेस पहुंचाई है। गौरतलब है कि ली शांगफू को साल 2024 में ही सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था, जिसके बाद से ही उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के कयास लगाए जा रहे थे।
जिनपिंग के चहेते थे दोनों मंत्री: वफादारी भी काम न आई
इस पूरी कार्रवाई में सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि वी फेंघे और ली शांगफू दोनों ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भरोसेमंद सहयोगियों में गिने जाते थे। जिनपिंग ने स्वयं वी फेंघे को 2018 में रक्षा मंत्री के पद के लिए चुना था। दोनों नेता जिनपिंग की अध्यक्षता वाले शक्तिशाली केंद्रीय सैन्य आयोग (CMC) के प्रमुख सदस्य रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अपने ही चुने हुए खास सिपहसालारों को मौत की सजा देकर जिनपिंग ने पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर एक खौफनाक संदेश भेजा है। यह संदेश साफ है: शी जिनपिंग की नज़र में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान में कोई भी व्यक्ति ‘अछूत’ नहीं है, फिर चाहे वह उनका कितना ही पुराना वफादार क्यों न हो।
मिसाइल फोर्स (Rocket Force) से जुड़े थे तार
फेंघे और शांगफू का करियर ग्राफ काफी मिलता-जुलता था। दोनों ही चीन के प्रतिष्ठित एयरोस्पेस इंजीनियर थे और दोनों ने ही 2015 में स्थापित की गई पीएलए की अति-महत्वपूर्ण ‘रॉकेट फोर्स’ का नेतृत्व किया था। यह फोर्स चीन की परमाणु और लंबी दूरी की मिसाइलों के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है।
पिछले कुछ वर्षों में रॉकेट फोर्स के भीतर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और तकनीकी विफलताओं की खबरें आती रही हैं। फेंघे के निष्कासन के बाद से ही कई शीर्ष जनरलों और अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया है। विश्लेषकों का तर्क है कि रॉकेट फोर्स में हुई गड़बड़ियों ने चीन की रणनीतिक क्षमताओं को प्रभावित किया है, जिसकी कीमत अब इन मंत्रियों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ रही है।
2012 से जारी है ‘सफाई’ अभियान
साल 2012 में सत्ता संभालने के बाद से ही शी जिनपिंग ने ‘टाइगर्स और फ्लाइज़’ (बड़े और छोटे भ्रष्ट अधिकारी) के खिलाफ युद्ध छेड़ा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो पिछले एक दशक में दस लाख से अधिक सरकारी और सैन्य अधिकारियों को सजा दी जा चुकी है। हालांकि, दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को एक साथ मौत की सजा सुनाना आधुनिक चीनी इतिहास की विरली घटनाओं में से एक है। आलोचकों का यह भी कहना है कि भ्रष्टाचार के बहाने जिनपिंग असल में सेना के भीतर मौजूद अपने विरोधियों को रास्ते से हटा रहे हैं ताकि उनका एकछत्र राज निर्बाध रूप से चलता रहे।



