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कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026: 30 अप्रैल से रजिस्ट्रेशन शुरू, जानिए रूट, नियम और संपूर्ण जानकारी

पिथौरागढ़, उत्तराखंड: आध्यात्मिक और धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र, पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा की तैयारियां जोर-शोर से शुरू हो गई हैं। वर्ष 2026 की इस यात्रा के लिए ऑनलाइन पंजीकरण (Registration) प्रक्रिया आज 30 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, और इसके लिए आवेदन करने की अंतिम तिथि 19 मई 2026 निर्धारित की गई है। पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने सीमांत क्षेत्र में यात्रा के सुचारू संचालन के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

इस वर्ष कैलाश मानसरोवर यात्रा उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे और सिक्किम के नाथुला दर्रे से संचालित की जाएगी। दोनों ही मार्गों से 10-10 दलों (बैच) में कुल 500-500 यात्रियों को कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर भेजा जाएगा।


बैठक और प्रशासनिक तैयारियां

लिपुलेख दर्रे के माध्यम से यात्रा के सफल संचालन को लेकर हाल ही में दिल्ली में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। 27 अप्रैल को विदेश मंत्रालय, कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के अधिकारियों के बीच हुई इस बैठक में यात्रा की रूपरेखा पर सहमति बनी। इस महत्वपूर्ण बैठक में पिथौरागढ़ जिले के धारचूला के उपजिलाधिकारी (SDM) भी शामिल हुए थे।

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने बताया कि जून के पहले सप्ताह से यात्रा का शुभारंभ हो जाएगा। इसके लिए सभी संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।


कैसी है पंजीकरण और चयन की प्रक्रिया?

कैलाश मानसरोवर की यात्रा के इच्छुक श्रद्धालु विदेश मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट https://kmy.gov.in पर जाकर अपना पंजीकरण कर सकते हैं। पंजीकरण प्रक्रिया के मुख्य चरण इस प्रकार हैं:

  1. ऑनलाइन आवेदन: श्रद्धालुओं को वेबसाइट पर जाकर नया अकाउंट बनाना होगा। इसके बाद आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत जानकारी और पासपोर्ट से जुड़े विवरण भरने होंगे।

  2. दस्तावेज अपलोड: फॉर्म के साथ पासपोर्ट की स्कैन कॉपी, नवीनतम पासपोर्ट साइज फोटोग्राफ और अन्य जरूरी दस्तावेज अपलोड करने होंगे।

  3. कंप्यूटरीकृत ड्रॉ: आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद उनकी गहन जांच की जाती है। यात्रियों का चयन किसी भी मानवीय हस्तक्षेप के बिना, पूरी तरह से कंप्यूटरीकृत लॉटरी (ड्रॉ) के माध्यम से किया जाता है। चयनित यात्रियों को इसकी सूचना उनके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर SMS और ईमेल के माध्यम से दी जाती है।

  4. मेडिकल परीक्षण: लॉटरी में चयनित यात्रियों को दिल्ली में अनिवार्य मेडिकल परीक्षण से गुजरना पड़ता है। आईटीबीपी और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम यात्रियों के स्वास्थ्य की जांच करती है। मेडिकल रूप से पूर्णतया फिट पाए जाने और निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद ही यात्रा का अंतिम कंफर्मेशन जारी किया जाता है।


यात्रा का बदला हुआ रूट और आसान हुई यात्रा

पहले यह यात्रा हल्द्वानी और अल्मोड़ा से होकर संचालित की जाती थी, लेकिन अब इसे बदलकर टनकपुर से कर दिया गया है। इस वर्ष भी यात्रा दिल्ली से शुरू होकर टनकपुर और चंपावत होते हुए पिथौरागढ़ पहुंचेगी। धारचूला में रात्रि विश्राम के बाद यात्रियों को वाहनों के माध्यम से गुंजी ले जाया जाएगा, जहाँ आईटीबीपी के डॉक्टरों द्वारा उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा।

पैदल यात्रा में कमी और आधुनिक सुविधाएं

वर्ष 2019 से पहले यात्रियों को लिपुलेख तक पहुंचने के लिए 60 किलोमीटर से अधिक की कठिन पैदल यात्रा करनी पड़ती थी, जिसके कारण यात्रियों को ऑक्सीजन की कमी और अन्य समस्याओं का सामना करना पड़ता था। मगर, अब लिपुलेख तक पक्की सड़क बन जाने के कारण अधिकांश पैदल पड़ाव समाप्त हो गए हैं और लगभग पूरी यात्रा वाहनों से होती है। अब चीन सीमा के समीप केवल 400-400 मीटर की ही पैदल दूरी तय करनी पड़ती है।


धार्मिक महत्व और ओम पर्वत के दर्शन

कैलाश मानसरोवर को हिंदू, बौद्ध और जैन धर्मों में भगवान शिव का निवास स्थल और अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस मार्ग पर यात्रियों को गुंजी से आगे नाभीढांग में प्राकृतिक रूप से बने ‘ओम पर्वत’ के अद्भुत दर्शन भी होते हैं। इसके पश्चात यात्री लिपुलेख दर्रा पार करके चीन की सीमा में प्रवेश करते हैं और तकलाकोट व दार्चिन होते हुए मानसरोवर झील तक पहुंचते हैं।

उल्लेखनीय है कि वर्ष 1962 से पहले इस यात्रा पर कोई प्रतिबंध नहीं था, लेकिन भारत-चीन युद्ध के बाद इसे बंद कर दिया गया था। बाद में विदेश मंत्रालय के प्रयासों से इसे फिर से शुरू किया गया और यात्रा के लिए पासपोर्ट अनिवार्य कर दिया गया।


आदि कैलाश यात्रा 1 मई से शुरू

कैलाश मानसरोवर यात्रा के अतिरिक्त, आदि कैलाश यात्रा 1 मई 2026 से विधिवत प्रारंभ हो रही है। आदि कैलाश यात्रा को लेकर भी पिथौरागढ़ जिला प्रशासन ने सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। इस यात्रा के लिए भी इनर लाइन परमिट (ILP) जारी करने की प्रक्रिया लगातार जारी है।

धारचूला के एसडीएम आशीष जोशी के अनुसार, 30 अप्रैल (बृहस्पतिवार) की दोपहर तक लगभग 160 श्रद्धालुओं ने इनर लाइन परमिट के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 80 से अधिक श्रद्धालुओं को परमिट जारी किए जा चुके हैं। जिलाधिकारी आशीष भटगांई ने आदि कैलाश जाने वाले यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की नवीनतम जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें।


कुमाऊं मंडल विकास निगम (KMVN) का योगदान

उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होने वाली इस ऐतिहासिक यात्रा का संचालन वर्ष 1981 से कुमाऊं मंडल विकास निगम द्वारा किया जा रहा है। केएमवीएन यात्रियों के ठहरने, भोजन और परिवहन की संपूर्ण व्यवस्था देखता है। वहीं, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) यात्रियों की सुरक्षा और आपातकालीन सहायता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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