अल्मोड़ा: उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल स्थित विश्व प्रसिद्ध जागेश्वर धाम मंदिर नियम अब पहले से कहीं अधिक सख्त हो गए हैं। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माने जाने वाले इस पवित्र परिसर की मर्यादा और सुरक्षा को लेकर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने बड़ा कदम उठाया है। हाल ही में एक सुरक्षाकर्मी द्वारा गर्भगृह में हथियार लेकर प्रवेश करने की घटना के बाद उपजे विवाद ने प्रशासन को चौकन्ना कर दिया है। अब मंदिर परिसर में न केवल शस्त्रों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है, बल्कि परिसर के भीतर किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत आयोजनों को भी पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है।
विवाद की जड़: क्या थी वह घटना?
इस कड़े फैसले की पृष्ठभूमि विगत 19 अप्रैल की उस घटना से जुड़ी है, जिसने मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था और धार्मिक मान्यताओं पर सवाल खड़े कर दिए थे। दरअसल, उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के जिलाधिकारी (DM) मंदिर दर्शन के लिए पहुंचे थे। इस दौरान उनके साथ तैनात गनर प्रोटोकॉल और सुरक्षा का हवाला देते हुए अपने सरकारी असलहे (हथियार) के साथ मंदिर के अति-संवेदनशील क्षेत्र ‘गर्भगृह’ में दाखिल हो गया।
मंदिर के पुजारियों ने तत्काल इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गर्भगृह में किसी भी प्रकार का अस्त्र-शस्त्र ले जाना वर्जित और अपवित्र माना जाता है। हालांकि उस समय सुरक्षाकर्मी ने प्रोटोकॉल का तर्क दिया, लेकिन मामला तूल पकड़ने पर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग में हड़कंप मच गया। इसी चूक से सबक लेते हुए एएसआई ने अब मंदिर परिसर में नए दिशा-निर्देशों वाले साइन बोर्ड चस्पा कर दिए हैं।
ASI के नए दिशा-निर्देश: अब क्या होगा वर्जित?
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया है कि जागेश्वर धाम मंदिर नियम का पालन करना प्रत्येक श्रद्धालु और आगंतुक के लिए अनिवार्य होगा। नए नियमों के अनुसार:
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शस्त्रों पर पूर्ण प्रतिबंध: मंदिर परिसर के भीतर किसी भी प्रकार का हथियार, असलहा या नुकीली वस्तु ले जाना अब कानूनी अपराध की श्रेणी में आएगा। सुरक्षाकर्मियों को भी धार्मिक गरिमा का ध्यान रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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निजी आयोजनों पर रोक: मंदिर अब केवल आस्था का केंद्र होगा, पिकनिक या उत्सव का नहीं। एएसआई ने परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की बैठक, पार्टी, मनोरंजन कार्यक्रम, शादी, जन्मदिन या सालगिरह मनाने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
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नशा और प्रवेश: शराब या किसी भी अन्य प्रकार के नशे की हालत में मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। यह कदम मंदिर की आध्यात्मिक शांति बनाए रखने के लिए उठाया गया है।
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फोटोग्राफी और तकनीक: बिना पूर्व अनुमति के परिसर के भीतर ड्रोन कैमरा, प्रोफेशनल कैमरा या मोबाइल से वीडियो/फोटो शूट करना प्रतिबंधित रहेगा।
समय और पालतू जानवरों को लेकर भी सख्ती
नियमों की फेहरिस्त यहीं खत्म नहीं होती। एएसआई ने मंदिर में प्रवेश के समय को लेकर भी स्पष्ट गाइडलाइन जारी की है। अब सूर्योदय से पहले और सूर्यास्त के बाद किसी भी बाहरी व्यक्ति का मंदिर परिसर में प्रवेश वर्जित रहेगा। इसके पीछे का मुख्य कारण मंदिर की प्राचीन संरचनाओं की सुरक्षा और रात के समय वन्यजीवों की हलचल को बताया जा रहा है। इसके अतिरिक्त, लोग अपने पालतू जानवरों (जैसे कुत्ता, बिल्ली आदि) को मंदिर परिसर के भीतर नहीं ले जा सकेंगे।
धार्मिक गरिमा और पुरातत्व की सुरक्षा का संतुलन
अल्मोड़ा स्थित जागेश्वर धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है, बल्कि यह 124 से अधिक छोटे-बड़े मंदिरों का समूह है, जो अपनी अद्भुत स्थापत्य कला के लिए दुनिया भर में मशहूर है। एएसआई के एक अधिकारी ने बताया कि, “हमारा उद्देश्य मंदिर की ऐतिहासिक विरासत को बचाना और उसकी धार्मिक पवित्रता को अक्षुण्ण रखना है। हालिया घटनाओं ने हमें सुरक्षा प्रोटोकॉल को फिर से परिभाषित करने पर मजबूर किया है।“
नियमों वाले साइन बोर्ड अब मंदिर के प्रवेश द्वार और मुख्य परिसर में प्रमुखता से लगाए गए हैं। इनमें स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ प्राचीन स्मारक एवं पुरातत्व स्थल अवशेष अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय समुदाय और पुजारियों की प्रतिक्रिया
एएसआई के इस कदम का स्थानीय पुजारियों और हक-हकूकधारियों ने स्वागत किया है। मंदिर समिति के सदस्यों का कहना है कि वीआईपी मूवमेंट के नाम पर अक्सर धार्मिक नियमों की अनदेखी की जाती है, जो कि अनुचित है। नए जागेश्वर धाम मंदिर नियम लागू होने से अब रसूखदार लोगों और सामान्य श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था समान होगी, जिससे मंदिर की मर्यादा बनी रहेगी।



