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इंश्योरेंस, बिल्डर या सरकार…फ्लैट में आग लग जाए तो कौन देगा पैसा? जानिए नुकसान की भरपाई के नियम और आपके अधिकार

गाजियाबाद के इंदिरापुरम इलाके की गौर ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में बुधवार सुबह लगी भीषण आग ने एक बार फिर हाईराइज सोसाइटियों की सुरक्षा व्यवस्था और लोगों की आर्थिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में राहत की बात यह रही कि किसी की जान नहीं गई, लेकिन कई फ्लैट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए और लोगों की जिंदगी भर की जमा पूंजी मिनटों में राख हो गई। ऐसे मामलों में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या बिल्डर जिम्मेदार होगा, सोसाइटी मुआवजा देगी, इंश्योरेंस कंपनी मदद करेगी या सरकार कोई राहत देगी?

दरअसल, फ्लैट में आग लगने जैसी घटनाओं के बाद जिम्मेदारी कई हिस्सों में बंटी होती है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि आग किस वजह से लगी, फ्लैट मालिक के पास बीमा है या नहीं, और बिल्डिंग में सुरक्षा इंतजाम कितने मजबूत थे।

होम इंश्योरेंस सबसे बड़ा सहारा

विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसे हादसों में सबसे मजबूत सुरक्षा कवच होम इंश्योरेंस होता है। अगर किसी फ्लैट मालिक ने होम इंश्योरेंस कराया है, तो आग से हुए नुकसान की भरपाई बीमा कंपनी कर सकती है। होम इंश्योरेंस आमतौर पर दो हिस्सों में काम करता है। पहला, घर की संरचना यानी दीवार, छत, फर्श और फिटिंग्स का नुकसान। दूसरा, घर के अंदर मौजूद सामान जैसे फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, गहने और अन्य कीमती वस्तुएं।

अगर आग लगने से घर और सामान दोनों को नुकसान हुआ है, तो बीमा कंपनी सर्वे के बाद नुकसान का आकलन करती है और पॉलिसी की शर्तों के अनुसार मुआवजा देती है। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि पॉलिसी एक्टिव हो और समय पर क्लेम किया जाए।

बीमा क्लेम के लिए आमतौर पर पुलिस एफआईआर, फायर ब्रिगेड की रिपोर्ट, नुकसान का अनुमान और सामान के बिल या रसीद की जरूरत पड़ती है। कई लोग इंश्योरेंस तो ले लेते हैं, लेकिन सामान के बिल संभालकर नहीं रखते, जिससे बाद में क्लेम में परेशानी आती है।

अगर होम इंश्योरेंस नहीं है तो क्या होगा?

अगर किसी फ्लैट मालिक ने होम इंश्योरेंस नहीं कराया है, तो नुकसान की भरपाई की कोई गारंटी नहीं होती। ऐसी स्थिति में ज्यादातर मामलों में व्यक्ति को खुद ही आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। यही वजह है कि अब एक्सपर्ट हर फ्लैट मालिक को होम इंश्योरेंस लेने की सलाह देते हैं, खासकर हाईराइज सोसाइटियों में रहने वालों को।

आजकल कम प्रीमियम में भी बेसिक होम इंश्योरेंस मिल जाता है, जो आग, शॉर्ट सर्किट, गैस सिलेंडर ब्लास्ट और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान को कवर करता है।

बिल्डर की जिम्मेदारी कब तय होती है?

आमतौर पर लोग मानते हैं कि फ्लैट में आग लगने पर बिल्डर पूरा नुकसान भरेगा, लेकिन कानून इसके बारे में अलग तस्वीर दिखाता है। जब बिल्डर फ्लैट का पजेशन दे देता है, उसके बाद उसकी जिम्मेदारी काफी सीमित हो जाती है।

हालांकि अगर यह साबित हो जाए कि आग बिल्डिंग की खराब वायरिंग, घटिया निर्माण सामग्री, खराब इलेक्ट्रिकल सिस्टम या बिल्डर की लापरवाही की वजह से लगी है, तब बिल्डर के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। ऐसे मामलों में फ्लैट मालिक कोर्ट या रेरा (RERA) में शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट यानी RERA के तहत बिल्डरों के लिए बिल्डिंग सुरक्षा मानकों का पालन करना जरूरी है। कई मामलों में बिल्डर को बिल्डिंग का इंश्योरेंस भी कराना होता है। अगर यह नियमों के मुताबिक नहीं किया गया है, तो बिल्डर की जिम्मेदारी तय हो सकती है।

सोसाइटी या RWA क्या मदद करती है?

हाईराइज सोसाइटियों में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कई सोसाइटियों में कॉमन एरिया का इंश्योरेंस कराया जाता है। इसमें लिफ्ट, पार्किंग, क्लब हाउस, सीढ़ियां और अन्य साझा हिस्से शामिल होते हैं।

लेकिन आमतौर पर यह बीमा व्यक्तिगत फ्लैट या उसमें मौजूद सामान को कवर नहीं करता। यानी अगर किसी फ्लैट के अंदर आग लगती है और वहां रखा सामान जल जाता है, तो उसकी भरपाई RWA नहीं करती।

हालांकि अगर यह साबित हो जाए कि सोसाइटी ने फायर सेफ्टी सिस्टम का रखरखाव ठीक से नहीं किया था, फायर अलार्म काम नहीं कर रहे थे या फायर एग्जिट बंद थे, तो RWA की जिम्मेदारी तय हो सकती है।

किसी की लापरवाही से आग लगी तो क्या होगा?

अगर जांच में यह सामने आता है कि आग किसी व्यक्ति की लापरवाही से लगी और दूसरे फ्लैट्स तक फैल गई, तो मामला कानूनी बन सकता है। उदाहरण के तौर पर अगर किसी फ्लैट में गैस लीक, ओवरलोडेड वायरिंग या लापरवाही से आग लगी और इससे दूसरे लोगों को नुकसान हुआ, तो प्रभावित लोग हर्जाने की मांग कर सकते हैं।

ऐसे मामलों में पुलिस जांच और फॉरेंसिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण होती है। अगर किसी व्यक्ति की गलती साबित होती है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है। हालांकि कोर्ट में ऐसे मामलों का निपटारा अक्सर लंबा चलता है और इसमें समय व पैसा दोनों खर्च होते हैं।

क्या सरकार देती है मुआवजा?

शहरों में होने वाली सामान्य आग की घटनाओं में सरकार की ओर से सीधे मुआवजे का कोई तय नियम नहीं है। आमतौर पर सरकार केवल बड़ी प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़, भूकंप या चक्रवात जैसी स्थितियों में राहत पैकेज देती है।

हालांकि कुछ मामलों में स्थानीय प्रशासन राहत सामग्री, अस्थायी रहने की व्यवस्था या मानवीय सहायता दे सकता है, लेकिन निजी संपत्ति के नुकसान की पूरी भरपाई सरकार नहीं करती।

आग से बचाव के लिए क्या सावधानी जरूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि आग जैसी घटनाओं से बचने के लिए केवल सरकारी नियमों पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है। लोगों को खुद भी सतर्क रहने की जरूरत है।

  • हमेशा होम इंश्योरेंस जरूर लें।
  • घर में फायर एक्सटिंग्विशर रखें।
  • गैस पाइप और बिजली वायरिंग की नियमित जांच कराएं।
  • सोसाइटी के फायर सेफ्टी सिस्टम की स्थिति जरूर जांचें।
  • जरूरी दस्तावेज और कीमती सामान सुरक्षित जगह पर रखें।
  • बच्चों को भी आग से सुरक्षा के नियम सिखाएं।

गाजियाबाद की यह घटना एक बड़ा सबक है कि आधुनिक हाईराइज सोसाइटियों में रहने के बावजूद खतरे पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। ऐसे में जागरूकता, सुरक्षा इंतजाम और सही इंश्योरेंस ही किसी बड़े आर्थिक नुकसान से बचाने का सबसे मजबूत तरीका बन सकते हैं।

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