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ट्रंप के ‘नरक’ वाले बयान पर वैश्विक विवाद: अमेरिकी सांसद ने लगाई फटकार, भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

The Hill India News
Last updated: April 24, 2026 7:10 am
The Hill India News
Published: April 24, 2026
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अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप  एक बार फिर अपने विवादित बयान को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर घिरते नजर आ रहे हैं। इस बार उन्होंने भारत जैसे उभरते और वैश्विक स्तर पर प्रभावशाली देश को लेकर ऐसी टिप्पणी कर दी, जिसने न सिर्फ भारत बल्कि अमेरिका के भीतर भी तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दे दिया है। ट्रंप ने एक विवादास्पद पॉडकास्ट को रीपोस्ट करते हुए भारत और चीन जैसे देशों के लिए ‘नरक’ जैसे शब्द का इस्तेमाल किया, जिसे कूटनीतिक मर्यादा के खिलाफ माना जा रहा है।

ट्रंप के इस बयान ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गौरतलब है कि ट्रंप अक्सर खुद को भारत का ‘सच्चा दोस्त’ बताते रहे हैं, लेकिन इस तरह की टिप्पणी उनके दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आती है। यही वजह है कि इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

अमेरिका में भारतीय मूल के सांसद अमी बेरा ने ट्रंप के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अपमानजनक और गैर-जिम्मेदाराना बताया। बेरा ने कहा कि इस तरह की भाषा उस उच्च पद की गरिमा के खिलाफ है, जिस पर ट्रंप रह चुके हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रवासी समुदाय ने अमेरिका को कमजोर नहीं, बल्कि और अधिक मजबूत और समृद्ध बनाया है।

एमी बेरा ने अपने निजी जीवन का उदाहरण देते हुए ट्रंप की सोच को चुनौती दी। उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता भारत से अमेरिका आए थे और उन्होंने कड़ी मेहनत से अपनी पहचान बनाई। उनकी मां ने 35 वर्षों तक पब्लिक स्कूल में शिक्षक के रूप में सेवा दी, जबकि उनके पिता एक इंजीनियर के तौर पर देश के विकास में योगदान देते रहे। बेरा ने कहा कि एक प्रवासी परिवार से आने के बावजूद उन्होंने सरकारी स्कूलों से पढ़ाई की और आज अमेरिकी संसद में देश की सेवा कर रहे हैं—यही असली ‘अमेरिकन ड्रीम’ है।

बेरा के अनुसार, ट्रंप यह समझने में विफल रहे हैं कि अमेरिका की बुनियाद ही प्रवासियों के योगदान पर टिकी है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणी न केवल अपमानजनक है, बल्कि यह उन लाखों भारतीय-अमेरिकियों के योगदान का भी अपमान है, जो आज अमेरिका की अर्थव्यवस्था, तकनीक और स्वास्थ्य सेवाओं में अहम भूमिका निभा रहे हैं।

भारत सरकार ने भी इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। Ministry of External Affairs (विदेश मंत्रालय) ने ट्रंप की टिप्पणी को ‘पूरी तरह गलत जानकारी पर आधारित’ और ‘अनुचित’ बताया। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच संबंध आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित हैं, और इस तरह के बयान इन मजबूत रिश्तों को प्रभावित नहीं कर सकते।

विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, लोकतांत्रिक मूल्यों और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाला देश है, जिसे इस तरह की भाषा में संबोधित करना न केवल अस्वीकार्य है, बल्कि हकीकत से भी कोसों दूर है।

इस विवाद में एक और दिलचस्प मोड़ तब आया जब Iran ने भी ट्रंप के बयान पर तंज कसा। मुंबई स्थित ईरानी महावाणिज्य दूतावास ने सोशल मीडिया पर महाराष्ट्र की सांस्कृतिक और प्राकृतिक सुंदरता को दर्शाता एक वीडियो साझा किया और ट्रंप को ‘सांस्कृतिक डिटॉक्स’ की सलाह दी। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ट्रंप को भारत आकर यहां की विविधता और समृद्धि को समझना चाहिए, ताकि वे इस तरह की ‘बेतुकी’ टिप्पणियां करने से बचें।

इस पूरे विवाद ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वैश्विक राजनीति में शब्दों का चयन कितना महत्वपूर्ण होता है। किसी भी देश के प्रति अपमानजनक भाषा न केवल कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित करती है, बल्कि उस देश के लोगों की भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के बयान अमेरिका के भीतर भी विभाजन पैदा कर सकते हैं, खासकर तब जब वहां भारतीय मूल के लाखों लोग रहते हैं और देश के विकास में सक्रिय योगदान दे रहे हैं। ऐसे में ट्रंप का यह बयान राजनीतिक रूप से भी उनके लिए नुकसानदेह साबित हो सकता है।

कुल मिलाकर, ट्रंप का यह विवादास्पद बयान उन्हें एक बार फिर आलोचनाओं के केंद्र में ले आया है। भारत, अमेरिका और अन्य देशों की प्रतिक्रियाओं से साफ है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर जिम्मेदार और संतुलित भाषा की अपेक्षा की जाती है, और उससे किसी भी तरह का विचलन बड़े विवाद को जन्म दे सकता है।

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