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बिहार: मोतिहारी में ‘वर्दी वाले लुटेरे’ गैंग का भंडाफोड़, बर्खास्त और रिटायर्ड पुलिसकर्मी निकले मास्टरमाइंड

बिहार के मोतिहारी जिले से एक ऐसा चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने खाकी वर्दी की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आमतौर पर जिस वर्दी को कानून और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, उसी का इस्तेमाल कर कुछ लोगों ने अपराध की दुनिया में कदम रख लिया। मुफस्सिल थाना पुलिस ने एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों को डराता-धमकाता और लूट की वारदातों को अंजाम देता था। इस गिरोह में शामिल लोग कोई आम अपराधी नहीं, बल्कि पुलिस विभाग से जुड़े बर्खास्त और रिटायर्ड कर्मी थे।

इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने एक मारपीट के मामले में सफदर इमाम नाम के व्यक्ति को गिरफ्तार किया। शुरू में यह मामला साधारण लगा, लेकिन पूछताछ के दौरान सफदर ने जो जानकारी दी, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। उसकी निशानदेही पर जब छापेमारी की गई, तो एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश हुआ जो लंबे समय से सक्रिय था और बेहद शातिर तरीके से वारदातों को अंजाम दे रहा था।

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में लाल बहादुर राम, जो कि एक बर्खास्त पुलिसकर्मी है, इस गिरोह का प्रमुख मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। इसके अलावा राजेंद्र राय और प्रभु लाल शाह, जो रिटायर्ड होमगार्ड जवान हैं, भी इस गैंग का हिस्सा थे। इनके साथ मोहम्मद आरिफ और सफदर इमाम जैसे अन्य सदस्य भी जुड़े हुए थे। पुलिस के अनुसार, गिरोह में एक मिस्त्री भी शामिल था, जो जरूरत पड़ने पर तकनीकी सहायता देता था और वारदातों में सक्रिय भूमिका निभाता था।

इस गिरोह की कार्यप्रणाली बेहद चौंकाने वाली थी। ये लोग रात के समय पुलिस की वर्दी पहनकर सड़कों पर निकलते थे और राहगीरों या वाहन चालकों को रोकते थे। फिर उन्हें किसी झूठे मामले में फंसाने का डर दिखाकर उनसे पैसे वसूलते थे। कई बार तो ये लोग खुद को सीनियर अधिकारी बताकर लोगों को मानसिक रूप से दबाव में डाल देते थे, जिससे लोग बिना विरोध किए पैसे दे देते थे।

इतना ही नहीं, गिरोह का दूसरा तरीका भी काफी खतरनाक था। ये भोले-भाले लोगों को “नोट डबल करने” का लालच देकर अपने जाल में फंसाते थे। पहले विश्वास जीतने के लिए छोटी रकम को दोगुना करके दिखाते और फिर बड़ी रकम लेकर फरार हो जाते। इस तरह इन्होंने कई लोगों को अपना शिकार बनाया और लाखों रुपये की ठगी की।

पुलिस ने जब इस गिरोह के ठिकानों पर छापेमारी की, तो वहां से कई चौंकाने वाले सामान बरामद हुए। इनमें चार सेट खाकी वर्दी, टोपी, बेल्ट, पुलिस की लाठी, नकली आईडी कार्ड और पुलिस बोर्ड शामिल हैं। इसके अलावा 1 लाख 81 हजार 200 रुपये नकद और तीन लग्जरी गाड़ियां भी बरामद की गई हैं। इन सामानों से साफ जाहिर होता है कि गिरोह पूरी तैयारी के साथ लोगों को धोखा देने में लगा हुआ था।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के पास से एक नोटबुक और कुछ पासबुक भी मिली हैं, जिनमें उनके द्वारा ठगे गए लोगों का रिकॉर्ड होने की संभावना है। इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह गिरोह काफी समय से सक्रिय था और कई लोगों को अपना शिकार बना चुका है। फिलहाल पुलिस इन दस्तावेजों की जांच कर रही है, ताकि अन्य पीड़ितों की पहचान की जा सके और गिरोह के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

इस घटना ने समाज में एक गंभीर संदेश भी दिया है कि अपराधी अब नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। खासकर जब अपराधी खुद कानून से जुड़े रहे हों, तो उनका तरीका और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है क्योंकि उन्हें सिस्टम की पूरी जानकारी होती है।

पुलिस ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी तलाश जारी है और जल्द ही उन्हें भी गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि रात के समय किसी भी संदिग्ध गतिविधि को नजरअंदाज न करें और तुरंत नजदीकी थाने को इसकी सूचना दें।

मोतिहारी की यह घटना न सिर्फ कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि व्यवस्था के भीतर मौजूद कुछ लोग किस तरह उसका दुरुपयोग कर सकते हैं। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई और सतर्कता ही भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोकने का एकमात्र उपाय है।

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