देहरादून। उत्तराखंड की शांत वादियों में इन दिनों राजधानी देहरादून का सियासी और प्रशासनिक पारा सातवें आसमान पर है। मंगलवार को देहरादून की सड़कों पर दो तरफा प्रदर्शनों ने धामी सरकार और पुलिस प्रशासन की पेशानी पर बल ला दिया है। एक तरफ जहां विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान महिला कांग्रेस ने आरक्षण की मांग को लेकर हुंकार भरी, वहीं दूसरी ओर राजपुर रोड स्थित एक प्रतिष्ठित बार में हुए हाई-प्रोफाइल ड्रामे के बाद पुलिस महानिरीक्षक (IG) स्तर के अधिकारी के खिलाफ छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा।
IG पर लगा नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप, NSUI ने फूंका पुतला
राजपुर रोड स्थित एक बार में देर रात तक शराब परोसने और संगीत बजाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। इस प्रकरण में कथित तौर पर पुलिस के एक आलाधिकारी (IG रैंक) की संलिप्तता सामने आने के बाद एनएसयूआई (NSUI) के कार्यकर्ताओं ने पुलिस मुख्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने आईजी का पुतला दहन करते हुए जमकर नारेबाजी की और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
एनएसयूआई के जिला अध्यक्ष हिमांशु ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि, “यह घटना राज्य की कानून व्यवस्था पर एक काला धब्बा है। एक तरफ देहरादून पुलिस ‘ऑपरेशन प्रहार’ के जरिए अपराधियों पर नकेल कसने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस के ही उच्चाधिकारी स्वयं नियमों का उल्लंघन करते हुए बार में मौजूद पाए जा रहे हैं।” प्रदर्शनकारियों ने मांग की है कि संबंधित अधिकारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनकी आय से अधिक संपत्ति की भी जांच कराई जाए।
क्या है पूरा ‘देहरादून बार विवाद’?
मामले की जड़ें बीते शनिवार की रात से जुड़ी हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार, देहरादून पुलिस ने 30 मार्च से ही सभी नाइटक्लब और बार के लिए रात 11 बजे की समय सीमा तय की हुई है। इसके बावजूद, राजपुर रोड स्थित एक बार में रात 12:30 बजे तक शराब परोसी जा रही थी। जब एसपी सिटी प्रमोद कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देख दंग रह गए।
बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान अचानक आईजी रैंक के अधिकारी पुलिस टीम के सामने आ गए। सूत्रों का दावा है कि अधिकारी की मौजूदगी के कारण पुलिस टीम को कार्रवाई करने में हिचक हुई। मामला जब एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल तक पहुंचा, तो वे खुद मौके पर आए और करीब रात 1 बजे बार को बंद करवाया गया। इस पूरे देहरादून बार विवाद ने पुलिस महकमे के भीतर अनुशासन की पोल खोल दी है।
सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, हेडक्वार्टर ने तलब की रिपोर्ट
यह मामला तब सार्वजनिक हुआ जब सीपीआई एमएल (CPI ML) के स्टेट सेक्रेटरी इंद्रेश मैखुरी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया। वीडियो में आरोप लगाया गया कि एक आईजी स्तर के अधिकारी की मौजूदगी के कारण ही बार संचालक ने डेडलाइन का उल्लंघन करने की जुर्रत की। मैखुरी का यह भी दावा है कि अधिकारी ने मौके पर पहुंची पुलिस टीम को धमकाने का प्रयास किया।
इस घटना का संज्ञान लेते हुए एडीजीपी (लॉ एंड ऑर्डर) वी मुरुगेसन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने आईजी और देहरादून एसएसपी को तत्काल स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय ने इस मामले में एक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है, जिसके आधार पर आगामी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय की जाएगी।
महिला कांग्रेस का विधानसभा कूच: आरक्षण की गूंज
प्रशासनिक विवादों के बीच मंगलवार को देहरादून विधानसभा में एक दिवसीय विशेष सत्र के दौरान सियासी तपिश भी महसूस की गई। महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने भारी संख्या में विधानसभा कूच किया। उनकी प्रमुख मांग है कि संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। प्रदर्शनकारी महिलाओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह महिला सशक्तीकरण के नाम पर केवल खानापूर्ति कर रही है, जबकि जमीनी स्तर पर महिलाएं अभी भी अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही हैं।
कानून व्यवस्था और पुलिस की साख पर प्रश्नचिन्ह
देहरादून बार विवाद ने केवल एक अधिकारी की कार्यशैली पर ही नहीं, बल्कि पूरी पुलिसिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजधानी में जहां आम जनता के लिए रात 11 बजे की डेडलाइन पत्थर की लकीर मानी जा रही है, वहां रक्षक ही भक्षक की भूमिका में नजर आ रहे हैं।
छात्र संगठनों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस मामले में लीपापोती की गई, तो वे पूरे प्रदेश में व्यापक आंदोलन करेंगे। अब सबकी नजरें पुलिस मुख्यालय की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। क्या धामी सरकार अपने ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर कायम रहते हुए किसी बड़े अधिकारी पर कार्रवाई करेगी, या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा? यह आने वाला वक्त ही बताएगा।



