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देवभूमि में ‘आधी आबादी’ असुरक्षित? ज्योति रौतेला ने आंकड़ों के साथ धामी सरकार को घेरा; बताया- हिमालयी राज्यों में नंबर-1 है अपराध

देहरादून: अपनी शांत वादियों और सांस्कृतिक विरासत के लिए विश्वविख्यात उत्तराखंड (देवभूमि) क्या अब अपराधियों की शरणस्थली बनता जा रहा है? यह गंभीर सवाल सोमवार को उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने उठाया। पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक तीखी प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रौतेला ने राज्य की कानून व्यवस्था को ‘पंगु’ बताते हुए भाजपा सरकार पर महिला सुरक्षा के मोर्चे पर पूरी तरह विफल होने का आरोप लगाया।

‘अंकिता से कोटद्वार तक… न्याय की उम्मीद धूमिल’

ज्योति रौतेला ने अपने संबोधन की शुरुआत राज्य को झकझोर देने वाली पुरानी और हालिया घटनाओं के जिक्र से की। उन्होंने कहा कि 2022 में पौड़ी गढ़वाल का अंकिता भंडारी हत्याकांड इस बात का प्रमाण है कि सत्ता के रसूखदार किस तरह न्याय को प्रभावित करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकरण में ‘वीआईपी’ की संलिप्तता जगजाहिर होने के बावजूद सरकार और पुलिस प्रशासन ने मुख्य आरोपी को बचाने की कोशिश की।

इतना ही नहीं, उन्होंने 2024 में रुद्रपुर में एक नर्स के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म और हत्या, और हाल ही में 2026 की शुरुआत में कोटद्वार में एक नाबालिग के साथ हुई दरिंदगी का उदाहरण देते हुए कहा कि अपराधियों के मन से कानून का खौफ खत्म हो चुका है। ज्योति रौतेला के अनुसार, “जब से भाजपा सत्ता में आई है, उत्तराखंड में महिलाओं के विरुद्ध जघन्य अपराधों की बाढ़ आ गई है।”

आंकड़ों की जुबानी: हिमालयी राज्यों में ‘नंबर वन’ बना उत्तराखंड

कांग्रेस अध्यक्ष ने केवल आरोप ही नहीं लगाए, बल्कि गृह विभाग और क्राइम रिकॉर्ड्स के हवाले से चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए। उन्होंने दावा किया कि उत्तराखंड आज सभी हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड महिला अपराध की दर में शीर्ष पर है।

रौतेला ने तंज कसते हुए कहा कि विगत 5 वर्षों में दर्ज हुए ये हजारों मामले भाजपा के “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के दावों की पोल खोलते हैं।

राजधानी देहरादून: अपराध का नया ‘एपिसोड’

ज्योति रौतेला ने देहरादून की बिगड़ती स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राजधानी अब सुरक्षित नहीं रही। पिछले एक महीने के भीतर देहरादून में 10 से अधिक गंभीर अपराधों को अंजाम दिया गया है। उन्होंने हालिया घटनाओं की एक लंबी सूची पेश की:

  1. रिटायर्ड ब्रिगेडियर की मौत: हाल ही में एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी की गोली लगने से हुई मौत ने सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

  2. चूना भट्ठा कांड: एक विवाहित महिला का संदिग्ध अवस्था में शव मिलना।

  3. शिक्षण संस्थानों में हिंसा: प्रेमनगर के केहरी में एक छात्र की पीट-पीटकर हत्या और छात्रों के बीच बढ़ते खूनी संघर्ष ने अभिभावकों को डरा दिया है।

  4. पुलिस अभिरक्षा में मौत: पीआरडी जवान की थाने में हुई संदिग्ध मौत ने खाकी की कार्यप्रणाली पर भी दाग लगाए हैं।

नशे का काला कारोबार और सरकारी विफलता

महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उत्तराखंड में विशेषकर देहरादून और तराई के इलाकों में नशे का कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। यही नशा युवाओं को अपराध की ओर धकेल रहा है। उन्होंने कहा कि लालकुआं के जंगलों में पेड़ से लटके मिले शवों से लेकर एंजेल चकमा हत्याकांड तक, पुलिस केवल ‘खानापूर्ति’ कर रही है।

ज्योति रौतेला ने कड़े शब्दों में कहा, “सरकार अपनी विफलताओं को छुपाने के लिए इवेंट मैनेजमेंट में व्यस्त है, जबकि प्रदेश की बेटियाँ और आम नागरिक असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। भाजपा के शासनकाल में कानून व्यवस्था ध्वस्त हो चुकी है और अपराधी बेखौफ होकर वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।”

कांग्रेस की चेतावनी

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में ज्योति रौतेला ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि महिला सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए और अंकिता भंडारी जैसे मामलों में ‘वीआईपी’ चेहरों को बेनकाब नहीं किया गया, तो महिला कांग्रेस पूरे प्रदेश में सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। उन्होंने मांग की कि राज्य में ‘फास्ट ट्रैक कोर्ट्स’ की संख्या बढ़ाई जाए और पुलिस की जवाबदेही तय की जाए।


उत्तराखंड में बढ़ते अपराधों ने निश्चित रूप से सरकार की छवि पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। ज्योति रौतेला द्वारा उठाए गए मुद्दे केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं, बल्कि आम जनता के मन में घर कर रहे डर का प्रतिबिंब हैं। अब देखना यह होगा कि धामी सरकार इन आंकड़ों और आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और प्रदेश में ‘सुशासन’ की बहाली के लिए क्या ठोस कदम उठाती है।

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